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ABN NEWS :- देश दुनिया : पेट्रोल-डीजल, खाने का तेल, सोना, फर्टिलाइजर... पीएम मोदी की सलाह मानी तो कितनी हो सकती है देश की बचत?

Abhyuday Bharat News / Sat, May 16, 2026 / Post views : 184

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ईरान युद्ध ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। थोक महंगाई 42 साल के उच्चतम स्तर पर चुकी है, पेट्रोल-डीजल और गैस महंगी हो चुकी है, रुपया शतक मारने की तैयारी में है और चालू खाते का घाटा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील से देश को कितना फायदा हो सकता है?

नई दिल्ली: ईरान युद्ध को ढाई महीने से अधिक समय हो चुका है और इसके खत्म होने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है। इस युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है और इसे दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी संकट कहा जा रहा है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत में 50% इजाफा हुआ है। इस युद्ध ने दुनिया के कई देशों को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है जो पूरी तरह तेल और गैस का आयात करते हैं। भारत पर भी अब इसका असर दिखाई देने लगा है। रुपया रोज-रोज ऑल टाइम लो पर जाने के रेकॉर्ड बना रहा है और इस साल चालू खाते का घाटा 14 साल के उच्चतम स्तर पर जाने का खतरा मंडरा रहा है। अप्रैल में थोक महंगाई ने कई साल का रेकॉर्ड तोड़ दिया। माना जा रहा है कि अगर पश्चिम एशिया में शांति बहाल होती है तब भी तेल की सप्लाई नॉर्मल होने में लंबा समय लग सकता

 है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल की खपत कम करने, एक साल तक सोना नहीं खरीदने, रासायनिक खाद का प्रयोग कम करने और विदेश यात्रा से परहेज करने की अपील की है। इससे विदेशी मुद्रा बचेगी और रुपये पर दबाव कम होगा। इस साल रुपये में 6.5% से अधिक गिरावट आ चुकी है और यह एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी है। पिछले एक साल में इसमें 11 फीसदी से अधिक गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार पहुंच चुका है। माना जा रहा है कि अगर यही स्थिति रही तो यह 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार जा सकता है।

कुल आयात में हिस्सेदारी

पिछले वित्त वर्ष में भारत का कुल आयात 775 अरब डॉलर का रहा था। इसमें कच्चे तेल, गोल्ड, वेजिटेबल ऑयल और फर्टिलाइजर्स की हिस्सेदारी 240.7 अरब डॉलर यानी करीब 31 फीसदी थी। इस दौरान भारत ने 134.7 अरब डॉलर का कच्चा तेल, 72 अरब डॉलर का सोना, 19.5 अरब डॉलर का वनस्पति तेल और 14.5 अरब डॉलर की फर्टिलाइजर आयात की थी। सोने और फर्टिलाइजर्स के आयात में सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिली। सोने का आयात जहां करीब 24 फीसदी बढ़ गया वहीं फर्टिलाइजर्स के आयात में 77 फीसदी की तेजी आई।

तेल की कीमत में लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। इससे देश का चालू खाते का घाटा लगातार बढ़ रहा है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में इसके जीडीपी का 0.8 फीसदी रहने का अनुमान है। लेकिन तेल की कीमतों में तेजी के साथ सोने और चांदी की कीमत में उछाल ने भारत का आयात बिल काफी बढ़ा दिया है। अधिकांश जानकारों का कहना है कि इस फाइनेंशियल ईयर में चालू खाते का घाटा जीडीपी के 2 फीसदी से अधिक रह सकता है। बाहरी झटकों से इकॉनमी को बचाने के लिए सरकार के उपाय करने शुरू कर दिए हैं।

क्या कर रही सरकार?

सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि कच्चे तेल, फर्टिलाइजर्स, इंडस्ट्रियल रॉ मटीरियल्स, डिफेंस, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और कैपिटल गुड्स जैसे सामान के आयात को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी प्रति लीटर 3 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इससे पहले सरकारी कंपनियों को हर महीने 30,000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था। आईएमएफ समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने तेल की कीमत में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर डालने की सलाह दी थी। माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत अभी और बढ़ सकती है।

भारत अपना 90 फीसदी तेल और 50 फीसदी गैस आयात करता है। इस बीच अर्थशास्त्रियों ने इस साल के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को कम करना शुरू कर दिया है। चालू घाटे के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी भारत के लिए सिरदर्द बनी हुई है। ईरान युद्ध के बाद से विदेशी निवेशक भारत से करीब 20 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। इस साल अब तक वे जितना पैसा निकाल चुके हैं, वह पिछले पूरे साल की निकासी से ज्यादा है। साथ ही ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से आने वाला करीब 40 अरब डॉलर का रेमिटेंस भी प्रभावित होने की आशंका है।

विदेशी मुद्रा की बचत

हालांकि फाइनेंशियल ईयर 2025 की तुलना में 2026 में कच्चे तेल का बिल कम रहा लेकिन फिर भी यह देश के कुल आयात का 17.4 फीसदी रहा। इसी तरह वनस्पति तेल का आयात कुल इंपोर्ट का 2.5 फीसदी रहा जबकि फर्टिलाइजर्स की हिस्सेदारी 1.9 फीसदी रही। साथ ही विदेश यात्रा पर भारतीयों के 2026 में 23.4 अरब डॉलर खर्च करने का अनुमान है। यानी अगर लोग प्रधानमंत्री की सलाह मानते हैं तो भारत को विदेशी मुद्रा में काफी बचत हो सकती है। इससे देश का चालू खाते का घाटा कम होगा और रुपये की स्थिति भी मजबूत होगी।

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# International News

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