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: सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर दियाअहम फैसला

Admin / Wed, Jul 10, 2024 / Post views : 312

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अभ्युदय भारत न्यूज़ ABN Express News 24x7

नई दिल्ली/ सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। एक मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम न्यायालय ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं भी पति से गुजारा भत्ता मांग सकती है। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 125 (Section 125 of CrPC) के तहत मुस्लिम तलाकशुदा महिला पति से गुजारा भत्ता की मांग कर सकती है। दरअसल तेलंगाना हाईकोर्ट ने मोहम्मद अब्दुल समद को अपनी तलाकशुदा पत्नी को हर महीने 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के आदेश दिया था। इसके खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। आज (10 जुलाई) को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह बड़ा फैसला सुनाया।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम महिला भरण-पोषण के लिए कानूनी अधिकार का इस्तेमाल कर सकती हैं। वो इससे संबंधित दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत याचिका दायर कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये धारा सभी विवाहित महिलाओं पर लागू होती है, फिर चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। मुस्लिम महिलाएं भी इस प्रावधान का सहारा ले सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि मुस्लिम महिला अपने पति के खिलाफ धारा 125 सीआरपीसी के तहत भरण-पोषण के लिए याचिका दायर कर सकती है।कोर्ट ने माना कि ‘मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 1986’ धर्मनिरपेश कानून पर हावी नहीं हो सकता है। जस्टिस श्री नागरत्ना और जस्टिस श्री मसीह ने अलग-अलग, लेकिन सहमति वाले फैसले दिए. हाईकोर्ट ने मोहम्मद समद को 10 हजार रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था।

क्या है मामला..?

अब्दुल समद नाम के एक मुस्लिम शख्स ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने के तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट में शख्स ने दलील दी थी कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला सीआरपीसी की धारा 125 के तहत याचिका दायर करने की हकदार नहीं है। महिला को मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 अधिनियम के प्रावधानों के तहत ही चलना होगा। ऐसे में कोर्ट के सामने सवाल था कि इस केस में मुस्लिम महिला अधिनियम, 1986 को प्राथमिकता मिलनी चाहिए या सीआरपीसी की धारा 125 को।

क्या है सीआरपीसी की धारा 125

सीआरपीसी की धारा 125 में पत्नी, संतान और माता-पिता के भरण-पोषण को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई है। इस धारा के अनुसार पति, पिता या बच्चों पर आश्रित पत्नी, मां-बाप या बच्चे गुजारे-भत्ते का दावा केवल तभी कर सकते हैं, जब उनके पास आजीविका का कोई और साधन उपलब्ध नहीं हो।

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