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ठेकेदार सुरेश की साजिश, बेरहमी से पत्रकार का कत्ल और SIT का सनसनीखेज खुलासा..
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पत्रकार मुकेश चंद्राकर मर्डर केस की जांच कर रही एसआईटी ने कई बड़े खुलासे किए हैं. इसमें कहा गया है कि मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर ने इस हत्याकांड से कुछ दिन पहले अपने बैंक अकाउंट से बड़ी रकम निकाली थी. सुरेश ने ही अपने भाईयों के साथ मिलकर मुकेश की हत्या की साजिश रची थी. पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने हत्या की वजह खराब सड़क से संबंधित खबर को बताया है.छत्तीसगढ़ में पहली बार इस मर्डर केस की जांच में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया गया है. एसआईटी ने जांच के दौरान AI और Osint Tool का इस्तेमाल किया है. हत्या के लिए इस्तेमाल किए गए लोहे के रॉड सहित अन्य सामान बरामद कर लिए गए हैं. इसे आरोपियों ने बीजापुर गीदम नेशनल हाईवे पर तुमनार नदी के पास छिपाया था. इस कांड में इस्तेमाल की गई चार गाड़ियां भी जब्त कर ली गई हैं.
वारदात से 4 दिन पहले सुरेश ने बैंक से निकाली बड़ी रकम
एसआईटी के मुताबिक, मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर उसके सड़क निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली खबरों से नाराज था. उसने घटना से चार दिन पहले 27 दिसंबर को अपने बैंक खाते से बड़ी रकम निकाली थी. मुकेश चंद्राकर (33) 1 जनवरी को लापता हो गए थे. उनका शव 3 जनवरी को बीजापुर शहर के चट्टनपारा बस्ती में सुरेश चंद्राकर के स्वामित्व वाली संपत्ति पर एक सेप्टिक टैंक में मिला था.
ऐसे की मुकेश की कमरे में बंद हत्या
पुलिस ने बताया कि सुरेश चंद्राकर को 5 जनवरी को हैदराबाद से पकड़ा गया था, जबकि उसके भाई रितेश, दिनेश चंद्राकर और साइट सुपरवाइजर महेंद्र रामटेके को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था. इन चारों में रितेश और महेंद्र ने क्राइम सीन के 17 कमरों में से कमरा नंबर 11 में मुकेश चंद्राकर पर लोहे की रॉड से हमला कर कर उसे घातक चोटें पहुंचाईं. इसके बाद शव को सेप्टिक टैंक में डालकर कंक्रीट से ढक दिया.

मुकेश चंद्राकर हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता ठेकेदार सुरेश..
वारदात के बाद सबूत छिपाने के लिए नदी में फेंका मोबाइल
दिनेश चंद्राकर 1 जनवरी की रात को वारदात के बाद सबूत छिपाने और सुरेश चंद्राकर की पूर्व नियोजित योजना के अनुसार आरोपियों को भागने में मदद करने के लिए आया था.सुरेश चंद्राकर ने घटना के समय शहर से बाहर रहने की योजना बनाई थी, ताकि उस पर संदेह न हो. रितेश, दिनेश और महेंद्र ने साजिश के तहत मुकेश चंद्राकर के दो मोबाइल फोन बीजापुर से करीब 65 किलोमीटर दूर तुमनार नदी में फेंक दिया था.
भ्रष्टाचार उजागर करने वाली खबरों से परेशान था सुरेश
इतना ही नहीं आरोपियों ने मुकेश के मोबाइल फोन को फेंकने से पहले पत्थरों से तोड़ दिया. पुलिस ने गोताखोरों की मदद से तलाशी ली, लेकिन फोन अभी तक बरामद नहीं हुए हैं. पूछताछ के दौरान सुरेश चंद्राकर ने पुलिस को बताया कि मुकेश उसका रिश्तेदार था. वह अपने चैनल पर उसके खिलाफ खबरेंप्रकाशित कर रहा था, जिससे उसके काम के खिलाफ जांच हो रही है. इस वजह से वो परेशान चल रहा था.
1. मुकेश चंद्राकर 1 जनवरी से गायब थे. अलगी रात तक भी मुकेश का कुछ पता नहीं चला तो भाई युकेश चंद्राकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज कराई.
2. रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देख बड़े अधिकारियों को सूचना दी. जिसके बाद तुरंत साइबर सेल, बड़े अधिकारी और जवानों को उनकी तलाश में लगाया गया.
3. मुकेश चंद्राकर के सभी मोबाइल नंबर बंद आ रहे थे. आखिरी लोकेशन नृकनपाल और जांगला सेक्टर की थी.... जो भैरमगढ़ की ओर है. पुलिस अलर्ट हुई और पत्रकार समेत टीम के साथ वहां पर पहुंचीं. लेकिन कोई सुराग नहीं मिला.
4. तभी मुकेश के भाई युकेश चंद्राकर ने G-Mail के ज़रिए आखिरी लोकेशन चेक की. तो मुकेश की लोकेशन चट्टानपारा के एक बाड़े की मिली.
5. पुलिस फ़ौरन अलर्ट हुई और तुरंत वहां पहुंची. वहां जाकर बाड़े के पूरा एरिया का सर्च किया. पुलिस ने देखा कि बाड़े में कुल 17 कमरे थे जिन पर ताले लगे थे.
6. अब बाड़े के मालिक यानी कि ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को बुलाया गया. उनके आने पर ताले खुलवाए गए लेकिन वहां पर कुछ नहीं मिला.
7. पुलिस ने बाड़े के पास एक नया सेप्टिक टैंक देखा. पुलिस ने सुरेश से पूछा कि ये क्या है ? तो सुरेश ने कहा कि ये बाथरूम के रेनोवेशन का काम चल रहा है.
8. इसके बाद पुलिस ने सुरेश से रितेश चंद्राकर के बारे में पूछा. सुरेश ने बताया कि उनकी दो साल से रितेश से कोई बात नहीं हुई है.
जानकारी के लिए बता दें कि रितेश चंद्राकर, मुकेश चंद्राकर का चचेरा भाई था. पुलिस को शुरुआती जाँच में रितेश पर ही शक था.
9. इसके बाद पुलिस ने उसी रात रितेश चंद्राकर और अन्य संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच के लिए सायबर सेल को भेजा.
10. इसके बाद पुलिस ने रितेश की तलाश में अलग-अलग टोल प्लाजा के CCTV फुटेज खंगाले. इसके बाद 02 जनवरी सुबह 8:20 बजे, रितेश को कोण्डागांव टोल प्लाजा पर एक थार गाड़ी (CG 04 0001) में जाते देखा गया.
CCTV के ज़रिए जोड़ी गई कड़ी-दर-कड़ी
इसके बाद कई CCTV के ज़रिए गाड़ी का फॉलो अप लिया गया. अनुमान के आधार पर रायपुर एयरपोर्ट के CCTV फुटेज देखे गए. और पुलिस को रितेश की थार गाड़ी एयरपोर्ट के पार्किंग में मिली. इसके बाद पुलिस ने एयरपोर्ट से उस समय की फ्लाईट से आने जाने वालों की डिटेल मांगी. जांच में पता चला कि रितेश ने 02 जनवरी 2025 को सुबह रायपुर से दिल्ली की फ्लाइट टिकट ऑनलाइन बुक की थी. वारदात के बाद रितेश चंद्राकर दिल्ली क्यों जा रहा था ? इस बात से पुलिस का शक और मजबूत हो गया.
मुकेश के घर के CCTV फुटेज भी खंगाले
पुलिस ने 02 जनवरी से लेकर 03 जनवरी की दरम्यानी रात तक लगातार छानबीन जारी रखी और सबूत जुटाने की कोशिश की. इसके बाद मुकेश चंद्राकर के घर के आसपास कुल चार जगहों पर लगे CCTV कैमरों की जांच की गई. हालांकि CCTV कैमरे मुकेश के घर से काफी दूर लगे थे... और रात का समय होने के चलते फुटेज में ये तो नहीं दिखा कि मुकेश किस गाड़ी से घर से बाहर निकले थे ? क्लीयर नही होने से कुछ पुख्ता जानकारी वहां से नहीं मिली.
कॉल डिटेल्स से खुले मामले के कई सवाल
इसके बाद SP ने पत्रकार साथियों से मुकेश के बारे में पूछताछ की. वे खुद सर्च ऑपरेशन में शामिल हुए और टीम की सभी गतिविधियों की निगरानी करते हुए दिशा-निर्देश देते रहे. रात 3-4 बजे के बीच पुलिस को मुकेश और रितेश के कॉल डिटेल्स (CDR) प्राप्त हुए. एनालिसिस में पाया गया कि मुकेश के अंतिम कॉल से पहले दो कॉल रितेश से ही थे. इससे ये साफ़ हुआ कि रितेश का मुकेश की गुमशुदगी में कोई न कोई संबंध जरूर है. गौर करें कि अभी तक पुलिस को मुकेश की कोई खबर नहीं मिली थी. मुकेश अभी भी लापता ही थे.
रितेश के भाई का नंबर आ रहा था बंद
इसी कड़ी में पुलिस को ये भी जानकारी मिली कि रितेश के अलावा उसके भाई दिनेश चंद्राकर भी इस मामले में शामिल हो सकता है. पुलिस ने रितेश की CDR से दिनेश चंद्राकर का नंबर निकला. कॉल करने पर पता चला दिनेश का नंबर बंद है. उसका मोबाइल बंद होने के कारण पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की. 03 जनवरी की सुबह पुलिस को पता चला कि दिनेश बीजापुर जिला अस्पताल में भर्ती है. इसके बाद पुलिस अलर्ट हो गई और तुरंत उसे खोजने का अभियान तेज किया.
आरोपी ने अस्पताल में ही उगले राज
सुबह करीब 12 बजे पुलिस बीजापुर जिला अस्पताल में पंहुची जहां दिनेश चंद्राकर अस्पताल में मिला. डॉक्टर की अनुमति से उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई. शुरुआत में दिनेश ने किसी भी जानकारी से इनकार किया. लेकिन सख्ती और CDR व लोकेशन के आधार पर 3 घंटे की पूछताछ के बाद उसने कबूल किया कि उसका भाई रितेश और महेंद्र रामटेके ने मिलकर मुकेश की लोहे की रॉड से हत्या की... फिर हत्या के बाद शव को सेप्टिक टैंक में छुपा दिया.
खुलासे के बाद सेप्टिक टैंक को खुदवाया
बता दें कि महेंद्र रामटेके रितेश चंद्राकर का सुपरवाइजर था. दोनों साथ में ही सुरेश चंद्राकर के साथ ठेकेदारी का काम चलते थे. पुलिस को महेंद्र रामटेके के बारे में जानकारी मिलने के बाद उसे तुरंत पकड़ने की कोशिश शुरू हुई. उसे बीजापुर के नए बस स्टैंड के पास से हिरासत में ले लिया गया. पूछताछ में उसने अपना गुनाह मान लिया. घटना की पूरी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई. सेप्टिक टैंक की खुदाई के लिए प्रशासनिक अधिकारी, नगर पालिका के कर्मचारियों और फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया.
अंदर मिला पत्रकार मुकेश का शव
03 जनवरी को को शाम करीब 5 बजे सेप्टिक टैंक का ढक्कन हटाया गया. टॉर्च की रोशनी में टैंक के अंदर एक शव दिखाई दिया. मौके पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात कर जगह को घेर लिया गया. पुलिस ने शव की पहचान कराई, जिसमें पुष्टि हुई कि यह गुमशुदा पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव था. शव का पोस्टमार्टम के लिए पंचनामा तैयार कर मर्चरी भेजा गया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि मुकेश चंद्राकर रिश्ते में इनके भाई लगते थे और NDTV में पत्रकार थे. मुकेश इन लोगों के ठेकेदार काम के खिलाफ खबर चला रहे थे. इसी वजह से इनके काम की जांच शुरू हो गई थी. इससे नाराज होकर सुरेश चंद्राकर ने अपने साथ रितेश, महेंद्र और दिनेश के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची.
अभी तक नहीं मिला मुकेश का फोन
पुलिस ने बिना देर किए दिनेश और महेंद्र को बीजापुर से और रितेश को रायपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ के दौरान हत्या में इस्तेमाल वाहन, लोहे की रॉड, और अन्य सबूत भी बरामद किए गए. तीनों आरोपियों ने साजिश के तहत मुकेश के दोनों मोबाइल चालू हालत में तुमनार नदी के पास ले जाकर पत्थरों से तोड़ दिए और नदी में फेंक दिए. पुलिस अब भी गोताखोरों की मदद से मोबाइल की तलाश कर रही है