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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : 10 साल से गोदाम में कैद गरीबों का हक : बदलती रहीं सरकारें, धूल खाते रहे टिफिन

Abhyuday Bharat News / Fri, Jul 10, 2026 / Post views : 133

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खैरागढ़. सरकारी योजनाएं गरीबों तक समय पर पहुंचें, इसके लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। लेकिन जनपद पंचायत खैरागढ़ की एक तस्वीर सरकारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। मनरेगा मजदूरों के लिए खरीदे गए 5, 860 टिफिन डिब्बे पिछले करीब 10 साल से सरपंच सदन में धूल खा रहे हैं। जिन गरीब मजदूरों को इनका लाभ मिलना था, वे आज भी इंतजार कर रहे हैं. मामला मुख्यमंत्री मनरेगा मजदूर टिफिन वितरण योजना का है।

जनपद पंचायत के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2016-17 में ऐसे परिवारों को टिफिन दिया जाना था, जिनके किसी सदस्य ने मनरेगा में 30 दिन या उससे अधिक रोजगार प्राप्त किया था. शासन ने खैरागढ़ जनपद को 15, 220 टिफिन डिब्बे उपलब्ध कराए थे. इनमें से 9,360 टिफिन वितरित कर दिए गए, लेकिन 5, 860 टिफिन आज भी गोदाम में पड़े हैं। अब वित्तीय वर्ष 2026-27 चल रहा है, लेकिन करीब एक दशक बाद भी हजारों पात्र हितग्राही अपने अधिकार का इंतजार कर रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि जिन टिफिनों का वितरण वर्षों पहले हो जाना चाहिए था, वे आज भी सरपंच सदन में रखे हैं। यह भवन पंचायत प्रतिनिधियों के बैठने, जनपद कार्य से आने वाले सरपंचों के रुकने और बैठकों के लिए बनाया गया था. लेकिन वर्षों से यहां टिफिन डिब्बों का ढेर लगा हुआ है।

हालात ऐसे हैं कि सरपंचों के लिए बना भवन अब गोदाम बनकर रह गया है और कई बार पंचायत प्रतिनिधियों को बैठने तक में असुविधा का सामना करना पड़ता है। जनपद पंचायत के रिकॉर्ड के मुताबिक 2018 में विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण शेष टिफिनों का वितरण रोक दिया गया था। इसके बाद कलेक्टर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से मार्गदर्शन मांगा गया, लेकिन यह मामला फाइलों में ऐसा उलझा कि पूरा एक दशक गुजर गया। न टिफिन बंटे और न ही कोई अंतिम निर्णय हो सका।

इस दौरान प्रदेश में दो बार सरकार बदली. पहले भाजपा सरकार थी, फिर कांग्रेस की सरकार आई और उसका पूरा कार्यकाल बीत गया. वर्ष 2023 के अंत में भाजपा फिर सत्ता में लौटी और उसे भी करीब दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन 5,860 टिफिन आज भी अपने असली हितग्राहियों तक नहीं पहुंच सके.

सवाल उठता है कि जब सरकारें और अधिकारी बदलते रहे तो फिर इस योजना को पूरा करने की जिम्मेदारी किसने निभाई? हाल ही में हुई सरपंच संघ की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा. कई सरपंचों ने मांग की कि या तो पात्र हितग्राहियों को टिफिन तत्काल वितरित किए जाएं या फिर नियमानुसार उनका निस्तारण कर सरपंच सदन को खाली कराया जाए. उनका कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों के लिए बने भवन को वर्षों तक सरकारी सामान का गोदाम बनाए रखना उचित नहीं है। जनपद पंचायत खैरागढ़ के सीईओ हिमांशु गुप्ता ने कहा कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है। पूरे रिकॉर्ड की जांच और संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने के बाद ही वे इस मामले में विस्तृत जानकारी दे पाएंगे।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गरीब मजदूरों के लिए खरीदी गई सामग्री आखिर कब तक गोदाम में धूल खाती रहेगी? अगर पात्र हितग्राहियों तक योजना का लाभ आज तक नहीं पहुंच पाया, तो यह केवल प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों की अनदेखी भी है। जिला प्रशासन के सामने अब चुनौती सिर्फ टिफिन बांटने की नहीं, बल्कि दस साल से लंबित इस मामले की जवाबदेही तय करने की भी है।

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