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नेपाल न्यूज़ : नेपाल ने भी भारतीय जमीन पर कब्जा किया' संसद में बालेन शाह का पहला भाषण, सीमा विवाद पर UK से दखल की मांग

Abhyuday Bharat News / Sun, May 31, 2026 / Post views : 155

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भारत ने हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा का ऐलान किया था तो इस पर नेपाल ने एतराज जताया था। नेपाल की शाह सरकार ने दावा किया था यह यात्रा लिपुलेख से नहीं जा सकती क्योंकि यह उनके देश का हिस्सा है।

भारत ने हाल ही में कैलाश मानसरोवर यात्रा का ऐलान किया था तो इस पर नेपाल ने एतराज जताया था। नेपाल की शाह सरकार ने दावा किया था यह यात्रा लिपुलेख से नहीं जा सकती क्योंकि यह उनके देश का हिस्सा है।

काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने रविवार को नेपाल की संसद को संबोधित किया है। इस साल मार्च में हुए चुनावों के बाद सत्ता संभालने के बाद यह पहला मौका है, जब नेपाल के प्रधानमंत्री शाह ने संसद में अपनी बात रखी है। संसद में भाषण के दौरान शाह ने नेपाल के कई मुद्दों पर चर्चा की तो अपनी सरकार की विदेश नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने खासतौर से भारत के साथ विवादित मुद्दों को टकराव के बजाय बातचीत के जरिए हल करने पर जोर दिया है।

नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) को संबोधित करते हुए बालेंद्र शाह ने कहा, 'प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे पता चला कि ना केवल भारत ने नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण किया है बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया है। दोनों पक्षों को बैठकर इस मामले पर विचार करना चाहिए।' संसद में श्रम संस्कृति पार्टी के आरेन राय के एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने ये बात कही।

लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर चल रहे विवादों को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। नेपाल पहले ही भारत को एक आधिकारिक कूटनीतिक नोट भेज चुका है और उसका जवाब भी मिल चुका है।

बालेन शाह

नेपाल-भारत के रिश्ते

बालेन शाह ने कहा कि भारत-नेपाल की सरकारें इतिहासकारों, सर्वेक्षकों औ इलाके से परिचित विशेषज्ञों की टीमें बनाएंगी और बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश करेंगी। नेपाल ने सीमा विवाद को लेकर ना सिर्फ भारत और चीन से बात की है बल्कि यूके की सरकार से भी बातचीत की है।'

शाह ने आगे कहा कि हमारा मानना है कि यूके को इसमें दिलचस्पी लेनी चाहिए क्योंकि यह मुद्दा उस समय का है, जब ब्रिटिश भारत ने इस इलाके को छोड़ा था। उन्होंने कहा कि हम पड़ोसी देश भारत के साथ सीमा विवाद को बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से सुलझाने के पक्ष में हैं।

भारत-नेपाल में सीमा विवाद

नेपाल और भारत केबीच बीचे कुछ समय में लिपुलेख और दूसरे इलाकों को लेकर तनाव देखा गया है। नेपाल के भारतीय इलाकों पर हक जताने के चलते दोनों देशों के बीच यह तनाव आया है। लिपुलेख पर नेपाल ने दावा ठोककर भारत को नाराज किया है क्योंकि यह दशकों से भारतीय इलाका है।बॉर्डर के अलावा व्यापार के मुद्दे के भीदोनों पड़ोसी देशों में तनातनी की स्थिति देखी गई है।

बालेन शाह ने आम चुनाव मेंबड़ी जीत दर्ज करने के बाद इस साल 27 मार्च नेपाल के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। पीएम बनने के बाद से वह ना तो किसी विदेश यात्रा पर गए हैं और ना ही ज्यादा विदेशी मेहमानों से मिले हैं। उन्होंने अपने देश में प्रेस से बहुत ज्यादा संपर्क नहीं रखा है। ऐसे में उनके संसद के पहले संबोधन से उनकी सरकार की घरेलू और विदेश नीति (भारत को लेकर) साफ होने की उम्मीद है।

भारत आ रहे RSP अध्यक्ष लामिछाने

बालेन शाह के भाषण में भारत से बातचीत पर जोर दिया गया है तो वहीं नेपाल की सत्ताधारी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) केअध्यक्ष रबि लामिछानेभी 5 दिनों (1-5 जून) के दौरे पर दिल्ली आ रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दूसरे शीर्ष मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। लामिछाने की पार्टी की जीत के बाद बालेन शाह पीएम बने हैं।

लामिछानेनेपाल केहोम मिनिस्टर रहे हैं और फिलहाल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सदस्य हैं। इस समय वह नेपाली सत्ता के सबसे ताकतवर लोगों में से एक हैं। बालेन शाह के भारत आने की योजना के ठंडे बस्ते में जाने के बाद लामिछाने के दिल्ली आनाभारत-नेपाल के राजनयिक संबंधों केलिहाज से खास माना जा रहा है।

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