पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। AAP के कई राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। इनमें तीन सांसद बीजेपी में चले गए। हालांकि, इन सांसदों में एक नाम ऐसा है जिसका जाना अरविंद केजरीवाल के लिए तगड़े झटके से कम नहीं है।
नई दिल्ली: जब 2022 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब से अपने राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा की, तो सबका ध्यान लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक मित्तल या क्रिकेटर हरभजन सिंह पर नहीं, बल्कि उनसे अपेक्षाकृत कम जाने-पहचाने संदीप पाठक पर था। 2016 में पार्टी में शामिल होने के बाद से ही सार्वजनिक मंचों से दूर रहने वाले संदीप पाठक का लो-प्रोफाइल रवैया, AAP के मुख्य नेतृत्व के भीतर उनके बढ़ते प्रभाव के बिल्कुल विपरीत था।
शुक्रवार को, जब सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से 14 साल पुरानी इस पार्टी में हलचल मच गई, तो पार्टी के भीतर सबसे गहरी चिंता का कारण संदीप पाठक का पार्टी छोड़ना ही था। पार्टी नेताओं ने कहा कि राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल, दोनों ही AAP नेतृत्व से अलग-थलग पड़ गए थे। उनके पार्टी छोड़ने की तो पहले से ही उम्मीद थी, लेकिन संदीप पाठक का यह कदम बिल्कुल अप्रत्याशित था।
आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी ने कहा कि अशोक मित्तल के व्यावसायिक ठिकानों और घर पर ईडी की छापेमारी ने हमें उनके पार्टी छोड़ने की संभावना के लिए पहले से ही तैयार कर दिया था। ऐसा लगता है कि अन्य कारोबारियों ने भी एहतियाती कदम उठाते हुए उन्हीं का अनुसरण किया है। हरभजन सिंह जैसे अन्य सदस्य पार्टी के भीतर वैसे भी बहुत अधिक सक्रिय नहीं रहे हैं, लेकिन संदीप पाठक का मामला बिल्कुल अलग है। वह सिर्फ एक आम सांसद नहीं हैं। वह कम से कम 2018 से ही AAP के कोर ग्रुप का हिस्सा रहे हैं।
आम आदमी पार्टी छोड़कर जाने वाले चार सदस्यों में अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, विक्रम साहनी और राजिंदर गुप्ता है। उनका आम आदमी पार्टी की की पूर्ववर्ती संस्था 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' या पार्टी के एक राजनीतिक शक्ति बनने से पहले के दौर से कोई जुड़ाव नहीं था। भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन का हिस्सा रहे लोगों की जगह इन लोगों को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के भीतर कानाफूसी शुरू हो गई थी। कई लोगों ने यह आशंका भी जताई थी कि ये लोग विरोधी दलों के प्रलोभनों के प्रति आसानी से आकर्षित हो सकते हैं।
2022 में राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए गए और AAP की राजनीतिक मामलों की समिति- जो पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है, उसके सदस्य रहे संदीप पाठक को, पंजाब में पार्टी की जीत का मुख्य रणनीतिकार माना जाता है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत 'दिल्ली डायलॉग कमीशन' में आशीष खेतान के साथ हुई थी। बाद में, पंजाब और गुजरात में चुनावी सर्वेक्षण का काम करके उन्होंने अरविंद केजरीवाल का विश्वास जीत लिया।
पार्टी के एक पूर्व पदाधिकारी ने कहा कि वह केजरीवाल के इतने करीब थे कि जेल में उनसे मिलने की अनुमति पाने वाले तीन लोगों में से एक वह भी थे। बाकी दो लोग सुनीता केजरीवाल और बिभव कुमार थे। AAP के सूत्रों ने संदीप पाठक के बीजेपी में शामिल होने को उनके पिता के पार्टी से संबंधों का नतीजा बताया। सूत्रों ने कहा कि पाठक के पिता छत्तीसगढ़ में बीजेपी के पदाधिकारी हैं। उनकी जड़ें वहीं हैं।