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उत्तर प्रदेश न्यूज़ : गाजियाबाद में सुरक्षित नहीं है लोकतंत्र का चौथा स्तंभ? ACP की हरकत पर भड़के पत्रकार, फर्जी वीडियो वायरल कराने का आरोप

Abhyuday Bharat News / Fri, May 29, 2026 / Post views : 176

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गाजियाबाद. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और मीडिया के बीच तनाव पैदा कर दिया है। कोतवाली क्षेत्र की सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) उपासना पाण्डेय पर एक महिला पत्रकार की सामाजिक और व्यावसायिक छवि को जानबूझकर धूमिल करने और आपराधिक साजिश रचने के गंभीर आरोप लगे हैं। महिला पत्रकार ने अपने पत्रकार साथियों के साथ मिलकर इस संबंध में गाजियाबाद के पुलिस आयुक्त को एक शिकायती पत्र सौंपकर उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायत पत्र के अनुसार, गाजियाबाद के कोतवाली क्षेत्र में कार्यरत ACP उपासना पाण्डेय द्वारा सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया कर्मियों के बीच एक सुनियोजित तरीके से वीडियो वायरल कराया जा रहा है। इस वीडियो में एक अज्ञात महिला द्वारा महिला पत्रकार पर अवैध उगाही और ब्लैकमेलिंग जैसे झूठे, बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोप लगाए जा रहे हैं। पत्रकारों का आरोप है कि इस भ्रामक और मानहानिकारक वीडियो को एक विशेष मोबाइल नंबर (9643322906 जो कि ACP का CUG नंबर है) से विभिन्न मीडिया ग्रुप्स और पत्रकारों को भेजा गया है। पत्रकारों ने इस कृत्य के पुख्ता डिजिटल प्रमाण और व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट्स भी पुलिस कमिश्नर को सौंपे हैं। शिकायत पत्र में साफ कहा गया है कि उच्च पद पर बैठीं ACP उपासना पाण्डेय का यह कृत्य न केवल एक पत्रकार की छवि नष्ट करने की साजिश है, बल्कि देश के कानून और पुलिस आचरण नियमावली का भी खुला उल्लंघन है।

शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 356 (मानहानि) यानी बिना किसी अदालती या कानूनी जांच के, केवल द्वेषवश किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति की छवि को सार्वजनिक रूप से धूमिल करना। BNS की धारा 61 (आपराधिक साजिश) यानी निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाने और डराने के उद्देश्य से झूठे आरोप गढ़ना और प्रसारित करना। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66 डी यानी संचार उपकरण का उपयोग करके किसी के खिलाफ भ्रामक प्रचार करना और धोखा देना। उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा (आचरण) नियमावली का उल्लंघन यानी जांच पूरी होने से पहले खुद ही किसी पक्षपातपूर्ण वीडियो को वायरल कर ‘मीडिया ट्रायल’ चलाना। इन प्रमुख धाराओं का हवाला दिया गया है। पत्रकारों का कहना है “एक निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकार समाज का आईना होता है। पुलिस के उच्च पद पर बैठे अधिकारी द्वारा इस प्रकार की हरकत से न केवल पत्रकारिता जगत में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है, बल्कि पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.”

पत्रकारों साथियों ने पुलिस कमिश्नर से हाथ जोड़कर प्रार्थना की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए ACP उपासना पाण्डेय के खिलाफ तत्काल उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए। साथ ही, उक्त मोबाइल नंबर के कॉल और व्हाट्सएप रिकॉर्ड की साइबर सेल से स्क्रूटनी कराकर इस साजिश के पीछे छिपे सभी चेहरों को बेनकाब किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट अपने ही विभाग की एक उच्च अधिकारी पर लगे इन गंभीर आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और पीड़ित महिला पत्रकार को कब तक न्याय मिलता है।

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