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Abhyuday Bharat News / Mon, Dec 1, 2025 / Post views : 143
प्रेग्नेंट महिला को थी 1 गंभीर बीमारी, लेकिन परिवार वाले बोले-ये ‘देवताओं की दिक्कत है, नहीं इलाज करवाएंगे । प्रेग्नेंसी के दौरान जरा-सी भी परेशानी दिखे, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर जांच करवाएं और अंधविश्वास से दूर रहें। सही समय पर इलाज से मां और बच्चे दोनों की सेहत सुरक्षित रहती है। इसीलिए इस बात का ध्यान रखें।
आज भी समाज में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि लोगों को इसके बारे में जागरूक करना कई बार नामुमकिन सा हो जाता है। क्योंकि ऐसे लोगों को चाहे कितनी भी समझाओ, तर्क दें, लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं होते। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक प्रेग्नेंट महिला गंभीर बीमारी से जूझ रही थी, लेकिन उसके घर वाले इसे देवी-देवताओं वाली दिक्कत बता रहे थे। जब डॉक्टर और उनके स्टाफ महिला और उसके घरवालों को समझाने की कोशिश करते हैं, तब भी वे कुछ मानने को तैयार नहीं होते। आइए जानते हैं कि महिला को आखिर ऐसी क्या बीमारी थी, जिसे लोग देवी-देवताओं की समस्या समझ रहे थे। साथ ही जानेंगे कि इस स्थिति में बच्चे को क्या नुकसान हो सकता है और डॉक्टर ने इस केस के बारे में और क्या बताया।
( सभी तस्वीरें-सांकेतिक हैं ) पांच महीने प्रेग्नेंट महिला गंभीर हालत में पहुंची हॉस्पिटल ..... इंस्टाग्राम वीडियो में गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. प्रिया बताती हैं कि आज वह एक ऐसे केस के बारे में जानकारी देने जा रही हैं, जिसे सुनकर शायद लोगों का दिल दहल जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि शाम के सात बजे एक पांच महीने की प्रेग्नेंट महिला आई थी, जिसे तान ( मिर्गी का दौरा पड़ा) आया था और वह घर पर लगभग 15 मिनट तक बेहोश रही थी। स्थिति गंभीर होने के कारण महिला को तुरंत इमरजेंसी में लाकर ICU में भर्ती कराया गया। घर वाले बाेले- आईसीयू के अंदर कोई साथ रहेगा, क्योंकि... एक्सपर्ट आगे बताती हैं कि उसी वक्त पेशेंट के रिश्तेदारों की तरफ से एक सलाह दी जाती है कि इस महिला के साथ एक शख्स तो साथ में रहेगा ही आप लोग नहीं समझेंगे, इसे देवताओं वाली दिक्कत है। बहुत खतरनाक काम है इसके साथ। बार की फटकार है। साथ में इसके अंदर रहना जरूरी है। लोगों की सोच है बेहद खतरनाक
गायनेकोलॉजिस्ट बताती हैं कि उसी समय उन्हें एहसास हुआ कि यह कोई खतरनाक बीमारी नहीं, बल्कि सोच है। उन्होंने आगे कहा कि देखा जा सकता है कि पेशेंट कितनी अधिक इरिटेबल है, क्योंकि उसके ब्रेन में कोई समस्या हो सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि केवल MRI कराने पर ही हो सकती है। घर वाले बोले- नहीं करवाना है इलाज डॉक्टर प्रिया कहती हैं कि पेशेंट के रिलेटिव्स इमरजेंसी वार्ड में अंदर आ गए हैं और इस मरीज को अपने साथ में बाहर लेकर जा रहे हैं। उन्होंने मना कर दिया है कि हमें प्रेग्नेंट महिला कोई ट्रीटमेंट नहीं करवाना है। हम इसे देवी-देवताओं के पास ही लेकर जाएंगे। पेशेंट इतनी ज्यादा इरिटेबल है कि अटेंडेंट को बार-बार खींचकर बाहर की तरफ लेकर जा रही है।
प्रेग्नेंट महिला को ले गए अपने साथ एक्सपर्ट कहती हैं कि स्टाफ लगातार कोशिश करता है उन्हें समझाने की। बस एक MRI करवा लेने दीजिए, जिससे यह पता चल सके कि ब्रेन में कोई और समस्या तो नहीं है। लेकिन प्रेग्नेंट महिला के घर वाले कुछ भी सुनने को तैयार नहीं होते। वे महिला को बेड से उठाते हैं और अपने साथ लेकर बाहर चले जाते हैं। महिला को थी मिर्गी के दौरे की शिकायत डॉ. प्रिया कहती हैं कि हमारे अस्पताल का स्टाफ पूरी कोशिश करता है , मरीज को दोबारा वापस लेकर आता है। उन्हें समझाता रहा है , कि यह कोई देवी-देवताओं की बीमारी नहीं है, बल्कि एपिलेप्सी है, जो कि एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है। एपिलेप्सी का इलाज पूरी तरह संभव है।
मां और बच्चे दोनों के लिए है खतरनाक डॉक्टर कहती हैं कि जब भी एपिलेप्सी के मरीज को सीजर आते हैं, तो उसके ब्रेन में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। चूंकि यह महिला प्रेग्नेंट हैं, इसलिए इससे बच्चे को भी ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। ऐसे में मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
डिस्केलमर: इस लेख में दी गई सूचना पूरी तरह इंस्टाग्राम रील पर आधारित है। ( ABN NEWS EXPRESS 24x7 )इसकी सत्यता और सटीकता की जिम्मेदारी नहीं लेता है।
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