ब्रेकिंग
सूचना
Abhyuday Bharat News / Sat, Mar 21, 2026 / Post views : 68
डाउन सिंड्रोम एक आनुवंशिक विकार है। गर्भावस्था के दौरान जेनेटिक बदलाव के कारण बच्चा डाउन सिंड्रोम की चपेट में आ जाता है। यह विकार तब होता है जब किसी व्यक्ति के शरीर में 21वें क्रोमोसोम की एक्ट्रा कोपी होती है। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों का शारीरिक और मानसिक आम बच्चों की तरह सही तरीके से नहीं हो पाता।
![]()
डाउन सिंड्रोम के 3 प्रकार हैं जो शरीर की कोशिकाओं में क्रोमोसोम 21 की एक्स्ट्रा कॉपी के जुड़ने के तरीके पर निर्धारित होते हैं। ये 3 प्रकार हैं-
ट्राइसॉमी 21- ये सबसे सामान्य प्रकार है, जिसमें शरीर की सभी कोशिकाओं में 21वें क्रोमोसोम की 3 कॉपी होती हैं।
ट्रांसलोकेशन- ये दुर्लभ प्रकार है, जिसमें 21वें क्रोमोसोम का पूरा या आंशिक हिस्सा किसी अन्य क्रोमोसोम से जुड़ जाता है।
मोजेक- ये डाउन सिंड्रोम का सबसे दुर्लभ प्रकार है, जिसमें कुछ कोशिकाओं में ही एक्स्ट्रा क्रोमोसोम होता है।
डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हर बच्चा अलग होता है, इसलिए लक्षण भिन्न हो सकते हैं-
आमतौर पर इन बच्चों का चेहरा और नाक चपटी, कान छोटे और जीभ बाहर निकली हुई हो सकती है। आंखों का कोना ऊपर की ओर झुका हुआ और आंखों पर सफेद धब्बे दिखाई दे सकते हैं।
ऐसे बच्चों की गर्दन के पीछे एक्स्ट्रा स्किन, जोड़ों में अधिक लचीलापन और मांसपेशियां कमजोर नजर आ सकती हैं। इनके अक्सर हाथ छोटे और चौड़े तथा उंगलियां छोटी पाई जाती हैं। इन्हें बोलने में दिक्कत होती है और इनका कद भी सामान्य तौर पर छोटा हो सकता है।
डाउन सिंड्रोम से पीड़ित बच्चों का शारीरिक विकास और सीखने की क्षमता धीमी हो सकती है। आम बच्चों की तुलना में इन्हें बैठने या चलना सीखने में अधिक समय लग सकता है। स्पीच और फिजियो थेरेपी से ऐसे बच्चों को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलती है।
![]()
जिन बच्चों में डाउन सिंड्रोम की समस्या होती है उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, लेकिन सही देखभाल और उचित उपचार से इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसे बच्चों में आमतौर पर ये स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं-
दिल के रोग
कमजोर नजर
सुनने में दिक्कत
थायरॉयड
सांस से जुड़ी तकलीफ
कान में संक्रमण
नींद की समस्याएं
उम्र से पहले अल्जाइमर
डाउन सिंड्रोम से बचने के लिए इसका पता लगाया जाना जरूरी है। इसके लिए-
जन्म से पहले क्या करें- गर्भावस्था के दौरान ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड द्वारा डाउन सिंड्रोम का पता लगाया जा सकता है।
जन्म के बाद क्या करें- बच्चे के शारीरिक लक्षणों के आधार पर और कैरियोटाइप नामक लैब टेस्ट से डाउन सिंड्रोम की पुष्टि की जा सकती है।
जागरूकता जरूरी है
‘वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे’ अवसर पर डाउन सिंड्रोम के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। इससे रोग को जल्दी पहचानने में मदद मिलेगी। डाउन सिंड्रोम से पीड़ित लोग खुशहाल जीवन जी सकें इसके लिए उनका सम्मान करना और उन्हें सहयोग देना हम सबका नैतिक कर्तव्य है।
हमारी टीम हेल्थ और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार रिसर्च करती है और भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर कंटेंट तैयार करती है। हर आर्टिकल अनुभवी मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा रिव्यू किया जाता है, ताकि आपको सही, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।
वर्तमान संस्करण
Mar 21, 2026, 09:56 AMMedically Reviewed byDr. Vinaya V. Bhandari
Mar 21, 2026, 09:56 AMWritten by
नवल सिंह
अभ्युदय भारत न्यूज
Tags :
#HELTH
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन