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Abhyuday Bharat News / Fri, Mar 20, 2026 / Post views : 92
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पेशाब में खून आने की समस्या को मेडिकल भाषा में हेमेट्यूरिया कहा जाता है। इसके पीछे यूरिन इंफेक्शन, किडनी स्टोन या कुछ दवाइयों का साइड इफेक्ट हो सकता है। लेकिन अगर यह संकेत बार-बार दिखता है तो ब्लैडर कैंसर की शुरुआत का इशारा भी हो सकता है। अगर इस कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ लिया जाए तो आसानी से इलाज हो सकता है।
यूरिन में होने वाली ब्लीडिंग इसलिए भी ज्यादा खतरनाक हो जाती है, क्योंकि यह मरीजों को चकमा दे सकती है। कई बार यह समस्या बिना किसी दर्द या तकलीफ के होती है, जिस वजह से मरीज का ध्यान इसपर तबतक नहीं जाता, जबतक कि वो अपने यूरिन का रंग नहीं देख लेता। लेकिन इसी स्थिति में यह ब्लैडर कैंसर का सबसे प्रमुख संकेत साबित होता है। पेशाब में खून आना बेहद चिंता का विषय है और इसे एक बार भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। डॉक्टर के पास जाकर इसकी जांच जरूर करवानी चाहिए।
हमारे शरीर में यूरिन को स्टोर करने का काम ब्लैडर नाम की थैली करती है, जिसे हिन्दी में मूत्राशय कहते हैं। इसमें शुरू होने वाले कैंसर को ब्लैडर कैंसर कहा जाता है। आमतौर पर यह कैंसर ब्लैडर की अंदरुनी परत से शुरू होता है। धूम्रपान करने वाले, केमिकल्स के संपर्क में रहने वाले, उम्रदराज व्यक्ति और बार-बार यूरिन इंफेक्शन झेलने वाले लोगों को इसका खतरा ज्यादा होता है।
धूम्रपान को ब्लैडर कैंसर का प्रमुख कारण इसलिए भी माना जाता है, क्योंकि तंबाकू में कई सारे खतरनाक केमिकल मौजूद होते हैं। यह हानिकारक तत्व यूरिन के साथ ब्लैडर में पहुंचते हैं और वहां जमा हो सकते हैं। धीरे-धीरे यह केमिकल ब्लैडर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और कोशिकाओं की असामान्य ग्रोथ का कारण बन सकते हैं।
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ब्लैडर कैंसर के कई सारे लक्षण होते हैं। यूरिन में खून आने के साथ अगर इसके दूसरे लक्षण भी दिख रहे हैं तो यह मूत्राशय के कैंसर की बड़ी चेतावनी हो सकती है। आइए इन सभी लक्षणों के बारे में जान लेते हैं।
यूरिन में खून आना (लाल या गुलाबी रंग का पेशाब आना)
बार-बार पेशाब आना
यूरिन पास करते वक्त दर्द या जलन होना
अचानक वजन कम होना या थकान रहना
ये लक्षण अन्य बीमारियों के भी हो सकते हैं। लेकिन अगर ये लगातार बने रहें तो वक्त गंवाए बिना जांच करवा लेनी चाहिए।
डॉक्टर सबसे पहले मरीज की स्थिति जांचता है। उसके मुताबिक, यूरिन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और सिस्टोस्कोपी जैसे टेस्ट की सलाह देता है। हर कैंसर की तरह ब्लैडर कैंसर को शुरुआती स्टेज में पकड़ना इलाज को काफी आसान और प्रभावी बना देता है।
ब्लैडर कैंसर का इलाज बीमारी की स्टेज और गंभीरता पर निर्भर करता है। शुरुआती स्टेज में इसे सर्जरी या अन्य ट्रीटमेंट की मदद से कंट्रोल किया जा सकता है। एडवांस स्टेज में यह आसपास के टिश्यू और अंगों तक फैल जाता है, जिस वजह से इलाज काफी जटिल हो जाता है।
ब्लैडर कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है। इसके लिए आपको अपनी लाइफस्टाइल हेल्दी बनानी चाहिए, जिसमें कुछ बदलाव आपकी मदद कर सकते हैं।
धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें।
रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं।
केमिकल्स के संपर्क से बचकर रहें।
नियमित हेल्थ चेकअप करवाएं।
यूरिन में खून आना एक चेतावनी भरा संकेत है। सही समय पर इसकी जांच करवाकर ब्लैडर कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी को पकड़ा जा सकता है। खासकर जब यह समस्या दर्द के बिना बार-बार दिखाई दे तो बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें। हालांकि, इस लक्षण के पीछे यूरिन इंफेक्शन या किडनी स्टोन भी हो सकता है। इसकी पुष्टि के लिए डॉक्टर और जांच पर ही भरोसा करें।
हमारी टीम हेल्थ और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार रिसर्च करती है और भरोसेमंद स्रोतों के आधार पर कंटेंट तैयार करती है। हर आर्टिकल अनुभवी मेडिकल एक्सपर्ट्स द्वारा रिव्यू किया जाता है, ताकि आपको सही, प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी मिल सके।
वर्तमान संस्करण
Mar 20, 2026, 01:49 PMMedically Reviewed byDr Vineet Malhotra
Mar 20, 2026, 01:49 PMWritten by
नवल सिंह
ABN EXPRESS NEWS 24x7
Tags :
#HELTH
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