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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : बिजली की मांग को लेकर 48 गांवों के 500 ग्रामीणों ने खून से लिखा PM मोदी को पत्र, कहा...

Abhyuday Bharat News / Wed, Jun 10, 2026 / Post views : 128

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बिजली की मांग को लेकर 48 गांवों के 500 ग्रामीणों ने खून से लिखा PM मोदी को पत्र, कहा- 21वीं सदी में भी अंधेरे में गुजर रही जिंदगी, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य सेवाएं हो रही प्रभावित

गरियाबंद। जिले के राजा पड़ाव क्षेत्र में बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों ने ऐसा कदम उठाया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। वर्षों से विद्युत सुविधा से वंचित क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नाम पत्र लिखकर गांवों में बिजली उपलब्ध कराने की मार्मिक अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से मांग और आंदोलन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, इसलिए अब उन्होंने अपनी पीड़ा सीधे देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का फैसला किया है।

अड़गड़ी गौठान में जुटे 500 से अधिक ग्रामीण

राजा पड़ाव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कोकड़ी, गरहाडीह, गौरगांव, भूतबेड़ा, कुचेंगा समेत आठ पंचायतों के 48 गांवों और आश्रित पाराटोलों के लगभग 500 ग्रामीण अड़गड़ी गौठान स्थल पर एकत्र हुए। जय अंबेडकरवादी युवा संगठन और किसान संघर्ष समिति राजा पड़ाव क्षेत्र के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने अपने खून से पोस्टकार्ड लिखकर बिजली की मांग को प्रमुखता से उठाया।

ग्रामीणों ने पत्र में उल्लेख किया कि बिजली के अभाव में बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और आजीविका बुरी तरह प्रभावित हो रही है। आधुनिक युग में भी अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर होना उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बना हुआ है।

‘अधिकारियों ने कहा- केंद्र की मंजूरी के बिना संभव नहीं विद्युतीकरण’

कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने कहा कि 21वीं सदी में सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद क्षेत्र के लोगों का बिजली से वंचित रहना किसी अभिशाप से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक से ग्रामीण लगातार बिजली की मांग कर रहे हैं और हाल ही में आयोजित सुशासन तिहार के समाधान शिविर में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था।

संजय नेताम के अनुसार अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि क्षेत्र अभ्यारण्य के दायरे में आने के कारण राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की अनापत्ति के बिना विद्युतीकरण संभव नहीं है। प्रशासन ने यह भी कहा कि इस संबंध में अंतिम निर्णय केंद्र स्तर पर लिया जाना है, इसलिए राज्य सरकार अकेले बिजली उपलब्ध नहीं करा सकती। इसी वजह से ग्रामीण अब सीधे प्रधानमंत्री और एनटीसीए को पत्र भेज रहे हैं।

6 महीने में बिजली का वादा, लेकिन अब तक नहीं हुआ काम

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जनवरी 2026 में जिला प्रशासन ने लिखित रूप से आश्वस्त किया था कि छह माह के भीतर क्षेत्र में विद्युतीकरण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी। इससे क्षेत्रवासियों में निराशा और नाराजगी बढ़ी है।

सिंगल यूज सिरिंज से निकाला खून, उसी से लिखी अपनी पीड़ा

ग्रामीणों ने बताया कि कार्यक्रम की पूर्व सूचना प्रशासन को दी गई थी और खून निकालने की प्रक्रिया में सहायता की मांग भी की गई थी, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग सिंगल यूज सिरिंज का इस्तेमाल किया गया। सिरिंज से निकाले गए खून को स्याही की तरह उपयोग कर ग्रामीणों ने पोस्टकार्ड पर अपनी भावनाएं और समस्याएं लिखीं।

सरपंच चिमन नेताम, रामदेव मरकाम, साधुराम नेताम और पतंग मरकाम ने बताया कि यह किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि अपनी मांग को संवेदनशील तरीके से रखने का प्रयास है। उनका कहना है कि वर्ष 2006 से अब तक हजारों पत्र सामान्य स्याही से लिखे जा चुके हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन भी बेअसर रहे। इसलिए इस बार ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा को खून से लिखकर प्रधानमंत्री तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।

500 से अधिक पत्र स्पीड पोस्ट से भेजे जाएंगे

ग्रामीणों ने बताया कि कार्यक्रम में लिखे गए 500 से अधिक पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजे जाएंगे। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि उनकी यह भावनात्मक अपील सरकार और संबंधित एजेंसियों का ध्यान आकर्षित करेगी तथा वर्षों पुरानी बिजली की समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा।

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