Wed, 29 Jul 2026
Logo

ब्रेकिंग

Paytm Payments Bank को दिल्ली हाईकोर्ट ने हमेशा के लिए बंद करने का दिया आदेश, RBI से पहले ही मिला है झटका

यूपी पुलिस में बड़ा फेरबदल, लखनऊ को मिला नया पुलिस कमिश्नर

WTC 2027 फाइनल की रेस में टीम इंडिया, श्रीलंका के खिलाफ जीत क्यों है अहम? जानिए पूरा समीकरण

नए शिक्षामंत्री पर प्रियंका गांधी के बयान पर हंगामा, रिजिजू बोले- चरित्र हनन किया, माफ़ी मांगे

कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर को ‘महतारी वंदन वसूली योजना’ का दिया नाम....

IND vs ZIM 3rd T20I: भारत ने तीसरे टी20 में जिम्बाब्वे को 35 रन से हराया, सीरीज 3-0 से की क्लीन स्वीप

Indian Idol 16 Winner : Jyotirmayee Nayak बनीं ‘इंडियन आइडल 16’ की विजेता, ट्रॉफी के साथ जीता लाखों का कैश प्राइज

वाराणसी के स्कूल में मासूम संग हैवानियत! टॉयलेट करने पर नर्सरी छात्र का प्राइवेट पार्ट गर्म चाकू से जलाने का आरोप

CJP आंदोलन का असर देख नेपाल सरकार के हाथ-पांव फूले, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी पेपर लीक मामले पर दी सफाई

फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर अरबों की ठगी ! 10 राज्यों से छत्तीसगढ़ पहुंचे 100 से अधिक निवेशक....

सूचना

छत्तीसगढ़ न्यूज़ : सड़कों पर मौत का सफर! जब बस नहीं मिलती, तो ट्रैक्टर और पिकअप बन जाते हैं ग्रामीणों की मजबूरी

Abhyuday Bharat News / Mon, Jun 8, 2026 / Post views : 97

Share:

जगदलपुर। बस्तर के ग्रामीण इलाकों में सफर आज भी सुरक्षित नहीं, बल्कि मजबूरी का दूसरा नाम बन चुका है। सार्वजनिक परिवहन की कमी ने हजारों ग्रामीणों को ऐसे साधनों में यात्रा करने पर मजबूर कर दिया है, जो लोगों को मंजिल तक पहुंचाने से ज्यादा हादसों के मुहाने पर खड़ा कर रहे हैं। बीते कुछ महीनों में सामने आए दो बड़े सड़क हादसे इसकी दर्दनाक तस्वीर बयां करते हैं।

6 अप्रैल को दरभा क्षेत्र में एक ट्रैक्टर पलट गया था। ट्रैक्टर में क्षमता से कई गुना ज्यादा, 50 से अधिक ग्रामीण सवार थे, जो मेले में शामिल होने जा रहे थे। हादसे में 15 लोग घायल हो गए। वहीं, लोहंडीगुड़ा थाना क्षेत्र के ढाबामारी में शादी समारोह से लौट रही एक पिकअप वाहन पलट गई। वाहन में 45 से अधिक लोग ठूंस-ठूंसकर भरे गए थे। इस हादसे में 37 ग्रामीण घायल हुए, जबकि दो लोगों की जान चली गई। ये सिर्फ दो हादसे नहीं हैं, बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल हैं, जहां गांवों तक नियमित और पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन नहीं पहुंच पा रहा।

बसें नहीं हैं, विकल्प नहीं हैं, इसलिए ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर, पिकअप और अन्य मालवाहक वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि परिवहन विभाग और पुलिस लगातार मालवाहक वाहनों में सवारी ढोना गैरकानूनी बताते हैं। समय-समय पर कार्रवाई भी होती है, लेकिन जमीनी हकीकत नहीं बदलती। कार्रवाई के बाद भी गांवों की सड़कों पर आज वही खतरनाक तस्वीर दिखाई देती है, जहां लोगों की जिंदगी नियमों और मजबूरियों के बीच झूल रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक ग्रामीण अपनी जान हथेली पर रखकर सफर करते रहेंगे? और कब तक हर बड़े हादसे के बाद सिर्फ कार्रवाई और जांच की बातें होती रहेंगी? बस्तर के ग्रामीण इलाकों को सुरक्षित सार्वजनिक परिवहन कब मिलेगा, यह सवाल आज भी जवाब का इंतजार कर रहा है।

Tags :

#CG NEWS

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts