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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : 1 दिन में एक जिला गटक जाता है 5 करोड़ की शराब तो कैसी होगी छत्तीसगढ़ की तरुणाई

Abhyuday Bharat News / Tue, Jan 6, 2026 / Post views : 422

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विधानसभा सत्र के दौरान विजन 2047 से हटकर वर्तमान को देखें और इस बात पर की हमने या हमारे निर्वाचित जन प्रतिनिधियों ने 25 साल में कैसा छत्तीसगढ़ बनाया तो हमको पता चल जाएगा की 2047 का जो विजन दिया जा रहा है उसमें घंटा कोई सच्चाई नहीं है। और वह फालतू का विचार है।

सिलसिले वार तरीके से समझते हैं। 2 दिन में बलौदा बाजार नवगठित जिले में 5 करोड़ की शराब बिकी। इन्हीं 2 दिन में राजनांदगांव जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में एक बेटे ने अपने पिता की हत्या कर दी, और दूसरी घटना में पिता ने बेटे को गोली मार दी। आत्मग्लानि के बाद पिता ने आत्महत्या कर ली। याद रखें एक जिले में दो दिन में 5 करोड़ की शराब बिकी यह आंकड़ा हर जिले से लिया जा सकता है। पता चल जाएगा कि छत्तीसगढ़ में नागरिक कितने करोड़ की शराब पी गए और नारा लगाएंगे छत्तीसगढ़िया सब ले बढ़िया।

धार्मिक स्वतंत्रता की कसौटी पर भारत चिंतनीय स्टेट घोषित होने वाला है पूरे देश में अल्पसंख्यक मसीही समाज के खिलाफ जो हिंसात्मक वारदातें हो रही है उनका बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में है। हम लगातार देख रहे हैं कि उन्हें की शिक्षण संस्थाएं किस तरह के व्यवस्था निशाने पर है।

नक्सलवाद समाप्त घोषित किया जा चुका है और बस्तर का हाल यह है कि कुछ दिनों में ही 100 एकड़ के जंगल साफ हो गए। तो क्या अधोसंरचना विकास के नाम पर जंगल निजी क्षेत्र को सौंप दिए जाएंगे। अक्टूबर 2025 में ही पूर्व विधायक अमित जोगी ने आरोप लगाया था एनएमडीसी के नगरनार प्लांट को निजी हाथों में सोप जा रहा है। 90% स्टॉक निजी क्षेत्र का हो जाएगा। उन्होंने कहा सरकार निश्चित रूप से बस्तर से नक्सलवाद को खत्म कर रही है और अडानी वाद को बढ़ा रही है।

बैलाडीला के डिपॉजिट नंबर 13 से लेकर नगरनार तक छत्तीसगढ़ के कई खदानों को अदानी को शौप दिया गया है। सरकारी वेबसाइट के अनुसार तीन दर्जन गांवों में खनिज चिन्हित हुआ है। ग्रेनाइट, क्वार्टज बैरैल, सिलेमेनाईट अयस्क का भंडार चिन्हित हुआ है। कुछ गांव का नाम सुनिए रायकोट, अलनार, अरिडोंगरी, बुधियारी मारी, आसना, तारापुर शायद वहां के स्थानीय लोगों को भी यह नहीं पता होगा कि उनका गांव खनिज से भरपूर है वे तो जल, जंगल, जमीन के ऊपर रहते हैं। और जल, जंगल, जमीन के साथ रहते हैं और जबकि खनिज जमीन के नीचे है। जिसे निकालने के लिए उन्हें हटा दिया जाएगा।

अब बात करें राजनीति की नेताओं की लड़ाई में जात धर्म के संगठन कूद जाते हैं या खुदवा दिये जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ओबीसी कुर्मी, राज्य के डिप्टी सीएम अरुण साव 'साहू ओबीसी' के ऊपर राजनीतिक बयान बाजी की नेताओं की आपसी प्रतिस्पर्धा है इसमें जात धर्म के संगठन क्यों कूदते हैं।

जब चुनाव आता है तो वोट तो पूरे ओबीसी के लिए मांगा जाता है। जात संगठन हर राजनीतिक दल से उनकी जनसंख्या के आधार पर टिकट मांगते हैं तब कोई नहीं कहता कि ओबीसी में 43 जातियां हैं उस समय ओबीसी एक हो जाता है।

विधानसभा लोकसभा की सीटों में आरक्षण तो एससी और एसटी का है हमने एसटी को भी तीन वर्ग में बाटा। आदिवासी ईसाई, आदिवासी हिंदू, और आदिवासी असली इसी तरह एससी में भी बटवारा है। कोई स्वयं को सतनामी बताता है और दूसरे को मोची बताता है अर्थात वहां भी ऊंच नीच के पैमाने हैं। इस सब के बीच हिंदुत्व का झंडा लेकर बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और उनके अन्य अनुषंगी संगठन किस तरह के एककी बात कर रहे हैं और जिस विजन 2047 को लेकर ओपी चौधरी विश्वविद्यालय में घूम रहे हैं उसकी सड़क पर सच्चाई क्या है....

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