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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : दुर्गम इलाकों में पैदल सफर, 39 साल से दे रहे फ्री दवाई, अब पति—पत्नी को मिला पद्मश्री, कौन हैं डॉ. रामचंद्र गोडबोले?

Abhyuday Bharat News / Tue, May 26, 2026 / Post views : 101

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बस्तर में 39 सालों से लोगों का फ्री में इलाज करने वाले डॉ रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। दोनों लोगों का फ्री में इलाज करते हैं।

बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित आदिवासी अंचलों में चार दशकों से अधिक समय तक समाजसेवा करने वाले डॉ रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह दंपति हार्डकोर नक्सली इलाके में करीब 39 सालों से फ्री में लोगों का इलाज कर रहे हैं। इसके साथ ही लोगों को विभिन्न तरह की बीमारियों के बारे में जानकारी देते हैं।

सोमवार को डॉ रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया है। डॉ रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले बीते करीब 39 साल से चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यह दंपति अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में लोगों को फ्री में स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवा रहे हैं।

आश्रम में रहते हैं

यह दंपति बारसूर स्थित वनवासी कल्याण आश्रम में रहते हैं और लोगों की फ्री में सेवा करते हैं। डॉक्टर रामचंद्र गोड़बोले और उनकी पत्नी सुनीता गोड़बोले मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा जिले के रहने वाले हैं।

हार्डकोर नक्सली इलाके में जाते थे

छत्तीसगढ़ में जब नक्सलवाद चरम पर था उस समय वह हार्डकोर नक्सली इलाके में लोगों का फ्री में इलाज करने जाते थे। लगभग 90 के दशक में बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिलें के बारसूर में आकर यहां लगातार सेवा दे रहे हैं। दोनों दंपति अलग अलग क्षेत्रों में ग्रामीणों के बीच जाकर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा सेवा से लेकर नशामुक्ति के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में अहम योगदान

बस्तर संभाग के अबूझमाड़ के अंदरुनी गांवों में नक्सल दहशत होने के बाद भी स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में अहम योगदान दी. इन्होंने कुष्ठ रोग, टीबी, पीलिया, मलेरिया जैसे गम्भीर बीमारियों को लेकर आदिवासी ग्रामीणों के बीच जाकर जागरूकता फैलाई। उन्होंने इस इलाके में कई गंभीर बीमारियों से निजात दिलाने में सफलता दिलाई।

  • चार दशक से बस्तर में सेवाएं दे रहे हैं दंपति

  • 90 के दशक में बस्तर आए थे डॉ रामचंद्र गोडबोले

  • लोगों का फ्री में इलाज करता है यह दंपति

  • पति का चार दशकों से साथ दे रही है सुनीता गोडबोले


1990 में बस्तर आए थे

रामचंद्र गोडबोले का जन्म 1960 में हुआ था। इसके बाद उन्होंने आयुर्वेदिक चिकित्सा की शिक्षा ली। उसके बाद उन्होंने अपना जीवन आदिवासी समुदाय के लिए समर्पित किया। करीब 12 सालों तक उन्होंने महाराष्ट्र में काम किया। उसके बाद 1990 में वह अपनी पत्नी के साथ बस्तर आ गए। बस्तर की गिनती उस समय दुर्गम इलाकों में किया जाता था। वह दंतेवाड़ा जिले के बारसूर में एक क्लीनिक खोला। वह अबूझमाड़ इलाके में पैदल चलकर मरीजों का फ्री में इलाज करते थे। इस दौरान उन्होंने लोगों को बीमारियों के बारे में जागरुक भी किया।



सादगी से लेने पहुंचे सम्मान

सोमवार को वह पद्मश्री अवार्ड लेने के लिए राष्ट्रपति भवन पहुंचे। पति-पत्नी की सादगी के साथ यह सम्मान लेने के लिए पहुंचे थे। यह दंपति अब बस्तर को ही अपना घर मानता है।

सीएम ने दी बधाई

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बस्तर के सुदूर जनजातीय अंचलों में दशकों से निःस्वार्थ चिकित्सा सेवा और मानवता की मिसाल प्रस्तुत करने वाले डॉ रामचंद्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किए जाने पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे समूचे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बताया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जी द्वारा गोडबोले दंपति को यह सम्मान प्रदान किया जाना जनसेवा, समर्पण और संवेदनशीलता के मूल्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है।

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