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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : प्राचीन संस्कृति और परम्पराओं को सहेजने का कार्य कर रहा है जनजातीय समाज : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

Abhyuday Bharat News / Sun, Jan 11, 2026 / Post views : 234

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कोरबा, 11 जनवरी 2026/ महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। उन्होंने गौरा-गौरी पूजन तथा बैगा पुजारी सम्मेलन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज का अपना गौरवशाली इतिहास, विशिष्ट संस्कृति और परम्पराएं हैं। बैगा और पुजेरी समाज आज भी इन परम्पराओं के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण इसलिए किया ताकि यहां की सर्वाधिक जनसंख्या वाले आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा में आगे बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए 15 नवंबर भगवान बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित करते हुए धरती आबा उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इसके अलावा पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास के दायरे में लाने का कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह गर्व का विषय है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समाज की बेटी, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू आसीन हैं और छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी एक साधारण किसान परिवार से आने वाला आदिवासी समाज का बेटा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के लिए 80 हजार करोड़ रुपये तथा पीएम जनमन योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के 6,691 गांव लाभान्वित हो रहे हैं। पहाड़ी कोरवा, बिरहोर सहित अन्य पीवीटीजी समुदायों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। आदिवासी अंचलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में प्राधिकरण का गठन कर आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यक्रम में शामिल होकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वयं भी इस संगठन में कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आदि-अनादि काल से भगवान गौरा-गौरी के रूप में शिव-पार्वती के उपासक रहा है। समाज के महापुरुषों के योगदान को याद करने, उनकी स्मृतियों को संजोने और नई पीढ़ी को उनके बारे में जानकारी देने हेतु नवा रायपुर में विशाल डिजिटल जनजातीय संग्रहालय स्थापित किया गया है, जिसमें महापुरुषों की गाथाओं का सचित्र वर्णन है।

उन्होंने बताया कि जनजातीय संस्कृति और परम्पराओं के संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु बैगा, गुनिया और सिरहा को प्रतिवर्ष 5,000 रुपये की सम्मान निधि दी जा रही है।  सरना स्थलों का संरक्षण किया जा रहा है, जो सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कदम साबित होगा।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि गांव-गांव में आज भी गौरा-गौरी पूजा आस्था का प्रमुख केंद्र है। बैगा पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों के संवाहक हैं। उन्होंने बताया कि जिले में अनेक प्राचीन देवी-देवताओं के स्थल हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में विकसित कर पर्यटन के रूप में पहचान दिलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं, उसी प्रकार मुख्यमंत्री श्री साय विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। उन्होंने आईटीआई चौक से बालको मार्ग को ‘जनजातीय गौरव पथ’ नाम देने और महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग भी रखी।

कार्यक्रम में कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी श्री पनतराम भगत एवं श्री बीरबल सिंह ने भी संबोधन दिया। महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, पूर्व गृहमंत्री श्री ननकीराम कंवर, पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर श्री संजीव शुक्ला, कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत, एसपी श्री सिद्दार्थ तिवारी, वनवासी कल्याण आश्रम के जिला अध्यक्ष श्री रघुराज सिंह उइके श्री गोपाल मोदी सहित जनप्रतिनिधिगण और समाज जन कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय गौरव पथ की घोषणा की

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आईटीआई चौक से बालको रोड का नाम ‘जनजातीय गौरव पथ’ करने की घोषणा की।

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