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बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनना हुआ और कठिन, नई नियमावली में बदला पूरा सिलेक्शन पैटर्न

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बिहार :-पटना न्यूज़ : बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनना हुआ और कठिन, नई नियमावली में बदला पूरा सिलेक्शन पैटर्न

Abhyuday Bharat News / Thu, Jun 25, 2026 / Post views : 3

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पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों और राज्य के अंगीभूत महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने का सपना संजोने वाले युवाओं के लिए अब राह थोड़ी कठिन हो गई है। बिहार लोक भवन द्वारा जारी नई नियमावली-2026 ने चयन प्रक्रिया का पूरा स्वरूप बदल दिया है। अब सिर्फ नेट (NET) और पीएचडी (PhD) की डिग्री ही काफी नहीं होगी, बल्कि अभ्यर्थियों को एक सख्त लिखित परीक्षा और व्यावहारिक शिक्षण कौशल (टीचिंग स्किल) के अग्निपथ से गुजरना होगा।

​क्या है नई चयन प्रक्रिया?

​अब तक जहां नियुक्ति मुख्य रूप से शैक्षणिक अंकों और साक्षात्कार के आधार पर होती थी वहीं नई व्यवस्था में लिखित परीक्षा को केंद्र में रखा गया है। कुल 200 अंकों की इस चयन प्रक्रिया में 175 अंक लिखित परीक्षा के लिए और 25 अंक साक्षात्कार के लिए तय किए गए हैं। लिखित परीक्षा पूरी तरह से व्याख्यात्मक होगी जिसका पाठ्यक्रम यूजीसी-नेट के मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

​ऑन-द-स्पॉट टीचिंग स्किल टेस्ट पर जोर

​नई नियमावली का सबसे महत्वपूर्ण बदलाव साक्षात्कार का स्वरूप है। साक्षात्कार के लिए निर्धारित 25 अंकों में से 13 अंक सीधे ऑन-द-स्पॉट टीचिंग स्किल टेस्ट के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसका अर्थ है कि अभ्यर्थी को इंटरव्यू बोर्ड के सामने कक्षा की तरह पढ़ाकर अपनी पढ़ाने की शैली और विषय पर पकड़ को साबित करना होगा। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी गई है। शेष 12 अंक विषयगत समझ, व्यक्तित्व और बोर्ड के साथ संवाद के आधार पर दिए जाएंगे।

​मेधा सूची का आधार

​चयन प्रक्रिया में छंटनी का आधार लिखित परीक्षा का परिणाम होगा। एक पद के लिए लिखित परीक्षा के प्रदर्शन के आधार पर टॉप तीन अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया जाएगा। इसके बाद लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के कुल अंकों को जोड़कर अंतिम मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी।

​न्यूनतम पात्रता में कोई बदलाव नहीं

​नई नियमावली में न्यूनतम योग्यता के मानक पहले जैसे ही रहेंगे। संबंधित विषय में 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री और नेट या एसईटी (SET) अनिवार्य है। हालांकि, यूजीसी रेगुलेशन-2009 या 2016 के तहत पीएचडी करने वाले अभ्यर्थियों को नेट की परीक्षा से पूर्ववत छूट मिलती रहेगी। शिक्षाविदों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और केवल विषय के ज्ञाता ही शिक्षण संस्थानों में अपनी जगह बना पाएंगे।

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