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Holi : रंगों की होली से पहले बरसाने में हुई लट्ठमार होली, जानें ब्रज की अनूठी होली परंपरा का महत्व

Abhyuday Bharat News / Fri, Feb 27, 2026 / Post views : 176

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रंगों का पर्व होली आने वाला है। इससे पहले कान्हा की ब्रह भूमि पर लट्ठमार होली की परंपरा निभाई गई। नंदगांव और बरसाना में होली मनाने की अनुठी परंपरा दुनियाभर में मशहूर है और इसका हिस्सा बनने के साथ ही इसे देखने के लिए आते हैं

बरसाने की लट्ठमार होली कब खेली जाएगी, क्या है यहां होली की परंपरा और कैसे  होती है शुरुआत ? - India TV Hindi

रंगों का त्योहार होली बस आने ही वाला है। इस साल रंगों का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा। एक-दूसरे पर रंग डालने, गले मिलकर गिले-शिकवे दूर करने और लजीज पकवानों के साथ पारंपरिक फाग गीतों और नृत्य का ये त्योहार अपनी मस्ती और ठिठोली के लिए भी जाना जाता है। भारत में होली के पर्व के कई रूप देखने को मिलते हैं, खासतौर से कान्हा की धरती के रूप में लोकप्रिय ब्रज में। यहां लड्डूओं से लेकर लट्ठमार होली और रंग और फूलों से होली खेली जाती है।

Lathmar Holi 2023: बरसाना में लट्ठमार होली आज, जानिए राधा और श्री कृष्ण से  जुड़ा इसका इतिहास - Lathmar Holi 2023 In Barsana Vrindavan Know Date Time  And Importance In Hindi

उत्तर प्रदेश में कान्हा की धरती यानी ब्रज मंडल में लट्ठमार होली की अलग रौनक रहती है। बुधवार, 25 फरवरी से होली से पहले एक हफ्ते तक चलने वाले जश्न की शुरुआत लट्ठमार होली से हुई। यह मुख्य रूप से बरसाना और नंदगांव शहरों में मनाया जाता है, और इसकी जड़ें भारतीय पौराणिक कथाओं में गहरी हैं। लट्ठमार होली भगवान कृष्ण और राधा के जीवन की एक मजेदार झांकी के रूप में जानी जाती है। देश में साल के सबसे चर्चित आयोजनों में से एक मानी जाने वाली इस खास परंपरा को लोकगीतों, डांस और एक-दूसरे पर गुलाल डालकर मनाया जाता है।

कहीं लट्ठमार तो कहीं फूलों से खेली जाती है भारत में Holi, जानिए रंग और  परंपराओं का संगम – UJJWAL PRABHAT | CHATTISGARH

लट्ठमार होली क्या है?

यह होली का एक रिवाज है जिसमें बरसाना की औरतें नंदगांव के आदमियों का मजाक में पीछा करती हैं और उन्हें लाठियों से मारती हैं, लाठियां से मारने में उनका इरादा उन्हें चोट पहुंचाना नहीं होता। इसलिए इसका नाम लट्ठमार है। यह सेलिब्रेशन बरसाना में राधा रानी मंदिर से शुरू होता है, जहां पुजारी खास श्रृंगार करते हैं और देवी के चरणों में गुलाल चढ़ाते हैं। बदले में, आदमी ढाल के जरिए खुद को बचाने की कोशिश करते हैं। रिवाज के मुताबिक, अगर कोई आदमी इस लड़ाई के दौरान "पकड़ा" जाता है, तो उसे औरत की तरह कपड़े पहनाकर डांस करवाया जाता है।

लट्ठमार होली कहां मनाई जाती है?

ब्रज इलाके में लट्ठमार होली दो दिनों तक मनाई जाती है। ये आयोजन बरसाना में शुरू होता है, जहां नंदगांव के पुरुष होली खेलने के लिए राधा के गांव जाते हैं। अगले दिन, बरसाना की औरतें त्योहार जारी रखने के लिए नंदगांव जाती हैं।

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