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सतनाम संदेश : गुरु सुपुत्री " सहोद्रा माता जी " ध्यान,योग और आध्यात्मिक ज्ञान विरासत कि खान

Abhyuday Bharat News / Sun, Mar 8, 2026 / Post views : 248

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प्रतीकात्मक तस्वीर

सहोद्रा माता जी के कार्य

सहोद्रा माता जी गुरु घासीदास जी जैसे ध्यानी योगी गुरु के सुपुत्री हैं इस नाते माता जी को बचपन से ही ध्यान,योग और आध्यात्मिक ज्ञान विरासत में मिला। माता जी सतनाम पर आस्था के साथ सतनाम का और गुरु घासीदास जी के महान संदेशों को प्रचारित करती रहीं।

सहोद्रा माता जी के प्रमुख कार्य इस प्रकार से हैं :-

  1. नारियों में जागृति लाने के लिए उन्हें उपदेशित करती रहीं उन्हें प्रोत्साहित करती रहीं और उनके मान सम्मान कि रक्षा हेतु हमेशा आवाज उठाती रहीं।

जिस प्रकार गुरु घासीदास जी ने कहा पर नारी ल माता मानिहव।

2. बेटी कि अधिकता होने पर पहले के समय में मटकियों में भरकर बेटियों को भंडार दिया जाता था अर्थात् मटकी में भरकर जमींन में गाड़ दिया जाता था जिसके विरोध में अभियान चलाकर लोगों में जागृति लाने का काम किए और बेटा बेटी की समानता को मूल बतायें जिस तरह गुरु घासीदास जी ने अपने अमृतवाणी में कहा कि एक घूवा मारे (भ्रूण हत्या) तेनों तोर बराबर आय।

प्रतीकात्मक तस्वीर

3.सहोद्रा माता जी ध्यानी,ज्ञानी होने के साथ ही उन्हें नाड़ी विद्या,स्पर्श चिकित्सा और आयुर्वेदिक चिकित्सा का बहुत ही गहरा ज्ञान था आयुर्वेद का और अन्य चिकित्सा का ज्ञान इन्हें विरासत में मिला था क्योंकि बुद्धिजीवी और बड़े-बड़े साहित्यकार बतलाते हैं गुरु घासीदास जी के पूर्वज पहले से इन सभी विद्याओं के जानकार थे और लोगों के उपचार एवं सहयोग कर सतत् जनसेवा कार्य में लगे हुए थे।

4.समाज के साधू संत और विचारक लोग बतलाते हैं कि सहोद्रा माता जी चर्मरोग के विशेषज्ञ थीं और किसी के शरीर में या दूध,दही,घी में अगर कीड़ा लग जाता था,कोढ़ या घिनही घांव है तो उनका भी उपचार करती थीं।

5.माता जी के द्वार और दरबार में सभी समस्यों के निवारण के लिए परामर्श दिया जाता था और दीन दुखियों को सहयोग प्रादान किया जाता था।

6.जगत् वंदनीय सहोद्रा माता जी के धाम में सत्संग के अलावा विशाल भंडारे का संचालन हमेशा चलता रहता था माता जी अपने द्वार से किसी को भी भूंखा नहीं जाने देती थीं।

7.बालिकाओं के बाल विवाह करने की प्रथा का विरोध करती थीं।

8.गुरु घासीदास जी के सिध्दांत के आधार पर माता जी विधवा विवाह की समर्थक थीं और विधवा विवाह कराने का प्रचार करती थीं।

Tags :

#CG NEWS #SATNAMI_SAMAJ

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