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ABN NEWS :- देश दुनिया : ममता के 20 बागी सांसद NCPI में विलय के बाद NDA को कैसे फायदा पहुंचाएंगे? संसद में बदल जाएगा समीकरण

Abhyuday Bharat News / Mon, Jun 15, 2026 / Post views : 41

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टीएमसी के 20 बागी लोकसबा सांसदों के एनसीपीआई में विलय होने के बाद और एनडीए को समर्थन देने के बाद संसद में एनडीए की सीटों की संख्या 312 हो जाएगी। वहीं, टीएमसी के सांसदों की संख्या में कमी आएगी जिससे इंडिया ब्लॉक भी कमजोर होगा। वहीं, एनडीए को आने वाले सत्र में किसी भी विधेयक को पास कराने में आसानी होगी।

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी को झटका देते हुए अलग गुट बनाने वाले 20 बागी सांसदों ने खुद को 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' ( NCPI ) में विलय करने का फैसला किया। NCPI त्रिपुरा की गैर मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है, जिसने 2023 के विधानसभा चुनाव 'सात स्ट्रोक वाले इंक पेन' के चुनाव चिह्न पर लड़ा था। हालांकि, इस पार्टी के न तो कोई सांसद हैं और न ही कोई विधायक हैं। लेकिन अब अचानक 20 सांसदों के मिलने से यह एनडीए को समर्थन देने वाली दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। तो चलिए जानते हैं कि एनसीपीआई कैसे भविष्य में एनडीए को फायदा पहुंचाने वाली है...

लोकसभा में NDA की सीटों का इजाफा

टीएमसी के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद एनडीए को समर्थन देने से बीजेपी के बाद दूसरा सबसे बड़ा सहयोगी बन गया है। एनसीपीआई के समर्थन के बाद एनडीए के पास लोकसभा में कुल 312 सांसद हो जाएंगे। जिससे लोकसभा में विपक्षी दलों की संख्या कम हो जाएगी।

विधेयकों को पारित कराना होगा आसान

निचले सदन (लोकसभा) में सांसदों की संख्या बढ़ने से एनडीए सरकार के लिए महत्वपूर्ण विधेयकों और संवैधानिक संशोधनों (जैसे महिला आरक्षण, परिसीमन विधेयक 2026) को पारित कराने के लिए बहुमत जुटाना अधिक आसान हो जाएगा। हालांकि, इस विधेयक को पिछले संसद सत्र में उस समय बड़ा झटका लगा जब 298 सांसदों ने इसके पक्ष में और 238 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट किया। जिसके बाद यह बिल गिर गया था।

दो-तिहाई बहुमत की रणनीति

बागी सांसदों के मुताबिक एनसीपीआई में यह विलय दलबदल विरोधी कानून के दायरे में 2 तिहाई बहुमत के नियमों का पालन करते हुए किया गया है ताकि उनकी सदस्यता बची रहे और वे एनडीए को एक मजबूत क्षेत्रीय मंच के रूप में समर्थन दे सकें।

INDIA ब्लॉक होगा कमजोर

इन 20 सांसदों के NDA को समर्थन देने से इंडिया ब्लॉक कमजोर हो जाएगा। विपक्षी दलों के कमजोर होते ही एनडीए को आने वाले संसद सत्र में कई विधेयकों को पास कराने में आसानी होगी।

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