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मध्यप्रदेश न्यूज़ : आदिवासियों के विवाह पंजीयन को किया जा सकता है अनिवार्य, ड्राफ्ट कमेटी के सामने आए 4 बड़े सुझाव

Abhyuday Bharat News / Tue, Jun 23, 2026 / Post views : 101

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भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर अब तक की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश में आदिवासियों के विवाह (शादी) का पंजीकरण (Registration) अनिवार्य किया जा सकता है। यूसीसी को लेकर गठित कमेटी की बैठक में जनजातीय समाज (आदिवासियों) को शामिल करने और नियमों को लेकर चार बेहद महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। कमेटी के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने इन सुझावों की आधिकारिक पुष्टि की है।

कमेटी के सामने आए ये 4 सुझाव

कमेटी के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने बयान जारी कर बताया कि आदिवासियों और यूसीसी के दायरे को लेकर फिलहाल चार तरह के विचार और विकल्प सामने आए हैं, जिन पर गहन मंथन चल रहा है। पहला सुझाव यह है कि अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लोगों को समान नागरिक संहिता के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा जाए, ताकि उन्हें मिले संवैधानिक अधिकारों और पारंपरिक नियमों से किसी भी तरह की छेड़छाड़ न हो। परिधि में शामिल किया जाए: दूसरा विचार यह आया है कि आदिवासी समाज को भी पूरी तरह से यूसीसी की परिधि (दायरे) में लाया जाना चाहिए।

सिर्फ विवाह का पंजीयन अनिवार्य हो

तीसरा और बेहद अहम सुझाव यह है कि पूरे यूसीसी कानून को लागू करने के बजाय, आदिवासियों के लिए केवल शादी-विवाह का पंजीयन (मैरिज रजिस्ट्रेशन) अनिवार्य करने के लिए यूसीसी के नियम लागू किए जाएं। चौथा विचार यह है कि इसे पूरी तरह स्वैच्छिक या ऑप्शनल बना दिया जाए। यानी जो आदिवासी परिवार अपनी मर्जी से यूसीसी के दायरे में आना चाहते हैं वे आएं, उन पर इसे अपनाने की कोई कानूनी अनिवार्यता न हो।

इन सुझावों पर कमेटी लेगी अंतिम निर्णय

यूसीसी को लेकर आई इस बड़ी अपडेट के बाद अब गेंद ड्राफ्टिंग कमेटी के पाले में है। कमेटी के सदस्य शत्रुघ्न सिंह के मुताबिक, इन चारों विचारों और समाज के विभिन्न वर्गों से मिले फीडबैक के आधार पर ही कमेटी अब अपना अंतिम निर्णय लेगी। इसके बाद ही मध्य प्रदेश में यूसीसी के अंतिम ड्राफ्ट का स्वरूप तय होगा।

पर्सनल लॉ पर टारगेट, UCC हम इसे नहीं मानेंगे

जमीयत उलेमा-ए-हिंद (मप्र) के अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारुन ने कहा कि सरकार संविधान के डायरेक्टिव प्रिंसिपल का हवाला देकर यूसीसी ला रही है, जबकि इसी में शामिल शराबबंदी और समान काम समान वेतन जैसी व्यवस्थाएं हैं, जिन्हें लागू नहीं किया गया। सिर्फ पर्सनल लॉ को टारगेट कर रहे, जो कुरान और हदीस से चलता है। हम इसे नहीं मानेंगे

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