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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता कासिम रसूल इलियास ने आईएएनएस से बात करते हुए दो टूक कहा कि मुसलमान वंदे मातरम् के कई हिस्से नहीं पढ़ सकते हैं। ये मुसलमानों की आस्था और विश्वास से टकराते हैं। हमारा मौलिक अधिकार है आर्टिकल 25 में कि कोई और आस्था (फेथ) दूसरे फेथ पर थोपी नहीं जानी चाहिए। ये एक धर्म को दूसरे धर्म में थोपने की कोशिश है, जो कि गलत है। ये निंदनीय है।
मदरसे में वंदे मातरम्, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
कासिम रसूल इलियास ने आगे कहा कि मैं समझता हूं इस फैसले को वापस लिया जाना चाहिए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मुद्दे पर फैसला ले लिया है। बहुत जल्द हम सुप्रीम कोर्ट जाने वाले हैं। पूरा विवाद तब बढ़ा जब पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने शुक्रवार को कहा कि राज्य भर के सभी स्कूलों और मदरसों में'वंदे मातरम' गाना अनिवार्यहै। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी मदरसों में प्रार्थना सभा के दौरान 'वंदे मातरम' गाना तत्काल प्रभाव से अनिवार्य कर दिया है।
मदरसा शिक्षा निदेशालय का यह आदेश राज्य की बीजेपी सरकार की ओर से सभी स्कूलों में राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य किए जाने के लगभग एक सप्ताह बाद आया है। वंदे मातरम् सभी स्कूलों और मदरसों में, हर जगह गाया जाएगा। जहां भी सरकारी निधि का उपयोग होता है और सरकारी कानून लागू होते हैं वहांराष्ट्रगीत गाया जाना चाहिए। पूरे देश में इसी तरह इसका पालन किया जाता है।
हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार के इस फैसले का विरोध राज्य में ही शुरू हो गया। ‘ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन’ के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने गुरुवार को कहा था कि मदरसे इस आदेश को लागू करने के किसी भी प्रयास का विरोध करेंगे। कबीर ने कहा कि मदरसों में वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा। सरकार को मदरसों में ऐसे मामलों पर हुक्म चलाने का कोई अधिकार नहीं है। अगर यह निर्देश लागू किया गया तो सभी मुसलमान एकजुट होकर इस फरमान का विरोध करेंगे।
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