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ABN NEWS :- देश दुनिया : नेपाल में बालेन सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, भारत से 100 रुपये से ज्यादा के सामान पर टैक्स को लेकर भड़के लोग

Abhyuday Bharat News / Mon, Apr 20, 2026 / Post views : 146

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नेपाल की बालेन शाह सरकार आने के बाद भारत से लगी सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारी भारत से आने वाले 100 रुपये से ज्यादा के सामान पर टैक्स वसूल रहे हैं। इसका विरोध शुरू हो गया है।

काठमांडू: नेपाल में बालेन शाह की सरकार के एक आदेश के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया है। बालेन शाह की सरकार निर्देश के बाद नेपाल ने अपनी भंसार नीति (Custom Duty) को सख्ती से लागू करना शुरू किया है, जिसमें भारत से आयात की जाने वाली 100 रुपये (नेपाली) से ज्यादा की कीमत वाली सभी चीजों पर टैक्स लगाने की बात कही गई है। बालेन सरकार के आदेश के बाद नेपाल की सशस्त्र पुलिस ने देश के दक्षिणी मैदानों में भारत से लगी सीमा चौकियों पर सुरक्षा निगरानी कड़ी कर दी है। हालांकि यह प्रावधान कई साल पहले बनाया गया था, लेकिन व्यावहारिक दिक्कतों के कारण इसे लागू नहीं किया जा रहा था। नई सरकार की सख्ती के बाद नेपाल के लोग भड़क गए हैं।

सीमा क्षेत्रों के लोगों और हितधारकों का कहना है कि यह कदम उनके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला है, क्योंकि वे लंबे समय से सस्ते सामान के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं। नेपाल-भारत खुली सीमा संवाद समूह ने शनिवार को सरकार से कस्टम नीति में तुरंत संशोधन करने की मांग की। भारतीय सीमा से लगे नेपाल के बीरगंज में इस आदेश के खिलाफ स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया है।

नेपाल जन्म लेकर मृत्यु तक जो भी रीति-रिवाज होते हैं, उनके लिए जरूरी सारा सामान हम भारत से लाते हैं। यहां तक कि खाद भी, जिसे नेपाल सरकार कई बार समय पर   उपलब्ध नहीं करा पाती है।

नेपाली प्रदर्शनकारी

भारत-नेपाल के सदियों पुराने संबंधों का हवाला

नेपाल-भारत खुली सीमा संवाद समूह ने चेतावनी दी कि मौजूदा नियम सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर अनावश्यक बोझ डाल रहे हैं। जारी बयान में संगठन ने नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का हवाला देते हुए सरकार से व्यावहारिक और जनहितैषी कदम उठाने की अपील की, ताकि सीमा पार आवाजाही आसान हो सके और लोगों के बीच संबंध मजबूत हों।

संगठन की प्रमुख मांगों में 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को तत्काल खत्म करना शामिल है। उनका कहना है कि यह नियम खासकर कम आय वाले परिवारों को प्रभावित करता है और इसे लागू करना भी मुश्किल है। इसके बजाय घरेलू उपयोग के सामान पर शून्य शुल्क की मांग की गई है।

अधिकारियों ने किया फैसले का बचाव

वहीं, सीमा शुल्क विभाग के निदेशक किशोर बरतौला ने इस नियम के सख्ती से पालन का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम तस्करी पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि तस्कर आम लोगों के जरिए छोटे-छोटे सामान कई बार मंगवाकर बाद में उन्हें बड़ी मात्रा में इकट्ठा कर बेचते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि 100 रुपये से अधिक के सामान पर शुल्क लगाने से सरकार को ज्यादा राजस्व नहीं मिलता, लेकिन इससे तस्करी पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है। उन्होंने इस सख्ती से नेपाल के सीमावर्ती शहरों के व्यापारियों को भी फायदा होने की उम्मीद जताई।

इसके अलावा भारत में रजिस्टर्ड निजी वाहनों को भी अब पहले से मंजूरी लिए बिना नेपाल में प्रवेश से रोक दिया गया है। पहले भारतीय लाइसेंस प्लेट वाले वाहन आसानी से नेपाल में प्रवेश करते देखे जाते थे। कुछ लोग देश के अंदर भी उनका इस्तेमाल करते थे। इस फैसले ने मधेश के सीमावर्ती जिलों में काफी समस्या खड़ी कर दी है। सरकार के फैसले के खिलाफ राजनीतिक दलों और स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताई है और कहा कि यह फैसला मधेश क्षेत्र के लोगों के जीवन की असलियत को नजरअंदाज करता है।

भारत का करारा जवाब

नेपाल सरकार के फैसले के बाद भारत ने भी करारा जवाब देते हुए सख्ती बढ़ा दी है। भारतीय अधिकारी नेपाल जाने वाले और वहां से आने वाले लोगों की सख्ती से जांच कर रहे हैं। पैदल और साइकिल वालों की भी जानकारी रिकॉर्ड की जा सकती है। भारत-नेपाल के बीच आने-जाने वाले सभी लोगों के लिए पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।

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