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देश विदेश न्यूज : इजरायल आने पर पछता रहे हैं...भारत में अच्छी थी लाइफ, भारतीय यहूदियों को है ये मलाल?

Abhyuday Bharat News / Sun, Mar 1, 2026 / Post views : 186

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मिडिल ईस्ट में अमेरिकाल-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई छिड़ गई है। इन सबके बीच क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। इजरायल और ईरान से भारत का काफी पुराना नाता रहा है और दोनों देशों से भारत के बेहतर संबंध भी हैं।

नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग छिड़ चुकी है। वहीं, भारत ने भी अपने नागरिकों को सुरक्षित रहने के लिए एडवाइजरी जारी की है। सोशल मीडिया पर भी लोग ईरान और इजरायल को लेकर समर्थन या विरोध में अपनी भावनाएं जता रहे हैं।
इजरायल में 41,000 भारतीय समुदाय के लोग रहते हैं। वहीं, ईरान में 10 हजार से ज्यादा भारतीय रह रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की यात्रा की है। वहीं, भारत का ईरान के साथ भी गहरा नाता रहा है। फिलहाल अभी भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट में अरबों डॉलर का निवेश किया है।


इजरायली बोला-भारत में कोई विरोध नहीं झेला

  • रेडिट पर Some-Gur-8041 नाम के एक इजरायली यूजर ने कहा-दक्षिण एशिया में यहूदियों का हजारों साल से खुले दिल से स्वागत किया जाता रहा है। भारत में आज के कोचीन के पास मालाबार तट पर सबसे पहले यहूदी पहुंचे थे।

  • तब से हम इजरायली हिंदुओं और मुसलमानों के साथ सद्भाव से रहते आए हैं। मैं कई वर्षों तक भारत में रहा और मुझे कभी भी यहूदी-विरोधी भावना का सामना नहीं करना पड़ा।


बंटवारे के बाद इजरायल जाकर बसे यहूदियों को मलाल

  • इजरायली यूजर ने कहा-मैंने कलकत्ता से अहमदाबाद तक के स्थानीय यहूदी समुदायों के साथ पूजा-अर्चना और उत्सव मनाए। इससे मुझे वैश्विक यहूदी अनुभव को पहले से कहीं अधिक समझने और सराहने का अवसर मिला।

  • यूजर ने कहा-भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद इजरायल में जाकर बसे भारतीय यहूदियों से मेरी मुलाकात हुई, जिन्हें अपने इस फैसले पर पछतावा है क्योंकि अब उन्हें एहसास होता है कि भारत में जीवन कितना सुखद था।

  • दरअसल, भारतीय यहूदियों को इस बात का मलाल है कि इजरायल में हमेशा जीवन युद्ध और संघर्षों की आशंकाओं के बीच गुजरता है। इजरायल में हमेशा ईरान या हमास के हमलों का खतरा मंडराता रहता है।


भारत में रहते हैं चार तरह के यहूदी समुदाय

  • माइनॉरिटी राइट्स ग्रुप पर छपी जानकारी के अनुसार, भारत में तीन मुख्य यहूदी समुदाय हैं, जिनमें से हर एक की उत्पत्ति और सांस्कृतिक विशेषताएं और परंपराएं अलग-अलग हैं।

  • ये हैं कोचीनी, बेने इजरायल और बगदादी। कोचीनी यहूदी केरल में तो बेने इजरायल मुंबई-गोवा में रहते हैं। वहीं, बगदादी यहूदी का कुछ हिस्सा दिल्ली-कोलकाता में रहता है।

  • वहीं, एक और समुदाय है बेनी मेनाशे, जो पूर्वोत्तर के मणिपुर और दूसरे राज्यों में रहता है। ये भी खुद को यहूदी होने का दावा करते हैं।


भारत में यहूदी समुदायों की संख्या घटी

  • इनमें से किसी को भी सीधे तौर पर उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ा है। हालांकि, इजरायल और अन्य देशों में प्रवास के कारण इनकी संख्या घट रही है।

  • कोचीन के यहूदियों ने मध्य पूर्वी यहूदी समुदायों के साथ व्यापारिक और धार्मिक संबंध बनाए रखे, लेकिन 1948 में उनकी संख्या 2,500 थी।

  • फिर भी इजरायल में प्रवास के कारण उनकी संख्या घटकर मुट्ठी भर रह गई है। 1951 में 20,000 बेने इजरायल थे, लेकिन 2006 तक इनकी संख्या 5,000 से अधिक नहीं रह गई। अब केवल कुछ सौ बगदादी यहूदी ही बचे हैं।


इजरायल में हैं 40 हजार से ज्यादा भारतीय

  • जनवरी में आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, छात्रों सहित लगभग 10,000 से अधिक भारतीय ईरान में रह रहे थे।इजरायल में भारतीय समुदाय के लगभग 41,000 सदस्य हैं।

  • पीएम मोदी के दौरे पर भी इजरायल के साथ यह डील हुई है कि वह अगले पांच साल यानी 2030 तक 50,000 भारतीयों को अपने यहां नौकरी देगा। पीएम मोदी ने वहां भारतीय समुदाय से मुलाकात की थी।


1.5 लाख भारतीयों ने मध्य-पूर्व की लड़ाई में लिया था हिस्सा

इजरायल में भारतीय दूतावास के अनुसार, प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के दौरान 150,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने मध्य पूर्व में सिनाई, पवित्र भूमि और सीरिया में सैन्य कार्रवाई में भाग लिया। भारतीय घुड़सवार सेना, पैदल सेना, तोपखाना इनमें प्रमुख थे।

ईरान-इजरायल में सतर्क रहें भारतीय

  • एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार, ईरान, इजरायल और अन्य प्रभावित देशों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को बेहद सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।

  • सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और फलस्तीन सहित इन देशों में स्थित भारतीय दूतावासों ने अलग-अलग सलाह जारी कर भारतीय नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा एवं आपातकालीन प्रोटोकॉल का पालन करने का आग्रह किया है।

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