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कृषक : विकास के क्रायोजेनिक मॉडल का अंत तो जैविक खाद ही था

Abhyuday Bharat News / Tue, May 26, 2026 / Post views : 134

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15 अगस्त 2047 को स्वतंत्र हुए भारत में हम कुछ भी रहे हो कॉकरोच तो नहीं थे पर 14 मई 2014 को जब अच्छे दिनों पर आहत हुई हिंदू कलयुग की समाप्ति मान रहा था सतयुग आ रहा है कह रहा था। काला धन, काली अर्थव्यवस्था खत्म होगी। भारत विश्व गुरु बन जाएगा आत्मनिर्भर होगा।

विश्व की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगा नई पीढ़ी का अमृत कल होगा तब क्या यह पता था कि हमको कॉकरोच बना दिया जाएगा। 

इसी काल में केंद्रीय चुनाव आयोग केचुआ हो गया और हम अर्थात लोकतंत्र के लोक कॉकरोच हो गए। हमने इस देश में कई नई हवाओं को आते और उन्हें दूषित होते देखा है। एक अवसर मोरारजी सरकार के समय आया और हमने देखा कि कैसे बिखरा और फिर से इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी। तब उत्तर पूर्व के राज्यों में धमासान पंजाब का अलगाव और कश्मीर को सुलगते देखा। प्रधानमंत्री के घर पर प्रधानमंत्री को गोलियों से छल्ली होते देखा।

युवा राजीव गांधी से उम्मीदें बांधी उन्हें लोकसभा में 415 की रिकॉर्ड जीत मिली। राजीव गांधी आधुनिकता नई पीढ़ी, संचार, कंप्यूटर के साथ उन्होंने नए प्रयोग किये। उन्होंने फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया के नाम से विश्व की कई राजधानियों में भारत की पहचान बनाई, देश में सांस्कृतिक चेतना का उदय हुआ तभी तो रामायण, महाभारत, डिस्कवरी ऑफ इंडिया हमने देखी।

आज हम क्या देख रहे हैं धुरंधर, कश्मीर केरल फाइल दिखा कौन रहा है मोदी और डोभाल, नरसिम्हा राव, मनमोहन सिंह, इंद्रा, राजीव के समय विश्व में हमारे देश की शाख थी लोकतंत्र की धमक थी क्योंकि भारत का प्रधानमंत्री विश्व के पत्रकारों के सामने प्रश्न लेता था और जवाब देता था।

क्या आज ऐसा होता है ऐसा नहीं है कि हमने राजीव गांधी, बीपी सिंह, देव गोंडा, गुजराल, को आते जाते नहीं देखा पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसी धूल उड़ाते नहीं देखी। 2014 में लोगों ने जो उम्मीदें बांधी थी वे आज खत्म हो गई है। मामला सिर्फ गर्मी का नहीं है हमने जंगल कते हैं, हमने युवाओं की उम्मीदें कटी हैं, हमने अपने घर में अपनी बहू बेटियों को मारा है। हम असल में हमने जिस क्रायोजेनिक इंजन को विकास माना उसकी असलियत हम भूल गए, याद रखें क्रायोजेनिक इंजन कैसे काम करता है। नीचे का इंजन ऊपर के इंजन को दहन करता है। नीचे का हिस्सा गिर जाता है। 2014 के बाद हमने यही किया और अब जो इसे ऊपर जा रहे हैं उन्हें नीचे के सब लोग तुक्छ आते हैं। और यहीं से शुरू हुआ भारत से पलायन पहले प्रतिभा का अब पूंजी का। 

आज बिलासपुर के मुख्य मार्ग पर कंपोस्ट खाद₹60 किलो बिक रही है और जब हमने हिसाब लगाया कि खेत में कितनी कंपोस्ट लगेगी तो पता चला कि न्यूनतम 10 ट्रैक्टर अब हिसाब लगा ले₹50 किलो के फार्मूले से 10 ट्रैक्टर खाद क्योंकि श्रीमान प्रधानमंत्री के आवाहन पर यूरिया का उपयोग आधा हो जाएगा। और हमें जैविक खाद डालना पड़ेगा किसी को नहीं पता कि जैविक खाद कहां-कहां बनी है और जिस देश में दूध गाय की जगह युरीया से बन जाता हो वहां अब तक कितनी नकली खाद बन गई होगी। बिलासपुर कहानी समाचार है 14 लाख 77000 का फर्जी वाला।

न्यूज़ संकलन : अनिल बघेल ABN

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