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बिलासपुर : उज्जवला अर्थात ब्लैक का खेल

Abhyuday Bharat News / Wed, Apr 1, 2026 / Post views : 219

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घरेलू गैस सिलेंडर दो स्तर पर मिलते हैं इसी तरह बैंक का खाता भी दो तरह का होता है। एक सामान्य गैस कनेक्शन और उज्जवला गैस का कनेक्शन इस प्रकार सामान्य बचत खाता दूसरा रुपए खाता। पूरे राज्य की बात हम नहीं करते बिलासपुर में सामान्य गैस सिलेंडरों की संख्या 190000 के लगभग है और दूसरी और उज्जवला कनेक्शन की संख्या आश्चर्यजनक रूप से 240000 है। योजना रहती है कि उज्ज्वल का कनेक्शन बीपीएल या निर्धारित आर्थिक श्रेणी से संबंधित ही होगा और इन्हें ही सब्सिडी युक्त निशुल्क एलपीजी गैस कनेक्शन प्रदान किया जाता है। 

2023 में उज्जवला कनेक्शन पर ₹300 की सब्सिडी थी जबकि सामान्य कार्ड धारक को₹50 से कम की सब्सिडी मिलती है। खाड़ी समस्या के पहले उज्जवला की गैस टंकियां 50% खाली पड़ी थी मतलब उन पर गैस रिफिलिंग नहीं किया जा रहा था। बाजार के सूत्र बताते हैं कि ब्लैक का धंधा अधिकतर उज्जवला कनेक्शन से ही चलता है।

 पूरे शहर के भीतर मुख्य मार्ग और गलियों में पकोड़ा उद्योग संचालित है हर ठेले के नीचे बहु अर्थात लाल सिलेंडर उज्जवला वाला को घुंघट पहनाकर रखा जाता है। सिम्स रोड, रिवरव्यू रोड, बृहस्पति बाजार रोड या जहां आपका मन चाहे निगाह डालकर देख ले और तो और किसी भी धार्मिक कार्यक्रम का लंगर वगैर उज्जवला के नहीं होता। उज्जवला के कार्ड क्राइसिस के बाद तेजी से सक्रिय हुए और इस समय जिले में पूरी रफ्तार 240000 से दौड़ रहे हैं।

इन पर अंकुश लगाने का अर्थ है सत्ताधारी दल का वोट बैंक का कबाड़ा हो जाना यह कबाड़ा दो तरह से होगा। उज्जवला ना रहे तो गैस एजेंसियों में कर्मचारियों की संख्या कम हो जाएगी और कई जुगाड़ू नेता टाइप लोग का धंधा बैठ जाएगा बहुत से सोनामधन्य रेस्टोरेंट संचालक धंधा छोड़ देंगे। कमर्शियल गैस का रेट बढ़ा और व्यंजनों की मूल्य वृद्धि हो गई असल में इन्होंने आपदा में अवसर देखा। विभागीय सेटिंग इतनी जबरदस्त है कि किसी नामचीन मिठाई व्यवस्थाएं, रेस्टोरेंट व्यवसाय के किचन में कोई नहीं झाकता हां जिस अधिकारी को अपना तबादला करना होता है उसके पास यह सबसे आसान आईडिया है। नामी गिरामी किचन पर छाप मारो और ट्रांसफर पा जाओ.....।

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