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अध्यात्म : सत्य क्या है? सृष्टि के सत ही सृष्टि का आधार है l

Abhyuday Bharat News / Thu, May 28, 2026 / Post views : 177

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जिन कारकों के द्वारा सृष्टि हुई है और निरंतर संचालित है अर्थात जिन कारकों के आधार पर सृष्टि टिकी हुई है l वही "सत्य" है जबकि हमारा मानव समाज सत्य का अर्थ सच "वाणी " को ही मानता है, जो सर्वथा असंगत एवं अपर्याप्त है l सत महान एवं विशाल स्वरूप है, जिसमें असंख्य सत्य समाए हुए हैं l इस प्रकार सृष्टि के आधार पांच सत से है l

1. पांच तत्व हमारा संपूर्ण सृष्टि पांच तत्वों के सहयोग से निर्मित है

2. माता-पिता प्रत्येक प्राणी माता-पिता के रूप में अपना धर्म का पालन करते हुए सृष्टि को बनाए रखने में योगदान देकर सृष्टि को संचालित करते हैं हम ये मानते हैं:-

3. सूर्य चंद्रमा सृष्टि को संचालित होने के लिए ऊर्जा (शक्ति) सूर्य से और क्रिया को संतुलित करने की शक्ति चंद्रमा से मिलती है

4. आत्मा- परमात्मा - सृष्टि के रचयिता परमात्मा 24 प्रकृतियों के संयोग से निर्मित काया (देह ) में अपना अंश आत्मा प्रदान कर सृष्टि को निरंतर संचालित करते हैं

5. जन्म - मृत्यु जो जन्म लेता है वह मरता अवश्य है, सृष्टि में गति एवं क्रिया को संतुलित बनाए रखने में जन्म और मृत्यु महत्वपूर्ण योगदान करते हैं, प्रत्येक "सत" अपना वजूद कायम रखते हुए अपने- अपने धर्म का पालन करते हैं, जिसे सृष्टि चलती है l जो कर्म भाव, चरित्र सतधर्म पर आधारित होती है l सतधर्म को पालन करती है और सृष्टि के पक्ष में अपना योगदान देकर सृष्टि को संचालित होने में सकारात्मक सहभागिता निभाते हैं l "सत्य" कहलाते हैं l सृष्टि के विरुद्ध नकारात्मक कर्म, भाव एवं चरित्र असत्य को श्रेणी में आते हैं l

सतगुरु के द्वारा इस सतज्ञान को प्राप्त किया जा सकता है l अर्थात सतगुरु हमें उस परम सत्ता परमपिता परमेश्वर से मिलने हेतु "सतमार्ग" दिखाता है जिस पर चलकर हम सृष्टि को कायम रखते हुए परमपिता सतपुरुष से मिल सकते हैं l अतः हम सब सतगुरु के चरणों में समर्पित होकर उन्हें प्रणाम कर जिन्होंने हमें अंधकार से उबार कर प्रकाश रुपी परमात्मा से मिलाया है l

लेखक : सतलोकी संत राष्ट्रीय महंत सत्यप्रेमी गायकवाड़ जी (सतनामी )

संकलन : अनिल बघेल, ABN

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