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Abhyuday Bharat News / Fri, Jul 3, 2026 / Post views : 2
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार शाम शाम करीब 7 बजे न्यूयॉर्क शहर में ईस्ट 43rd स्ट्रीट और फर्स्ट एवेन्यू के पास ब्बती प्रदर्शनकारी ने खुद को आग लगा लीा। इस दौरान शख्स पारंपरिक भिक्षु के कपड़े पहने हुए था। साथ ही तिब्बती झंडा लिए हुए था। व्यक्ति ने पहले सड़क किनारे तिब्बती झंडा लगाया और फिर खुद को आग के हवाले कर दिया।
आग की लपटों में घिरने के एक मिनट से भी कम समय में वह जमीन पर गिर पड़ा, जबकि ट्रैफिक चलता रहा और कई गाड़ियों के हॉर्न बजते रहे। पुलिस अधिकारी और सुरक्षाकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और 15 सेकंड के भीतर आग बुझा दी। अधिकारियों ने बताया कि उस व्यक्ति को बेलेव्यू अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की पहचान उसके एक दोस्त ने लोबगा रांगजेन के रूप में की है। बताया गया है कि वह करीब 20 साल से अमेरिका में रह रहा था। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
2009 से अब तक 150 से ज्यादा तिब्बतियों ने आत्मदाह किया
बता दें दि चीन के तिब्बत पर नियंत्रण के विरोध और फ्री तिब्बत अभियान के तहत 2009 से अब तक 150 से ज्यादा तिब्बती आत्मदाह कर चुके हैं। हला चर्चित मामला फरवरी 2009 में सामने आया, जब युवा भिक्षु तपे ने खुद को आग लगा ली थी। मार्च 2011 में किरती मठ के 21 वर्षीय भिक्षु फुंटसोग ने आत्मदाह किया। इसके बाद 2012 और 2013 में ऐसी घटनाएं सबसे ज्यादा हुईं। तिब्बती संगठनों का कहना है कि लोग चीन के शासन का विरोध जताने, दलाई लामा की तिब्बत वापसी, धार्मिक और सांस्कृतिक आजादी, तिब्बती भाषा और पहचान बचाने की मांग को लेकर यह कदम उठाते हैं। कई लोगों ने खुद को आग लगाने से पहले ‘तिब्बत को आजाद करो’, ‘दलाई लामा को वापस आने दो’ और ‘चीन तिब्बत छोड़ो’ जैसे संदेश भी छोड़े।
2009 से अब तक 150 से ज्यादा तिब्बतियों ने आत्मदाह किया
बता दें दि चीन के तिब्बत पर नियंत्रण के विरोध और फ्री तिब्बत अभियान के तहत 2009 से अब तक 150 से ज्यादा तिब्बती आत्मदाह कर चुके हैं। हला चर्चित मामला फरवरी 2009 में सामने आया, जब युवा भिक्षु तपे ने खुद को आग लगा ली थी। मार्च 2011 में किरती मठ के 21 वर्षीय भिक्षु फुंटसोग ने आत्मदाह किया। इसके बाद 2012 और 2013 में ऐसी घटनाएं सबसे ज्यादा हुईं। तिब्बती संगठनों का कहना है कि लोग चीन के शासन का विरोध जताने, दलाई लामा की तिब्बत वापसी, धार्मिक और सांस्कृतिक आजादी, तिब्बती भाषा और पहचान बचाने की मांग को लेकर यह कदम उठाते हैं। कई लोगों ने खुद को आग लगाने से पहले ‘तिब्बत को आजाद करो’, ‘दलाई लामा को वापस आने दो’ और ‘चीन तिब्बत छोड़ो’ जैसे संदेश भी छोड़े।
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