Sat, 12 Sep 2026
Logo

ब्रेकिंग

निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर मंथन

प्रधानमंत्री आवास योजना ने लाखों गरीब परिवारों के पक्के घर का सपना किया साकार : केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिं

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से प्रकृति संरक्षण और मातृ सम्मान का संदेश

हरतालिका तीज 2026 कब है? जानें व्रत की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव होगा मानसून, बिलासपुर में समेत कई जिलों में 9 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट

पीएससी में आज अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त, नये नाम पर चर्चा

तीज के रंग में रंगा रायपुर प्रेस क्लब, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने रैंप वॉक कर बढ़ाया महिला पत्रकारों का उत्साह

पत्रकारिता पर आपातकाल जैसा प्रहार! शाहीन खान और नफीस खान के मामले में परिषद ने जताया विरोध

बिलासपुर में मनाया गया तर्कवादी पत्रकार गौरी लंकेश का स्मृति शहादत दिवस

संकुल स्तरीय विदाई एवं शिक्षक सम्मान समारोह में 31 शिक्षकों का सम्मान

सूचना

छत्तीसगढ़ में फिर एक्टिव होगा मानसून, बिलासपुर में समेत कई जिलों में 9 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट

CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पंचायत चुनाव में नहीं चलेगा आधार कार्ड-वोटर आईडी, 21 साल से कम उम्र में बनीं सरपंच; इलेक्शन कैंसिल

छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों के बदले नियम... अब NOC की जरूरत खत्म, 'नेशनल', 'इंटरनेशनल' लिखना हुआ बैन

छत्तीसगढ़ न्यूज़ : कोरबा में राखड़ बांधों की खतरनाक हकीकत: ओवरफ्लो का खतरा, हसदेव नदी पर मंडरा रहा संकट...

Abhyuday Bharat News / Tue, Apr 21, 2026 / Post views : 208

Share:

कोरबा। छत्तीसगढ़ के पावर हब कोरबा में राखड़ बांधों की स्थिति अब चिंताजनक होती जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) के HTPP प्लांट से जुड़े डिंडोलभांटा और झाबू राखड़ बांधों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि यहां राख रखने की जगह तक नहीं बची है। स्थिति को संभालने के बजाय जिम्मेदार अधिकारी अस्थायी मेंड बनाकर जुगाड़ के सहारे किसी तरह राख भरने में जुटे हैं।

सूत्रों के अनुसार हर साल इन बांधों से राख निकालने और रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। कागजों में सफाई और मेंटेनेंस के दावे किए जा रहे हैं, जबकि मौके पर बांध ओवरफ्लो की स्थिति में हैं। इससे बोगस बिल और फर्जी कार्यों के जरिए बड़े स्तर पर घोटाले की आशंका जताई जा रही है।

मौजूदा स्थिति यह है कि अधिकांश राखड़ बांधों में महज 2 से 3 महीने की ही क्षमता बची है। इसके बावजूद वर्षों से एक ही अधिकारियों की तैनाती कई सवाल खड़े कर रही है। लंबे समय तक एक ही जगह पदस्थ रहने से सिस्टम कमजोर पड़ा है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला है।

सबसे गंभीर चिंता हसदेव नदी को लेकर है, जो कोरबा, जांजगीर-चांपा और सक्ती जिलों के किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। यदि राख और प्रदूषित पानी नदी में मिला, तो खेती-किसानी पर गहरा असर पड़ सकता है। साथ ही मवेशियों के लिए भी यह पानी जहरीला साबित हो सकता है।

Tags :

#CG NEWS

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts