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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : बिलासपुर में DEO नियुक्ति पर उठे सवाल:’6 माह के कनिष्ठ प्राचार्य को मिली जिम्मेदारी....

Abhyuday Bharat News / Wed, Jun 17, 2026 / Post views : 186

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बिलासपुर। 12 जून 2026 बिलासपुर के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के रूप में प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। प्राचार्य कल्याण संघ ने इस नियुक्ति पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे वरिष्ठता नियमों के विपरीत बताया है।

गुरुवार को संघ का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मिला और ज्ञापन सौंपकर नियुक्ति आदेश पर पुनर्विचार करते हुए उसे निरस्त करने की मांग की।

संघ का कहना है कि मूल रूप से शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा, विकासखंड मस्तूरी में पदस्थ प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल को बिलासपुर जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी नियुक्त किया गया है, जबकि उनकी प्राचार्य पद पर वरिष्ठता महज छह माह की है। इसके विपरीत जिले में 14 से 18 वर्ष तक की वरिष्ठता रखने वाले कई प्राचार्य कार्यरत हैं, जिन्हें नजरअंदाज कर यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

प्राचार्य कल्याण संघ ने आरोप लगाया कि यह नियुक्ति छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी वरिष्ठता संबंधी दिशा-निर्देशों के विपरीत है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि 14 जुलाई 2014 को जारी शासन के निर्देशों और पूर्व के प्रावधानों के अनुसार ऐसे प्रभार वरिष्ठता के आधार पर दिए जाने चाहिए।

संघ ने यह भी दावा किया कि इस प्रकार के मामलों में माननीय उच्च न्यायालय भी वरिष्ठता के सिद्धांत को महत्व देते हुए आदेश जारी कर चुका है। ऐसे में कनिष्ठ अधिकारी को बड़े और संवेदनशील जिले का प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बनाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

ज्ञापन में कहा गया है कि वर्ष 2018 के बाद से विभाग में उपसंचालक और जिला शिक्षा अधिकारी के पदों पर नियमित पदोन्नति नहीं हुई है।

इसके कारण वरिष्ठ अधिकारियों को अवसर नहीं मिल पा रहा है। संघ का आरोप है कि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने के बजाय विभाग ने सबसे कनिष्ठ प्राचार्य को प्रभारी डीईओ बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों की उपेक्षा की है।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इस नियुक्ति से वरिष्ठ प्राचार्यों में असंतोष और नाराजगी का माहौल है।

उन्होंने शासन से आदेश पर पुनर्विचार कर नियुक्ति निरस्त करने तथा वरिष्ठता के आधार पर नई व्यवस्था करने की मांग की है।

प्राचार्य कल्याण संघ ने चेतावनी दी है कि यदि दो सप्ताह के भीतर इस मामले में उचित निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन वैधानिक आंदोलन के साथ न्यायालयीन कार्रवाई का रास्ता अपनाएगा।

अब इस मामले में शिक्षा विभाग और शासन का रुख क्या रहता है, इस पर शिक्षा जगत की नजरें टिकी हुई हैं।

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#CG NEWS

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