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पटनाः बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और निशांत कुमार की बिहार यात्रा के बीच बीजेपी का बैक टू बैक प्लान रेडी है। अब बीजेपी भी अपना वोट बैंक बढ़ाने की राह पर चल पड़ी है। बीजेपी की इंटरनल बैठक में रणनीतिकारों का अंततः गठबंधन की बाध्यता का दर्द छलक ही गया। सूत्र बताते हैं कि बिहार की बागडोर संभाले राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी प्रशिक्षण बैठक में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को लगे हाथ टास्क भी दे डाला। सम्राट चौधरी के सीएम बनते ही बीजेपी के भीतर एकला चलो का राग क्यों गाया जाने लगा समझिए।
गठबंधन की राजनीति के साथ बीजेपी का सत्ता में बने रहने के बावजूद एमपी और राजस्थान की तरह सत्ता सुख पाने की छटपटाहट तो बेचैन करती ही रही है। अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़े जयंती समारोह में तत्कालीन उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जो कहा था कि सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा, यही छटपटाहट बीजेपी के आम कार्यकर्ता के बीच भी है। सूत्र बताते हैं कि कुछ दिन पहले हुई प्रशिक्षण बैठक में जब ने शिरकत की तो उनके सामने सक्रिय कार्यकर्ताओं ने बीजेपी की सरकार अब तक नहीं बनने का दर्द छलक गया और पूछ भी बैठे कि कब बनेगी बिहार में बीजेपी की सरकार!
प्रशिक्षण बैठक को संबोधित करने के पहलेमुख्यमंत्री सम्राट चौधरीने सभी का अभिवादन स्वीकार किया और उन्हें धन्यवाद भी दिया। सूत्र बताते हैं कि जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संबोधन की घड़ी आई तो उन्होंने कार्यकर्ताओं की मंशा का जवाब देते कहा कि गठबंधन की राजनीति एक समीकरण है, जहां से वोट का वह गणित हासिल होता है जो सरकार के गठन का रास्ता खोलता है। आप सब सक्रिय हो जाएं, 50 प्रतिशत वोट के टारगेट छू लें तो आप अपने सपने को प्राप्त कर सकते हैं।
दरअसलनीतीश कुमारके स्वास्थ और उम्र को देखकर राजनीतिक गलियारों में यह हवा चल पड़ी कि जदयू समाप्त हो जाएगा। लेकिन नीतीश कुमार और उनके पुत्र निशांत कुमार ने मिलकर बिहार की यात्रा की जो ठानी है, वहां से निशांत की जदयू का दूसरा अध्याय शुरू होगा। राजद की राजनीति को परास्त कराने का टेस्टेड फॉर्मूला जदयू, लोजपा, हम और रालोमो का गठबंधन बन गया है। बीजेपी सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्रित्व काल में क्या लव-कुश वोट का पूरी तरह साध पाएगी? या फिर एनडीए गठबंधन के लिए निशांत कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यू और उनकी छतरी तले लव-कुश का वोट बैंक बीजेपी के लिए अनिवार्यता बनी रहेगी? मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तो बतौर लक्ष्य 50 प्रतिशत वोट की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं के कंधे पर डाल दी है।
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