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रिपोर्ट के अनुसार इन्हीं सब बातों पर चर्चा के लिए अरविंद केजरीवाल ने उन नेताओं को शुक्रवार शाम को अपने आवास पर बुलाया भी था, लेकिन मीटिंग हो पाती उससे पहले ही'आप' के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों की ओर से राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने और बीजेपी में विलय की घोषणाकर दी गई।
माना जा रहा है कि जिन 5 सांसदों को अरविंद केजरीवाल अभी इस्तीफा देने पर भविष्य में टिकट देने का वादा कर रहे थे, उनमें संदीप पाठक,हरभजन सिंह, अशोक मित्तल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी शामिल हो सकते हैं। क्योंकि, स्वाति मालीवाल के साथ पहले से ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का भयंकर विवाद था और हाल ही में राघव चड्डा से के साथ भी यह समीकरण बहुत ज्यादा बिगड़ चुका था।
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने उनसे कहा था कि वह अगर अभी इस्तीफा देते हैं तो अगले कार्यकाल में उन्हें टिकट जरूर दिया जाएगा।
लेकिन, शायद केजरीवाल को यह भनक नहीं लगी कि उनके सांसद पहले से ही आप छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का मन बना चुके हैं।
सूत्र के अनुसार केजरीवाल की ओर से मुलाकात के लिए बुलाए जाने से पहले सांसद पार्टी छोड़ने के लिए एक ग्रुप की तरह नहीं जुड़े थे, लेकिन उन सबने अपने-अपने स्तर पर आम आदमी पार्टी से विदाई लेने की ठान ली थी।
आम आदमी पार्टी के साथ राजनीतिक संकट की शुरुआत पिछले साल (फरवरी, 2025) की शुरुआत में तब शुरू हुई, जब दिल्ली विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने उसे सत्ता से बेदखल कर दिया।सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद दिल्ली के 16 विधायकों के भी आप छोड़ने की अटकलें शुरूहो चुकी हैं। ऐसे में अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है, क्योंकि वहां अगर सत्ता में वापसी नहीं हुई तो इसके राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे पर भी ग्रहण लग सकता है।
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