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नई दिल्ली: कार्टून हमेशा हंसी दिलाने या कभी कड़वी सच्चाई को मजाकिया अंदाज में दिखाने का एक जरिया होता है, लेकिन अगर कोई कार्टून लोगों को हंसी दिलाने की जगह गुस्सा दिलाने लगे तो उस पर सवाल उठना लाजिमी है। नॉर्वे के एक अखबार ने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने कार्टून में सपेरे के तौर पर दिखाया तो ऐसा ही हुआ। तस्वीर सामने आते ही भारतीयों में गुस्सा भड़क उठा। अखबार ने यह भी बता दिया कि कैसे उसकी सोच नस्लवादी और स्टीरियोटाइप है।
सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि अमेरिका के इशारों पर चलने वाले नाटो के सदस्य देश नॉर्वे में भारत के मुकाबले पेट्रोल के दाम कितने हैं। आपको बता दें कि नॉर्वे में प्राकृतिक गैसों का भंडार है। यह वो देश है, जो यूरोपियन यूनियन और यूनाइटेड किंगडम (UK) को 30 फीसदी से ज्यादा गैस की सप्लाई करता है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस देश में पेट्रोल की कीमत भारत की तुलना में लगभग दोगुनी है। नॉर्वे में एक लीटर पेट्रोल की कीमत ₹225.05 रुपये (2.45 अमेरिकी डॉलर) है। जबकि भारत में पेट्रोल की अधिकतम कीमत 111.53 रुपये (तिरुवनंतपुरम में) है। आइए आपको अब उन 4 देशों में पेट्रोल की कीमत बताते हैं, जहां पीएम मोदी हाल ही में यात्रा पर गए हैं।
क्रमांक | देश | कीमत रुपये में |
1. | नॉर्वे | ₹225.05 |
2. | स्वीडन | ₹191.54 |
3. | नीदरलैंड्स | ₹263.17 |
4. | इटली | ₹217.30 |
पीएम मोदी पर कार्टून नॉर्वे के अखबार आफ्टेनपोस्टेन के इलस्ट्रेशन में छपा था। इसमें पीएम मोदी को एक फ्यूल-स्टेशन पाइप पकड़े हुए दिखाया गया है, जो सांप जैसा लग रहा है। साथ में एक ओपिनियन आर्टिकल भी है जिसका टाइटल है 'एक चालाक और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी'।
नॉर्वे के अखबार के इस नस्लवादी कार्टून की सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी आलोचना हो रही है। अमेरिकी एक्सपर्ट कार्ल व्लेल्स ने भी इस कार्टून की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट में लिखा है कि नॉर्वे के सबसे बड़े अखबार ने PM मोदी का एक कार्टून छापा है जिसमें उन्हें एक सपेरे के रूप में दिखाया गया है। इसमें पीएम मोदी को 'एक धूर्त और थोड़ा परेशान करने वाला आदमी' कहा गया है।
अमेरिकी एक्सपर्ट ने आगे कहा कि यह पत्रकारिता नहीं है। यह तो औपनिवेशिक दौर का नस्लवाद है, जिसे टिप्पणी का चोला पहना दिया गया है। वे भारत के बढ़ते कद को पचा नहीं पा रहे हैं इसलिए वे उन्हीं घिसे-पिटे रूढ़ियों का सहारा ले रहे हैं, जिनका इस्तेमाल उनके दादा-दादी किया करते थे।
सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर भी चर्चा हो रही है कि इस भद्दे कार्टून का असर क्याभारत और नॉर्वे के रिश्तोंपर भी पड़ेगा। एक्सपर्ट्स का मानना है कि नॉर्वे केअखबार में छपे कार्टून के कारणदोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों पर कोई निगेटिव प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। हालांकि, इतना जरूर है कि इस कार्टून विवाद के कारण भारत की आम जनता के बीच इस मुद्दे ने तूल जरूर पकड़ लिया है। एक बड़ी आबादी इसे देश के अपमान से जोड़कर देख रही हैं।
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