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: "ब्लैक होल डी इंडिका” व्यंग्य उपन्यास पर विविधतापूर्ण समकालीन समीक्षात्मक अध्ययन ग्रंथ का विमोचन हुआ ..

Admin / Mon, Mar 31, 2025 / Post views : 357

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बिलासपुर - प्रयास प्रकाशन द्वारा प्रख्यात व्यंग्यकार गजेन्द्र तिवारी कृत व्यंग्य उपन्यास "ब्लैक होल डी इंडिका पर विविधतापूर्ण समकालीन समीक्षात्मक अध्ययन " ग्रंथ का विमोचन शासकीय जे.पी. वर्मा स्नातकोत्तर कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय बिलासपुर में न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण वाजपेयी के मुख्य आतिथ्य में तथा डाॅ.विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार की अध्यक्षता एवं डाॅ.श्यामलाल निराला प्राचार्य जे.पी.वर्मा स्नातकोत्तर कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय बिलासपुर के विशिष्ट आतिथ्य में आयोजित किया गया । इस कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार एवं समीक्षक गिरीश पंकज रायपुर, डाॅ.अनसूया अग्रवाल प्राचार्य शासकीय स्वामी आत्मानंद महाविद्यालय रायपुर एवं डाॅ.अनिता सिंह प्राचार्य महाराणा प्रताप महाविद्यालय बिलासपुर द्वारा ग्रंथ की समीक्षा की गई ।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति चन्द्रभूषण वाजपेयी ने अपने संस्मरणों तथा अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि यह उपन्यास सत्य घटनाओं तथा सत्य पात्रों पर आधारित है । यह उपन्यास ऐसा प्रतिनिधि उपन्यास है जो एक सदी तक जीवित रहेगा । गजेन्द्र तिवारी ने अपने अनुभव को उपन्यास के रूप में उतार दिया है । इसमें घटनायें पाठक के समक्ष प्रत्यक्षत: दृष्टिगत होते हैं । यह ऐसा प्रयास है जो मील का पत्थर साबित होगा । इसमें न्यायालयीन प्रणाली का सटीक वर्णन करते हुए सकारात्मक दिशा दी गई है । लेखक ने इसमें समाज की सत्यता और वास्तविकता को प्रगट किया है ।

       इस अवसर पर गजेन्द्र तिवारी के व्यंग्य : संवेदना और शिल्प " पर पीएचडी प्राप्त डाॅ.दिव्या ठाकुर और विधि पर उत्कृष्ट लेखन हेतु उप राष्ट्रपति माननीय जगदीप धनखड़ के द्वारा राज्य स्तरीय ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर अलंकरण प्राप्ति पर न्यायाधीश सुरेन्द्र तिवारी का सम्मान प्रयास प्रकाशन द्वारा किया गया एवं इस ग्रंथ के समस्त विद्वत लेखकों को सम्मानित किया गया ।

इस अवसर पर डाॅ. विनय कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि व्यंग्यकार गजेंद्र तिवारी द्वारा लिखित” ब्लैक होल डी इंडिका” न्याय प्रणाली को केंद्रस्थ करते हुए 21 वीं सदी के भारतीय जीवन का काला चिट्ठा का प्रतीक कहें अथवा ब्लैक होल डी इंडिका ही है । 21 वीं सदी का यह आईना परंपरा को सहेजते हुए प्रगतिशीलता के पथ पर व्यंग्य की धार के प्रहार को प्रदर्शित कर प्रकारांतर में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात प्रायः प्रत्येक क्षेत्र में हुई गिरावट के ग्राफ को दिग्दर्शित करता है । इस तरह राग दरबारी की स्वस्थ परंपरा को विकसित करने वाला यह उपन्यास न केवल भारतीय स्तर पर वरन् विश्व स्तर पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है । महाकाव्य और महागाथा की तर्ज पर प्रस्तुत यह वृहद विस्तृत उपन्यास नवरंगपुर के एक ग्राम से अद्भुत होकर उसके कस्बे और कर्मचारी नगर के रूप में विकसित होने की छोटी बड़ी, पुरानी नई, अतीत और वर्तमान ,आज और कल ,संस्कृति और सभ्यता के उत्कर्षापकर्ष को उपस्थित करती हुई समसामयिक और समकालीन समस्याओं को न केवल उभारती है वरन् उसके समाधान की संयोजना कर समाज को दिशा भी प्रदान करती है । प्रस्तुत उपन्यास समकालीनता को संजोता है इसलिए इसमें दलित और स्त्री विमर्श का प्रमुखता के साथ विवेचन है । प्रस्तुत उपन्यास की एक अन्य विशेषता है- छत्तीसगढ़ के लोक जीवन व संस्कृति की अभिव्यक्ति, अर्थात छत्तीसगढ़ की आंचलिकता की प्रस्तुति । प्रस्तुत उपन्यास में न्यायालय के विभिन्न प्रकरणों के विधिक बिंदुओं और पृथक पक्षों को अनावृत्त करने की दृष्टि से अनेक अवातंर आख्यानक प्रसंगों के रूप में इसकी समग्रता को सार-सार में समेटने का संयोजन सिद्ध किया गया है। इसमें सूक्तियों के माध्यम से अपनी बात रखी गई हैं । यह एक गद्यात्मक महाकाव्य है ।आजादी के बाद हमारे देश की चालीस-पचास साल की तस्वीर किसी को देखना हो तो ये उपन्यास पढ़ ले । “इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि डाॅ. श्यामलाल निराला ने उपन्यास पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उपन्यास में आज समाज में विकृति को स्पष्ट करते हुए समाधान की दिशा को भी इंगित किया गया है ।

      इस अवसर पर न्यायाधीश सुरेन्द्र तिवारी ने कहा कि इस समीक्षा ग्रंथ में देश के 54 सुप्रसिद्ध समीक्षकों की समीक्षा को संग्रहित कर एक अनूठा और विशिष्ट प्रयास किया गया है । उन्होंने आगे कहा कि उपन्यास नैत्य श्रेणी से हटकर है,अतः परंपरागत लक्षणों व मापदंडों के आधार पर की गई समीक्षा सीमित होगी और न्यायपूर्ण नहीं हो पाएगी, इसलिए समीक्षा के क्षेत्र में अभिनव प्रयोग करते हुए विषय वस्तु को वर्तमान परिस्थितियों से जोड़कर भागवत कथा वाचकों की शैली में सुसंगत व रोचक समीक्षित करने का प्रयास किया गया है । समाज के अनुप्रस्थ- काट यानी अलग-अलग कार्यों में रत, अलग-अलग स्थान में गहरी अनुभव प्राप्त करते हुए विद्वत जनों द्वारा हिंदी साहित्य-- विश्व के अद्भुत व्यंग्य उपन्यास “ब्लैक होल डी इंडिका” पर गहरी आंतरिक स्थिति को चित्रित करने वाली समीक्षाओं का यह संकलन मौलिकता लिए हुए है और पीएचडी शोधार्थियों,साहित्य साधकों और आम पाठकों को वास्तविक साहित्य से परिचित कराने में निश्चित ही सफल होगा ।

              इस अवसर पर सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार गिरीश पंकज रायपुर ने कहा कि "ब्लैक होल डी इंडिका" विश्व स्तरीय विशिष्ट व्यंग्य उपन्यास है,जिसमें समाज के विविध पक्षों तथा समस्याओं को उधृत करते हुए न्याय प्रणाली के दूषित आयाम से आम जनता को होती परेशानियों तथा कष्टों का उल्लेख ही नहीं किया गया है बल्कि उसके समाधान की ओर दिशा निर्देश भी किया गया है । इस अवसर पर डाॅ.अनसूया अग्रवाल और डाॅ.अनिता सिंह ने भी सारगर्भित समीक्षा प्रस्तुत की । डॉ. अनिता सिंह ने कहा कि इसमें लेखक ने सामाजिक एवं पारिवारिक समस्याओं को दर्शित करते हुए इसे वैश्विक स्तर का व्यंग्य उपन्यास बना दिया है ।

 डाॅ.अनसूया अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि गजेन्द्र तिवारी की व्यंग्य की दृष्टि से कोई भी पक्ष अछूता नहीं रह पाया है । वार्तालाप शैली में बहुत ही सरल सहज भाषा शैली में लिखित यह उपन्यास अनूठा है । यह कृति हरिशंकर परसाई के स्तर के व्यंग्य कृतिकार सिद्ध करती है । उन्होंने आज की कटु सच्चाई को स्पष्ट किया है ।

इस अवसर पर गिरीश पंकज रायपुर ने अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि उन्हें गजेन्द्र तिवारी का आशीर्वाद मिला । लेखकों की भीड़ बहुत है पर सच्चे अर्थो में लिखने वाले बहुत कम हैं। गजेन्द्र तिवारी ऐसी ही पैनी लेखन के धनी थे । आज गंभीरता पूर्वक लेखन की आवश्यकता है । गजेन्द्र तिवारी ने टूटते बिखरते भारतीय समाज का रेखाचित्र खींचा और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी । उन्होंने न्याय व्यवस्था का सच्चा चित्र खींचा है । यह उद्धरणों का उपन्यास है। इसमें उद्धरणों के माध्यम से समाज को रेखांकित किया गया है । उपन्यास आशावाद की ओर ले जाता है।

कार्यक्रम का संचालन डाॅ.कीर्ति

तिवारी और डाॅ.वीरेन्द्र तिवारी ने किया एवं आभार प्रदर्शन डाॅ.वीरेन्द्र तिवारी ने किया । इस अवसर पर बिलासपुर, रायपुर सहित अन्य जिले के साहित्यकार उपस्थित थे ।

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