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उत्तर प्रदेश :- गाजियाबाद न्यूज : 'कभी अलविदा न कहना...हरीश राणा को कलेजे पर पत्थर रखकर अंतिम विदाई!' पैसिव इच्छामृत्यु में अंगदान संभव है?

Abhyuday Bharat News / Tue, Mar 17, 2026 / Post views : 197

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13 साल से कोमा में रह रहे हरीश राणा का AIIMS में पैसिव इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। माता-पिता कलेजे पर पत्थर रखकर अपने चिराग को अंतिम विदाई के इंतजार में हैं। ऐसे में उनका अंगदान भी किया जा सकता है।

नई दिल्ली: हरीश राणा की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में पूरी की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इसमें 15 से 30 दिन का वक्त लग सकता है। सुप्रीम कोर्ट से पैसिव इच्छामृत्यु की मंजूरी दिए जाने के बाद से उनकी एम्स के डॉक्टरों की निगरानी में यह प्रक्रिया पूरी होगी। हरीश राणा के परिजन भरे मन से कलेजे पर पत्थर रखकर उनकी अंतिम और गरिमामय विदाई का इंतजार कर रहे हैं। परिजन चाहते हैं कि इस दुनिया को अलविदा कहने के बाद भी हरीश कुछ लोगों में जिंदा रहें। उनके परिजन हरीश राणा के अंगदान की तैयारी में हैं। समझते हैं पूरी बात।


हरीश राणा के अंगदान के बारे में पिता ने पूछा था

  • संडे गार्जियन की एक रिपोर्ट में पड़ोसियों के हवाले से कहा गया है कि हरीश राणा के अंगदान के बारे में कुछ समय पहले ही उनके परिजनों ने फैसला ले लिया था। करीब ढाई साल पहले हरीश के पिता अशोक राणा ने राजनगर एक्सटेंशन रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के एग्जीक्यूटिव मेंबर दीपांशु मित्तल से इस बारे में बात भी की थी, जो अंगदान से जुड़ी संस्था दधीचि देहदान समिति से जुड़े हैं।

  • उस वक्त उन्होंने पूछा था कि क्या उनके बेटे का देहदान या अंगदान संभव हो सकता है। तब उन्होंने कहा था कि डॉक्टरों की एक टीम यह तय करती है कि क्या अंगदान संभव हो सकता है। यह मरीज की कंडीशन पर निर्भर करता है।


एम्स की टीम कर रही अंगदान को लेकर हरीश राणा की जांच

  • एक हादसे के बाद बीते 13 साल से कोमा में चल रहे हरीश राणा के अंगदान के लिए एम्स की एक टीम इन संभावनाओं की जांच कर रही है।

  • मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि हरीश राणा के किडनी, हार्ट, आंतें और पैंक्रियाज जैसे ऑर्गन अंगदान के लिए फिट पाए गए हैं। साथ ही आंखों की कॉर्निया और हार्ट के वॉल्व की भी जांच की जा रही है। परिवार की सहमति से कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार सभी जरूरी मेडिकल जांच के बाद अंगदान की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी।


भारत में हजारों लोगों को ऑर्गन की जरूरत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हजारों मरीज ऑर्गन हासिल करने की लाइन में हैं। खासतौर पर किडनी, लिवर या हार्ट की जरूरत काफी ज्यादा है। गंभीर मामलों में अंगदान किसी की जिंदगी बचा सकता है। यह हरीश राणा को दूसरी जिंदगी देने जैसा होगा।

एक अंगदान से 8 लोगों को मिलती है जिंदगी

organindia पर छपे आंकड़ों के अनुसार, एक अंगदान से 8 से ज्यादा लोगों को जिंदगी का तोहफा दिया जा सकता है। सभी अंग मरने के बाद दान किए जा सकते हैं। एक लिविंग डोनर किडनी या लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है।

क्या जीवित रहते कर सकते हैं अंगदान

रिपोर्ट के अनुसार, एक व्यक्ति के मरने के बाद उसके हार्ट, दोनों किडनी, दोनों फेफड़े, लिवर, पैंक्रियाज और छोटी आंत दान किए जा सकते हैं। वहीं, जीवित रहते ही अंगदान के लिए 1 किडनी या लिवर का कुछ हिस्सा दान किया जा सकता है।

क्या अंगदान कोई भी कर सकता है

अंगदान करने का फैसला किसी व्यक्ति का खुद कहा है। भारत में अगर आप ऑर्गन डोनर बनना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने परिवार को बताना होगा। अंगदान के लिए परिजनों की सहमति जरूरी है।

भारत में अंगदान की क्या है स्थिति

K-SOTTO के अनुसार,भारत में ऑर्गन डोनेसन रेट  बेहद कम है। यह हर 10 लाख की आबादी में करीब 0.52 से लेकर 0.86 है। 2024 में देश में 18,900 ट्रांसप्लांट्स किए गए थे। यह एक रिकॉर्ड है। इस मामले में भारत का नंबर तीसरा है।

सबसे ज्यादा अंगदान महिलाएं करती हैं, पुरुष

आंकड़ों के मुताबिक, 1 लाख से ज्यादा लोग अंग हासिल करने के लिए लाइन में लगे हैं। किसी के मरने के बाद अंगदान करने की दर काफी कम है, जबकि मांग बहुत ज्यादा है। ज्यादातर लोग जो अंगदान करते हैं, वो जीवित होते हैं। खासतौर पर करीब 80 फीसदी ऑर्गन डोनर महिलाएं होती हैं। वहीं, अंग प्राप्त करने वाले 80 फीसदी लोग पुरुष होते हैं।

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#uttarpradesh

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