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गाँव के नाम का इतिहास
करीब 70 साल पहले इस गाँव में एक महिला की रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। उस समय गाँववालों को शक था कि वह महिला “टोनही” (डायन) थी। इस अंधविश्वास के कारण गाँव का नाम “टोनाही नारा” पड़ गया। हालाँकि, आज के समय में यह नाम यहाँ के लोगों के लिए सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।
गाँव के लोग क्यों बदलना चाहते हैं नाम?
गाँव के निवासी, विशेष रूप से महिलाएँ, इस नाम को लेकर खुद को अपमानित महसूस करती हैं। छत्तीसगढ़ में परंपरा के अनुसार विवाह के बाद महिलाओं को उनके मायके के नाम से पहचाना जाता है। ऐसे में जब कोई महिला “टोनाही नारा” से आती है, तो उसे सामाजिक स्तर पर शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है।
गाँव के लोग इस नाम को बदलने की माँग को लेकर कई बार प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक अपनी अपील पहुँचा चुके हैं। वे चाहते हैं कि उनके गाँव को एक सम्मानजनक नाम मिले ताकि उनकी पहचान किसी अंधविश्वास से न जुड़े।
क्या कहता है कानून?
छत्तीसगढ़ में “टोनही प्रताड़ना अधिनियम 2005” के तहत किसी को “टोनही” कहना अपराध है। इसके तहत दोषियों को तीन साल की सजा और जुर्माना हो सकता है। ऐसे में गाँव के नाम में “टोनाही” शब्द होना भी कानूनी और सामाजिक रूप से अनुचित माना जा सकता है।
प्रशासन से उम्मीद
गाँव के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी माँग पर जल्द सुनवाई होगी और उन्हें एक ऐसा नाम मिलेगा, जिससे वे गर्व महसूस कर सकें, न कि अपमानित। अब देखना यह है कि सरकार इस पर कब तक कदम उठाती है।
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