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अराघची के बुधवार को यहां ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए पहुंचने की उम्मीद है। वहीं जहां तक भारत का सवाल है, उनकी यात्रा का मुख्य आकर्षण जयशंकर के साथ होने वाली द्विपक्षीय बातचीत ही मानी जा रही है। टीओआई ने 10 मई को रिपोर्ट दी थी कि ईरानी विदेश मंत्री का ब्रिक्स बैठक के लिए भारत आना लगभग तय है।
ईरान-अमेरिका के बीच टकराव के बीचअराघची का ये भारत दौरा बेहद अहममाना जा रहा। इस संघर्ष से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में ब्रिक्स की, और विशेष रूप से इसके मौजूदा अध्यक्ष भारत की, अधिक सक्रिय भूमिका की मांग करते रहे हैं। इस बैठक में, जयशंकर से उम्मीद की जा रही है कि वे ऊर्जा आपूर्ति में आई रुकावटों (जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे LPG टैंकर भी शामिल हैं) को लेकर भारत की चिंताओं को उठाएंगे।
जयशंकर और अराघची के बीच मुलाकात में चाबहार बंदरगाह से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। खासकर तब जब भारत के संचालन के लिए अमेरिका की ओर से दी गई प्रतिबंधों में छूट की अवधि समाप्त हो चुकी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को बताया कि भारत इस मुद्दे परईरान और अमेरिका, दोनों के संपर्क में है। यह संघर्ष अभी भी स्थिति को जटिल बनाए हुए है। जयशंकर के बुधवार को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी द्विपक्षीय बैठक करने की उम्मीद है।
सरकार ने मंगलवार को यह भी घोषणा की कि जयशंकर 14-15 मई को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे। भारत पश्चिम एशिया क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच मौजूद मतभेदों को पाटने का प्रयास करेगा, हालांकि इस चरण पर किसी संयुक्त बयान पर आम सहमति बन पाना मुश्किल ही लग रहा है।
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