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ABN NEWS :- देश दुनिया : लोन के नाम पर 43 शिक्षकों से करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़: 3 महीने की जांच के बाद अंतरजिला गिरोह के 5 आरोपी गिरफ्तार,

Abhyuday Bharat News / Thu, Jul 9, 2026 / Post views : 76

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लोन के नाम पर 43 शिक्षकों से करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़: 3 महीने की जांच के बाद अंतरजिला गिरोह के 5 आरोपी गिरफ्तार, लैपटॉप और चेकबुक समेत कई अहम दस्तावेज बरामद

कोंडागांव। जिले के फरसगांव और केशकाल थाना क्षेत्र में शिक्षकों को विभिन्न बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतरजिला संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर, डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार अब तक इस गिरोह ने 43 शिक्षकों को अपना शिकार बनाया है और उनसे करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। हालांकि कुछ पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि बदनामी और सामाजिक संकोच के कारण कई लोग अब भी सामने नहीं आए हैं। उनका दावा है कि जिले में 150 से 200 शिक्षक इस तरह की ठगी का शिकार हो सकते हैं।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, बैंक चेकबुक, एटीएम कार्ड, डायरी और रजिस्टर, लैपटॉप, डेस्कटॉप कंप्यूटर समेत अन्य महत्वपूर्ण बैंकिंग दस्तावेज जब्त किए हैं। इन सभी दस्तावेजों की जांच जारी है।

अन्य जिलों तक नेटवर्क फैले होने की आशंका

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों, बैंक एजेंटों और संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की ठगी को अंजाम दे चुका है। इसी कारण जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

बैंकिंग व्यवस्था पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले ने बैंकिंग प्रणाली की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के अनुसार एक बैंक से लिया गया लोन क्रेडिट रिकॉर्ड (CIBIL/Loan Database) में अपडेट होने में लगभग 6 से 7 दिन का समय लग जाता है। इसी अंतराल का फायदा उठाकर आरोपी पीड़ितों के नाम पर दो से तीन दिनों के भीतर अलग-अलग बैंकों से कई पर्सनल लोन स्वीकृत करा लेते थे।

ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सभी बैंकों के बीच रियल-टाइम क्रेडिट वेरिफिकेशन और लोन हिस्ट्री की तत्काल जांच की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए, ताकि एक ही व्यक्ति को कम समय में कई बैंकों से समानांतर लोन मिलने की संभावना समाप्त हो सके।

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