Tue, 28 Jul 2026
Logo

ब्रेकिंग

Paytm Payments Bank को दिल्ली हाईकोर्ट ने हमेशा के लिए बंद करने का दिया आदेश, RBI से पहले ही मिला है झटका

यूपी पुलिस में बड़ा फेरबदल, लखनऊ को मिला नया पुलिस कमिश्नर

WTC 2027 फाइनल की रेस में टीम इंडिया, श्रीलंका के खिलाफ जीत क्यों है अहम? जानिए पूरा समीकरण

नए शिक्षामंत्री पर प्रियंका गांधी के बयान पर हंगामा, रिजिजू बोले- चरित्र हनन किया, माफ़ी मांगे

कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर को ‘महतारी वंदन वसूली योजना’ का दिया नाम....

IND vs ZIM 3rd T20I: भारत ने तीसरे टी20 में जिम्बाब्वे को 35 रन से हराया, सीरीज 3-0 से की क्लीन स्वीप

Indian Idol 16 Winner : Jyotirmayee Nayak बनीं ‘इंडियन आइडल 16’ की विजेता, ट्रॉफी के साथ जीता लाखों का कैश प्राइज

वाराणसी के स्कूल में मासूम संग हैवानियत! टॉयलेट करने पर नर्सरी छात्र का प्राइवेट पार्ट गर्म चाकू से जलाने का आरोप

CJP आंदोलन का असर देख नेपाल सरकार के हाथ-पांव फूले, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी पेपर लीक मामले पर दी सफाई

फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर अरबों की ठगी ! 10 राज्यों से छत्तीसगढ़ पहुंचे 100 से अधिक निवेशक....

सूचना

: बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Admin / Sun, Feb 2, 2025 / Post views : 240

Share:

बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

 

हाइलाइट्स

  • बसंत पंचमी 2025 को 3 फरवरी को मनाई जाएगी.

  • माता सरस्वती की पूजा का विशेष महत्व है.

  • पीले वस्त्र और भोजन का विशेष महत्व है.

 माघ मास में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पावन पर्व मनाया जाता है. इस दिन से ही बसंत ऋतु की शुरुआत होती है इसी दिन माता सरस्वती के पूजन का विशेष विधान होता है. माना जाता है की माता सरस्वती का अवतरण बसंत पंचमी के दिन हुआ था. माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान की देवी माना जाता है. कहते हैं कि ब्रह्मा जी ने इस दिन मां सरस्वती को प्रकट किया था. मां सरस्वती कमल के फूल पर बैठी हुई और चार हाथों वाली थीं. एक हाथ में वीणा, दूसरे हाथ में किताब, तीसरे में माला और चौथे हाथ में वर मुद्रा में थीं. तब ब्रह्मा जी ने उनका नाम ‘सरस्वती’ रखा. इस दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है. इस दिन कोई भी नवीन कार्य करने के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है. आई बसंत पंचमी पर शुभ मुहूर्त पूजा विधि के बारे में जानते हैं.

बसंत पंचमी मुहूर्त : पंचांग के अनुसार इस वर्ष पंचमी तिथि 2 फरवरी को सुबह 9:14 से शुरू हो रही है और 3 फरवरी को 6:52 तक रहेगी. उदयातिथि सिद्धांत के अनुसार बसंत पंचमी 3 फरवरी को मनाना श्रेष्ठ होगा. देश के अलग-अलग हिस्सों में 2 फरवरी और 3 फरवरी दोनों ही दिन बसंत पंचमी स्थानीय समय के आधार पर मनाई जाएगी.

पूजा विधि : बसंत पंचमी पूजा के लिए प्रातः काल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करके पूजा स्थल में एक चौकी पर पीला कपड़ा बेचकर उसे पर मां सरस्वती की प्रतिमा अथवा चित्र को स्थापित करें. तत्पश्चात कलर्स भगवान श्री गणेश और नवग्रह पूजन कर मां सरस्वती की पूजा करें.

बसंत पंचमी, सनातन परंपरा में माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला एक पवित्र पर्व है। इस दिन लोग बसंत ऋतु के स्वागत के साथ ही विद्या, संगीत और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। यह दिन ज्ञान, बुद्धि और रचनात्मकता के प्रति समर्पण का उत्सव है।

बसंत पंचमी 2025 कब है?

दृक पंचांग के अनुसार इस बार बसंत पंचमी की शुरुआत 2 फरवरी को सुबह 9 बजकर 14 मिनट पर हो रही है, जबकि बसंत पंचमी का समापन अगले दिन 3 फरवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट पर होगा। ऐसे में बसंत पंचमी का पर्व 3 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा।

 

बसंत पंचमी का महत्व

बसंत पंचमी का महत्व प्राचीन काल से चला आ रहा है। यह पर्व प्रकृति के नवजीवन और सृजनशीलता को दर्शाता है। देवी सरस्वती को हिंदू धर्म में ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना गया है। इस दिन देश भर में माँ सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा की जाती है। विशेष रूप से स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में इस दिन का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है।

ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, बसंत पंचमी फरवरी महीने में आती है। इस पर्व के पीछे यह मान्यता है कि इस दिन किए गए सभी शुभ कार्य सफल होते हैं। माँ सरस्वती की पूजा से जीवन में सकारात्मकता और समृद्धि का आगमन होता है। यही कारण है कि इस दिन बच्चों को शिक्षा की शुरुआत के लिए गुरुकुलों में प्रवेश दिलाया जाता है।

अनुष्ठान और रीति-रिवाज

बसंत पंचमी के दिन विभिन्न रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। घरों और मंदिरों को पीले फूलों से सजाया जाता है, जो बसंत की जीवंतता और उल्लास का प्रतीक है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले रंग के व्यंजनों का भोग लगाते हैं। माँ सरस्वती की मूर्ति के सामने दीप प्रज्वलित कर पुष्प, अक्षत और पीले फल अर्पित किए जाते हैं। इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।

 

सांस्कृतिक महत्व

बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति की समृद्धता को भी दर्शाता है। इस दिन संगीत, नृत्य और कविता पाठ के माध्यम से रचनात्मकता और अभिव्यक्ति का उत्सव मनाया जाता है। शैक्षणिक संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें माँ सरस्वती की वंदना, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रतियोगिताएं शामिल होती हैं।

पूजा विधि

बसंत पंचमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। इसके बाद पीले वस्त्र धारण करें, क्योंकि यह रंग माँ सरस्वती को प्रिय है। पूजा के लिए चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। माँ को पीले वस्त्र अर्पित करें और हल्दी, अक्षत, चंदन, केसर और पीले फूलों से पूजा करें। घी का दीपक जलाएं और सरस्वती वंदना गाकर आरती करें। अंत में पीली मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद बांटें।

सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥

या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्‌॥

हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्‌।

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्‌॥

प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs):-

प्रश्न: बसंत पंचमी कब है?

उत्तर: साल 2025 में बसंत पंचमी 2 फरवरी को मनाई जाएगी।

प्रश्न: बसंत पंचमी में किसकी पूजा की जाती है।

उत्तर: बसंत पंचमी में बुद्धि, कला और ज्ञान की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।

प्रश्न: बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती को किस चीज का भोग लगाते हैं?

उत्तर: बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती को पीले लड्डू या पीली मिठाई का भोग लगाते हैं

 

Tags :

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

जरूरी खबरें

विज्ञापन

Advertisement
Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

विज्ञापन

Advertisement

Related Posts