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दुर्ग जिले में एक लाख से अधिक राशन कार्डों में खामियों की सूचना मिलने के बाद राज्य सरकार ने खाद्य विभाग को सत्यापन के निर्देश दिए थे। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि जिले में लगभग 16 हजार सदस्यों के नाम राशन कार्ड सूची से हटाए गए हैं।
इन दिनों खाद्य विभाग के कार्यालयों में ऐसे हितग्राहियों की भीड़ देखी जा रही है, जिनके नाम राशन कार्ड से हटा दिए गए हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण आधार और ई-केवाईसी अपडेट न होना, परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु, अथवा पलायन कर अन्य शहरों में बस जाना है। कई मामलों में पिछले माह का राशन नहीं मिलने के कारण हितग्राही अब नाम जुड़वाने के लिए भटक रहे हैं। हितग्राहियों का कहना है कि यदि परिवार के किसी एक सदस्य का भी केवाईसी अपडेट नहीं है, तो पूरे परिवार को राशन से वंचित किया जा रहा है।
इस संबंध में जिला खाद्य नियंत्रक अधिकारी अनुराग भदौरिया ने बताया कि सत्यापन के दौरान कोई फर्जी राशन कार्ड नहीं पाए गए हैं। नाम काटे जाने का कारण पात्रता से जुड़ी शर्तें हैं। इनमें वे लोग शामिल हैं जिनकी ई-केवाईसी अपडेट नहीं थी, जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो पलायन कर चुके हैं, या फिर जिनकी वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक है अथवा जिनका जीएसटी टर्नओवर 25 लाख रुपये से ऊपर है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी हितग्राही को लगता है कि वह पात्र है, तो आवश्यक दस्तावेजों के साथ ई-केवाईसी अपडेट कराकर खाद्यान्न योजना का लाभ पुनः प्राप्त कर सकता है। जिला प्रशासन द्वारा उचित मूल्य दुकानों और समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों को आधार और ई-केवाईसी समय पर अपडेट कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है, ताकि वास्तविक पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सके।
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