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: छतीसगढ़ : स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदोन्नति हुई रॉकेट साइंस से भी ज्यादा कठिन , प्राचार्य पदोन्नति न होना महज इत्तेफ़ाक या फिर साजिश ...?

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  • छत्तीसगढ़  : स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदोन्नति हुई रॉकेट साइंस से भी ज्यादा कठिन

  • छत्तीसगढ़ प्रदेश में प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया अपने आप में  एक अनोखी अनसुलझी पहेली बनी हुई है|

  • प्राचार्य पदोन्नति की अबूझ प्रक्रिया जारी है, जो शायद चिर-अनंत काल तक जारी रहने वाली है| 

  • जैसे कोई बिना इंजन के रेल चल रही हो , वैसे ही छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में बिना इंजन रूपी पूर्णकालिक प्राचार्य के स्कूल रूपी रेलगाड़ी चल रही है | 

  • स्कूल शिक्षा विभाग में लगभग 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य के पद रिक्त...

  • टी संवर्ग में वर्ष 2013 एवं ई संवर्ग  में 2016 के बाद से नहीं हुई है प्राचार्य पद पर पदोन्नति

रायपुर- 

"छत्तीसगढ़ प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में विगत 11 वर्षो से 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में प्राचार्य के रिक्त पदों पर पात्रता रखने वाले नियमित व्याख्याता तथा प्रधान पाठक माध्यमिक शाला (स्नातकोत्तर प्रशिक्षित) की प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं हुई हैं। 

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 11 वर्षों से प्राचार्य पद पर पदोन्नति किये जाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय छतीसगढ़ के द्वारा प्रतिवर्ष व्याख्याता तथा प्रधान पाठक माध्यमिक शाला (स्नातकोत्तर प्रशिक्षित) से CR, गोपनीय चरित्रावली,  कार्य निष्पादन प्रपत्र एवं अचल सम्पत्ति की जानकारी मंगाई जाती है| 

जिसे प्रतिवर्ष सम्बंधित व्याख्याता तथा प्रधान पाठक माध्यमिक शाला (स्नातकोत्तर प्रशिक्षित) के द्वारा अपने अपने जिलों में संस्था प्रमुखों के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में जमा किया जाता है जिसे संकलित कर सभी DEO द्वारा संभागीय सयुंक्त शिक्षा संचालक एवं संचालक लोक शिक्षण संचालनालय छतीसगढ़ में जमा किया जाता है | 

शासन के नियमानुसार अन्य विभागों की तरह प्रतिवर्ष कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची जारी कर रिक्त पदों पर पदोन्नति दिया जाना चाहिए, किन्तु संभवतः प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग में प्राचार्य पदोन्नति नहीं किया गया है | 

जैसे कोई बिना इंजन के रेल चल रही हो , वैसे ही छतीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में बिना इंजन रूपी पूर्णकालिक प्राचार्य के स्कूल रूपी रेलगाड़ी चल रही है | 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लोक शिक्षण संचालनालय छतीसगढ़ के द्वारा प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया जारी होना बताया जा रहा है | 

प्राचार्य पदोन्नति की प्रक्रिया अपने आप में  एक अनोखी अनसुलझी पहेली बनी हुई है| ऐसी प्रक्रिया जो पिछले 11 वर्षों से पूर्ण न होकर आजतक अनवरत रूप से जारी है |

 

प्राचार्य पदोन्नति न होना महज इत्तेफ़ाक या फिर साजिश ...?

छत्तीसगढ़ प्रदेश में वर्षों से प्राचार्य पदोन्नति न होना महज इत्तेफ़ाक या फिर साजिश है, 

जबकि प्राचार्य पद को छोड़ कर नीचे पदक्रम के शिक्षक पदों पर एवं प्रधान पाठक, प्राथमिक शाला, माध्यमिक शाला में पदोन्नति दिया गया है| वहीं केवल शिक्षक से व्याख्याता पद पर तथा व्याख्याता / प्रधान पाठक से प्राचार्य पद पर पदोन्नति नहीं किया गया है | बताया जाता है कि प्राचार्य पद प्रशासनिक पद है एवं उपसंचालक / जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर प्राचार्य को ही पदोन्नत किया जाता है |

वहीं शिक्षा जगत के गलियारों में चर्चा है कि वर्षों से स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री निवास, राज्य कार्यालय में अपनी जड़े जमा कर बैठे मठाधीश लोग नहीं चाहते कि प्राचार्य से उपसंचालक जैसे प्रशासनिक पदों पर किसी और को कार्य करने का मौका मिले, जिससे शिक्षा की दलाली कर रहे लोगों की दुकानदारी सतत रूप से चलती रहे | शायद यहीं कारण है कि प्राचार्य पद पर योग्य लोगो को आने से रोका जा रहा है, क्योंकि यदि सैकड़ों की संख्या में पूर्णकालिक प्राचार्य पद पर पदोन्नति होने से योग्य व्याख्याता / प्रधान पाठक लोगों को आगे आकर कार्य करने का अवसर मिलेगा | 

छतीसगढ़ में प्राचार्य पदोन्नति होने से स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत राज्य स्तर के प्रमुख कार्यालयों - लोक शिक्षण संचालनालय, समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय, SCERT, माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड कार्यालय, राज्य ओपन स्कूल कार्यालय, राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण सहित संभागीय कार्यालय, जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालयों सहित शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में वर्षों से काई की तरह जमें लोगों के स्थान पर नए योग्य, ईमानदार लोगों को कार्य करने का अवसर मिल सकेगा |   

बताया जाता हैं कि संभवतः शासन के अन्य विभागों की तुलना में स्कूल शिक्षा विभाग में प्रभारवाद ज्यादा हावी है। छत्तीसगढ़ राज्य के 33 जिले में से आधे से ज्यादा जिले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (incharge DEO) कार्यरत हैं. इसी प्रकार 146 विकास खण्ड में से 50 से अधिक विकास खण्ड में प्रभारी BEO कार्यरत है, जिनमें से अधिकांश कनिष्ठ प्राचार्य है अथवा व्याख्याता है, कई विकास खण्ड में व्याख्याता (एल.बी.) को भी प्रभारी BEO बनाया गया है। इसी प्रकार विभिन्न जिले में जिला मिशन समन्वयक (DMC) समग्र शिक्षा के पदों में भी कनिष्ठ प्राचार्य, व्याख्याता अथवा व्याख्याता (एल.बी.) कार्यरत है।

ये उल्लेखनीय है कि यदि शासन द्वारा नियत समय पर पात्रताधारी व्याख्याता / प्रधान पाठकों को प्राचार्य पद पर पदोन्नति की जाती तो स्कूल शिक्षा विभाग में बहुत हद तक प्रभारवाद से मुक्ति मिल सकती थी, क्योंकि प्राचार्य पद से ही जिला शिक्षा अधिकारी/ उप संचालक पद पर आगे पदोन्नति होती हैं। इससे स्कूल शिक्षा विभाग के DEO, DMC, BEO, सहायक संचालक जैसे महत्वपूर्ण सभी पदों पर पूर्णकालिक अधिकारी पदस्थ होते। इसी प्रकार प्राचार्य संवर्ग से उप संचालक/ जिला शिक्षा अधिकारी के पदों पर भी नियत समय अनुसार पदोन्नति होने से सभी जिले में पूर्णकालिक जिला शिक्षा अधिकारियों की पदस्थापना की जा सकती थी, इससे स्कूल शिक्षा विभाग के सभी महत्वपूर्ण पदों पर पूर्णकालिक अधिकारियों के पदस्थ होने से प्रदेश की समूची शिक्षा व्यवस्था बेहतर और सुदृढ़ होती।

 

बताया जाता है कि पिछले 11 वर्षों से पदोन्नति नहीं होने से सैकड़ों "टी" एवं "ई" संवर्ग के व्याख्याता तथा प्रधान पाठक सेवानिवृत हो चुके है एवं अनेको व्याख्याता तथा प्रधान पाठक प्राचार्य पदोन्नति का रास्ता देखते - देखते स्वर्ग सिधार गये | लेकिन प्राचार्य पदोन्नति की अबूझ प्रक्रिया जारी है, जो शायद चिर-अनंत काल तक जारी रहने वाली है| 

मामले पर चर्चा है कि अपनी पदोन्नति को लेकर अनेकों बार स्कूल शिक्षा विभाग के "टी" एवं "ई" संवर्ग के व्याख्याता तथा प्रधान पाठकों ने मुख्यमंत्री से लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री , स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, संचालक लोक शिक्षण संचालनालय तथा विभागीय उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर अनेकों बार ज्ञापन सौंप कर प्राचार्य पदोन्नति के लिए मांग की, किंतु सरकार के द्वारा प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के समुचित सुधार के लिए बेहद जरूरी इस प्राचार्य पदोन्नति की मांग को तरजीह नहीं दी गई, नतीजा हर वर्ष सैकड़ों की संख्या में व्याख्याता तथा प्रधान पाठक बिना प्राचार्य पदोन्नति के सेवानिवृत होते चले गए, अनेकों व्याख्याता तथा प्रधान पाठक प्राचार्य बनने का सपना लिए स्वर्ग सिधार गए। नतीजा प्रदेश के सैकड़ों शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल प्राचार्य विहीन रह गए , जहां वर्तमान में   प्रभारी के भरोसे काम चलाया जा रहा हैं| स्कूल शिक्षा विभाग में विगत 11 वर्षो से प्राचार्य पदोन्नति नहीं होने के कारण 3500 से अधिक शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल प्राचार्य विहीन हैं, जहां प्रभारियों के भरोसे काम चलाया जा रहा हैं। प्रदेश के 3500 से अधिक स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य के नहीं होने से प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था तथा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही हैं।

वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि प्राचार्य पद पर पदोन्नति देने से शासन को कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आयेगा , क्योंकि पदोन्नति प्राप्त करने वाले सभी व्याख्याता तथा प्रधान पाठक वर्तमान में प्राचार्य पद का ही वेतन और पे स्केल प्राप्त कर रहें हैं।

सरकार को चाहिए कि  प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में समुचित सुधार के लिए तथा प्राचार्य विहीन समस्त हाई स्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पूर्णकालिक प्राचार्य की पदस्थापना के लिए प्राचार्य पदोन्नति की सम्पूर्ण विभागीय कार्यवाही को शीघ्र पूर्ण कर प्राचार्य पदोन्नति का आदेश जारी किया जाना चाहिए ताकि प्राचार्य विहीन स्कूलों को पूर्णकालिक प्राचार्य मिल सकें |  प्रदेश के समस्त शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में  प्राचार्य के रिक्त पदों पर पात्रता अनुसार  व्याख्याता / प्रधान पाठकों की पदोन्नति होने से प्रदेश की समूची शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो सकेगी। 

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