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: खेल एवं युवा कल्याण विभाग पर पदोन्नति घोटाला, जिस खेल को शासन से मान्यता प्राप्त नहीं, उसके प्रमाण पत्र के सहारे बन बैठे खेल अधिकारी ?

Admin / Mon, Oct 14, 2024 / Post views : 281

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ABN EXPRESS NEWS 24x7 एक्सक्लूसिव न्यूज़

बिलासपुर – छत्तीसगढ़ प्रदेश खेल एवं युवा कल्याण विभाग पर अधिकारी – कर्मचारियों ने मिलकर गजब का कारनामा कर दिखाया है. विभाग पर अनुकंपा नियुक्ति से नौकरी की शुरुआत करने वाले व्यक्तियों ने खेल के मैदान पर भले ही खिलाड़ी न बने हो लेकिन (राज्य शासन एवं भारत सरकार से बगैर मान्यता प्राप्त वाला खेल ) के दस्तावेज के सहारे पदोन्नति के रेस पर खेला करके खेल अधिकारी बन बैठे हैं. खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत करने के बाद भी अब तक कार्यवाही नहीं किया गया है. जो कि मामले पर जांच हेतु नियुक्त अधिकारी कि मंशा को सवालों के कटघरा पर खड़ा करता है.

 
  • खेल एवं युवा कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ पर पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर विवाद की स्थिति बनी है. वही कुछ नियुक्ति को लेकर आरोप लगाया जा रहा है कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने चहेते कर्मचारियों को योजनाबद्ध तरीके से खेल अधिकारी बना दिया है. पूरे मामले को लेकर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी जिला रायपुर निवासी एस. सी.जैन ने साक्ष्य एवं प्रमाण के साथ विभाग के संचालक एवं अन्य अधिकारियों को लिखित शिकायत किया है उन्होंने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय थ्रो बॉल के प्रमाण पत्र को संचालनालय के द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है. एवं इस खेल को भारत सरकार खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय नई दिल्ली के द्वारा भी मान्यता प्राप्त नहीं है. ऐसी स्थिति में जिस खेल को छत्तीसगढ़ शासन एवं भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है उस खेल प्रमाण पत्र से खेल अधिकारी कैसे बनाया जा सकते हैं
 
  • शिकायतकर्ता ने शिकायत आरोप पत्र के साथ जो दस्तावेज जमा किए हैं उसके अनुसार सुशील कुमार अमलेश कि प्रथम अनुकंपा नियुक्ति सहायक ग्रेड -3 के पद पर दिनांक 05-05-2011 को हुई थी. श्री अमलेश का सेवा में नियुक्ति के पूर्व एवं बाद में खेल से कोई संबंध नहीं रहा. वही उनके द्वारा पदोन्नति के समय अखिल भारतीय सिविल सेवा कबड्डी प्रतियोगिता मे भाग लेने का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया. जिसके आधार पर उन्हें खेल अधिकारी के पद पर नियुक्ति दी गई है. शिकायतकर्ता का दावा है कि सिविल सेवा प्रतियोगिता कि छत्तीसगढ़ में कोई खेल इकाई नहीं है. एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी कोई इकाई या संस्था नहीं है अतः नियमानुसार किसी प्रतियोगिता में प्रमाण पत्र नियुक्ति के लिए मान्य नहीं है
 
  • वही दूसरा आरोप गिरीश शुक्ला कि पदोन्नति के खिलाफ लगाया गया है. प्राप्त दस्तावेज के अनुसार उनकी प्रथम नियुक्ति दिनाँक 20-09-2011 को डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर हुई थी वह संचालनालय में अनुदान शाखा के प्रभारी थे. आरोप है कि श्री शुक्ला के द्वारा छत्तीसगढ़ थ्रोबाल संगठन एसोसियेसन के सचिव से मिलकर एक बार राज्य के दल में सम्मिलित कर लेने का निवेदन किया गया. जिससे उन्हें अखिल भारतीय सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने का प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाए. जिससे कि वह खेल अधिकारी की नियुक्ति हेतु पात्र हो जाएंगे. चुकी थ्रो बॉल खेल एक टीम गेम है अतः संस्था के पदाधिकारी ने इनका नाम बिना खेल कि योग्यता रखते हुए राज्य के दल में नाम डालकर उन्हें गलत तरीके से प्रमाण पत्र दिलाने की मदद की गई.
इस प्रकार खेल एवं युवा कल्याण विभाग पर पदोन्नति के दरमियान गलत तरीके से खेल का प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर खेल अधिकारी के पद पर नियुक्ति प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है.बहरहाल देखना होगा कि मामले पर जांच अधिकारी कब तक जांच पूरी कर पाते हैं. समाचार के अगले अंक पर पाठको को बताएंगे कि इसी विभाग पर पदोन्नति को लेकर एक शिकायत किया गया था जो जांच 12 साल तक चला और निष्कर्ष पर जाँच अधिकारी ने शिकायत सही पाया रहा. लेकिन अब मामला दाखिले दफ्तर हो चुका है. क्रमशः 3 अभ्युदय भारत न्यूज़ (संतोष साहू )

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