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छत्तीसगढ़ न्यूज़ : हिंदू रीति-रिवाज को अपनाने वाले एसटी को हिंदू मैरिज एक्ट से बाहर नहीं किया जा सकता, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला

Abhyuday Bharat News / Fri, Mar 6, 2026 / Post views : 147

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने जगदलपुर फैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत एक दंपति को हिंदू मैरिज एक्ट के तहत तलाक की याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू परंपराओं को मानने वाले एसटी समुदाय को हिंदू मैरिज एक्ट से बाहर नहीं रखा जा सकता है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं को मानने वाले एसटी समुदाय के लोगों को हिंदू मैरिज एक्ट ,1955 के नियमों से बाहर नहीं रखा जा सकता है। जस्टिस संजय के अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच ने अपने फैसले में कहा है।


फैमिली कोर्ट के आदेश को किया रद्द

दरअसल, सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को भी रद्द कर दिया है, जिसमें एक आदिवासी पति और एसटी समाज की पत्नी की आपसी सहमति से तलाक की याचिका को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद कपल ने हाईकोर्ट का रूख किया था।

फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए गए थे दोनों

इस कपल की शादी 15 अप्रैल 2009 को हुई थी। अप्रैल 2014 से दोनों अलग रह रहे थे। इसके बाद हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 13बी के तहत अपनी शादी खत्म करने के लिए बस्तर के जगदलपुर स्थित फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जगदलपुर फैमिली कोर्ट ने पिछले साल 12 अगस्त को एक्ट के सेक्शन 2 (2) का हवाला देते हुए उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। साथ ही कहा था कि यह एक्ट एसटी पर तब तक लागू नहीं होता, जब तक केंद्र नोटिफिकेशन के लिए जरिए कोई और निर्देश न दे।


हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी शादी

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने कहा कि उनकी शादी हिन्दू रीति रिवाजों से हुई थी। इसमें सप्तपदी की रस्म भी शामिल थी। दोनों ने कहा कि हमने आदिवासी रीति-रिवाजों के बजाए हिंदू परंपराओं का पालन किया है।

दलीलें सुनने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी जनजाति के सदस्य अपनी मर्जी से हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करते हैं तो उन्हें 1955 के एक्ट के नियमों के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता है।


बाहर करने के लिए नहीं है यह

डबल बेंच ने यह भी कहा कि धारा2(2) जनजातीय प्रथागत कानूनों की सुरक्षा के लिए है, न कि उनलोगों को बाहर करने के लिए जिन्होंने हिंदू परंपराएं अपना ली हैं। साथ ही हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। कहा कि यदि प्रमाण से यह साबित होता है कि आदिवासी हिंदू परंपराओं का पालन कर रहे हैं तो विरासत और विवाह से जुड़े मामलों में उन पर हिंदू कानून लागू होगा।

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