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नई दिल्ली: भारत ने अमेरिका से मांग की है कि रूस से 'प्रतिबंधित' तेल खरीदने पर छूट की मियाद बढ़ा दिया जाए। भारत की ओर से अमेरिका से यह अनुरोध पश्चिम एशिया संकट के जल्द नहीं सुलझने के आसार को देखते हुए किया गया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध की शुरुआत के लगभग 11 हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन फारस की खाड़ी में लंगर डाले खड़े व्यापारिक जहाजों और तेल-गैस टैंकरों का तांता लगा ही हुआ है।
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने की छूट की मियाद पहले मार्च तक बढ़ाई थी। फिर उसने इसे बढ़ाकर 16 मई तक कर दिया। अब यह समय भी खत्म हो रहा है। अमेरिका ने भारत पर यूक्रेन यु्द्ध की वजह से पहले यह दबाव बनाया था कि वह रूस से किफायती कीमत वाला कच्चा तेल खरीदना बंद कर दे। क्योंकि, अमेरिका का आरोप रहा है कि इन पैसों का रूस यूक्रेन से युद्ध में इस्तेमाल करता है।
इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया है किपश्चिम एशिया संकटखत्म होने की कोई संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है, ऐसे में भारत ने अमेरिका से साफ कर दिया है कि तेल-गैस की सप्लाई प्राथमिकता बनी हुई है और अगरतेल बाजार में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रही तो इसके व्यापक परिणामहोंगे।
इन मामलों की जानकारी रखने वालों ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर कहा कि 1.4 अरब भारतीय पहले ही गैस की किल्लत झेल रहे हैं।
भारतीय तेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने इसपर और अधिक सूचना मांगे जाने पर जवाब नहीं दिया।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भी ई-मेल से पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
इस दौरान भारत में रूसी तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर है, क्योंकि तेल कंपनियां छूट की मियाद खत्म होने से पहले ज्यादा से ज्यादा सप्लाई मंगवा लेना चाह रही हैं।
Kpler के डेटा के मुताबिक मई में रोजाना रूसी तेल की खरीद कुल 2.3 मिलियन बैरल के अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच गया है। (ब्लूमबर्ग के इनपुट पर आधारित )
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