ब्रेकिंग
सूचना
Abhyuday Bharat News / Fri, May 15, 2026 / Post views : 6
इंदौर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार की कमालमौला मस्जिद या भोजशाला विवाद में फैसला सुना दिया है। हिंदू पक्ष की मांग मंजूर करते हुए कोर्ट ने माना कि एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला मंदिर है।इसके बाद धार और इंदौर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। फैसले पर हिंदू पक्ष ने खुशी जताई है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
वहीं, इस फैसले पर हिंदू फ्रंट ऑफ जस्टिस के विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने की मंजूरी दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को कहा है कि मुस्लिम पक्ष अगर चाहे तो सरकार उन्हें अलग से मस्जिद के लिए जमीन दे सकती है।
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष की मांग मंजूर कर ली है। साथ ही हिंदू पक्ष को पूजा-पाठ की अनुमति दे दी है। पूरा भोजशाला परिसर हिंदुओं का होगा। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि हम इस फैसले को स्वीकार नहीं करते हैं।
कोर्ट ने सरकार को कहा है कि लंदन से वाग्देवी की प्रतिमा को लाकर भोजशाला में स्थापित करें। परिसर पर पूरा अधिकार हिंदुओं का होगा।
गोपाल शर्मा, हिंदू पक्ष
ये थे दोनों के पक्ष के दावे
दरअसल, भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद बताता था। इसी विवाद को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई थीं जिन पर लंबे समय से सुनवाई चल रही थीं। अब सभी पक्षों को 12 मई तक सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।
वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) कोभोजशाला परिसरका वैज्ञानिक सर्वे करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एएसआई ने करीब 98 दिनों तक परिसर और आसपास के क्षेत्र में विस्तृत सर्वे किया था। सर्वे के दौरान जीपीआर तकनीक, कार्बन डेटिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी सहित कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। परिसर में खुदाई कर मिट्टी के नमूने भी लिए गए थे। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी जिसके आधार पर दोनों पक्षों की लगातार सुनवाई हुई।
6 अप्रैल 2026 से मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई थी जो करीब 24 दिनों तक चली। 12 मई को अंतिम सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की संयुक्त पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इस दौरानहिंदू और मुस्लिम पक्षोंने दलीलें दी थीं। मुस्लिम पक्ष की ओर वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद दलीलें दे रहे थे।
फैसले के दिन शुक्रवार होने के कारण प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है क्योंकि परंपरा के अनुसार शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक भोजशाला परिसर मेंनमाज अदा करने की अनुमतिरहती है। इसी को देखते हुए परिसर में बैरिकेडिंग की गई है और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
फैसले के बाद प्रशासन ने सोशल मीडिया पर भी विशेष निगरानी शुरू कर दी है। अफवाह फैलाने वालों और भ्रामक पोस्ट डालने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।
वहीं, धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने नागरिकों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही धार एसपी सचिन शर्मा ने भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है। पुलिस प्रशासन ने भोजशाला परिसर सहित पूरे शहर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। करीब 1500 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में पुलिस की विशेष निगरानी रखी जा रही है।
भोजशाला पर दोनों पक्ष के लोगों अपना दावा ठोक रहे थे। सात अप्रैल 2003 को इस मामले में बड़ा फैसला आया है। इसमें कहा गया कि हिंदू पक्ष के लोग यहां हर मंगलवार को पूजा करेंगे। वहीं, मुस्लिम पक्ष के लोग हर शुक्रवार को नमाज अदा करेंगे। आम दिन यह पर्यटकों के लिए रहेगा। वे एक रुपए की शुल्क देकर परिसर में जा सकते हैं।
2022-23 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर यह मांग की कि पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करवाया जाए। साथ ही हिंदू पक्ष के लोगों को पूजा की अनुमति दी जाए।
याचिका पर सुनवाई के बाद 11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने एएसआई को निर्देश दिए क वह ज्ञानवासी की तर्ज पर भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करें।
22 मार्च 2024 को एएसआई की टीम ने भोजशाला परिसर में खुदाई और सर्वे का काम शुरू किया।
मुस्लिम पक्ष ने अपने अप्रैल 2024 में इसे रोकने की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे से रोकने से इनकार कर दिया। साथ ही बिना सर्वे के स्मारक के धार्मिक स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
15 जुलाई 2024 को एएसआई ने 2100 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी।
गौरतलब है कि सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने मजबूत के साथ मंदिर होने के सबूत पेश किए थे। वहीं, मुस्लिम पक्ष के लोग इसे नकारते रहे हैं। साथ ही मुस्लिम पक्ष के लोगों ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट को तथ्यहीन बताया था। सभी दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में 12 मई तक आखिरी सुनवाई की थी।
Tags :
#breking news
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन