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Abhyuday Bharat News / Mon, Nov 17, 2025 / Post views : 177
गरियाबंद जिले में अंधविश्वास का एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां तीन दिनों के भीतर तीन सगे भाई-बहनों की मौत हो गई। बच्चों की उम्र 8, 7 और 4 वर्ष थी। तीनों मासूम बुखार से पीड़ित थे, लेकिन परिवार ने उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और झोलाछाप उपचार के भरोसे छोड़ दिया। समय पर इलाज न मिल पाने के कारण तीनों की एक-एक कर मौत हो गई। घटना जिले के मैनपुर ब्लॉक के धनोरा गांव का है।जानकारी के अनुसार परिवार हाल ही में साहेबिनकछार मक्का तोड़ने गया था, जहां बच्चों को तेज बुखार आया। शुरुआत में स्थानीय झोलाछाप ने दवाइयां दीं, पर जब हालत बिगड़ने लगी तो परिवार पारंपरिक झाड़-फूंक में लग गया। इस दौरान बच्चों को न तो प्राथमिक उपचार मिला और न ही अस्पताल ले जाया गया। सबसे बड़े बच्चे को अमलीपदर अस्पताल लाया गया, लेकिन वहां उसने दम तोड़ दिया।



दूसरा बच्चा देवभोग इलाके के एक कथित झोलाछाप के पास ले जाते समय रास्ते में ही चल बसा। दो मौतों के बाद भी परिवार नहीं संभला और तीसरे बच्चे को फिर झाड़-फूंक कराने ले जाया गया, जहां उसकी भी जान चली गई। बताया जा रहा है कि धनोरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बीमारी के बाद अस्पताल से पहले बैगा-गुनिया और झोलाछाप के पास जाने की पुरानी प्रवृत्ति अब जानलेवा साबित हो रही है।ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र दूर होने, एंबुलेंस की देरी और डॉक्टरों की अनुपलब्धता उन्हें गलत उपचार की ओर धकेलती है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि टीम ने पहले ही दिन गांव पहुंचकर बच्चों को अस्पताल भर्ती कराने कहा था, लेकिन परिजनों ने मना कर दिया और बच्चों को झाड़ फूंक के बहाने मौत के मुंह में धकेल दिया।
झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई
इस मामले को लेकर सीएमएचओ डॉ. नवरत्ने ने बताया कि झाड़-फूंक करने वालों और झोलाछापों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मैनपुर के बीएमओ डॉ. गजेन्द्र ध्रुव ने स्वीकार किया कि क्षेत्र में अंधविश्वास गहराई से फैला है और इसी कारण समय पर चिकित्सा नहीं मिल पाती। विभाग पूरे ब्लॉक में विशेष जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी में है। फिलहाल तीन मासूमों की मौत ने सिस्टम, समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था सभी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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