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सूचना

MUNGELI NEWS : GSS एवं SDDPS के तत्वाधान में विचार गोष्ठी एवं सतनाम धर्म दीक्षा कार्यक्रम संपन्न हुआ।

Abhyuday Bharat News / Thu, Oct 30, 2025 / Post views : 332

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गुरुघासीदास सेवादार संघ (GSS) की मित्र संस्था सतनाम धर्म दीक्षाप्रदाय व प्रचार संस्थान (SDDPS) दिनांक 26- 10-2025 को ग्राम - चिरहुला जिला मुंगेली(छ.ग.),में संपन्न हुआ।

इस कार्यक्रम में साहेब लखन सुबोध(केंद्रीय संयोजक-गुरुघासीदास सेवादार संघ (GSS) एवं ( संरक्षक SDDPS), पास्टर अनिसचरण (सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्रिश्चियन कम्युनिटी बिलासपुर (छ. ग़.), साहिबाश्रीमती आशा सुबोध (वरिष्ठ लोक गायिका एव रिटायर्ड प्राचार्य शिक्षक विभाग ) माही सुबोध , साहेबश्री तामेश्वर अनंत (GSS केंद्रीय कार्यकारणीय नेता),

साहेब अजय कुमार अनंत (आफिस सचिव GSS),साहेबश्री रूपदास टंडन (GSS जिला संयोजक मुंगेली), मुकेश कुमार टंडन (केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य मुंगेली),

साहेब चंद्रप्रकाश टंडन (केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य ),गुलाब अनंत (केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य मुंगेली) श्यामचंद मिरी (केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य मुंगेली),मनमोहन बांधे (GSS जिला संयोजक बेमेतरा),सुकालू कोठारी (GSS जिला संगठक बेमेतरा),नैनदास अनंत (GSS सदस्य मुंगेली) हरि बांधे (GSS सदस्य बेमेतरा), संजय बांधे (GSS सदस्य बेमेतरा), साहेब देवप्रसाद आर्य ,साहेब उमेंदलाल पात्रे (कार्यक्रम मुख्य आयोजक), ने अपने विचार प्रस्तुत किया। साथ में

रंजन जोशी ( ग्राम भंडारी चिरहुला),मनोज चंदेल, नामदास जोशी,रामलाल जोशी,उत्तराकुमार बारमाते, वीरेंद्र जोशी,विष्णु प्रसाद जोशी ,रामदास जोशी,जीवन चंदेल ,सरोज जोशी,उत्तम चतुर्वेदी,छोटेलाल चतुर्वेदी,पंचराम भास्कर,चंद्रभान मीरे,दीनबंधु खांडेकर,चंद्रभान खांडे,राजबंधु खांडे,शिवदयाल खांडे,दीपचंद जोशी,माताएं, बहने चिरहुला ग्रामवासी एवं मुद्दा समर्थक जन- गण - मन उपस्थित रहें।

कार्यक्रम का संचालन साहेब एम डी सतनाम (GSS केन्द्रीय संगठक) ने किया।

कार्यक्रम में विचार गोष्ठी विषय वस्तु से प्रेरित- प्रभावित होकर कई लोगों ने सतनाम धर्म दीक्षा एक साथ लिया ।

सभी लोगों ने सतनाम धर्म के प्रचारक एवं दीक्षाप्रदाता बनने की इच्छा जाहिर कर आवेदन प्रस्तुत किया। जिस पर इन्हें प्राथमिक चरण "सतनाम धर्म वचन बिंदु" का पाठ पढ़ाकर GSS प्रमुख व SDDPS संरक्षक साहेब लखन सुबोध ने सतनाम धर्म दीक्षा प्रदान किया। GSS/SDDPS के भावी कार्यक्रमों में इन लोगों को दीक्षाप्रदाता का शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस कार्यक्रम के विषय वस्तु को जानने-समझने के लिए निम्न लिखित को पढ़ें-समझें :-

👉क्या? सतनामधर्मियों को सतनाम धर्मी कहाने, गिनाने और अपने धर्म स्थलों का मालिकाना व्यवस्थापना हक पाकर अपनी धर्म-संपदा का उपयोग जन-निर्णय से शिक्षा-रोजगार की स्वतंत्रता है ?

👉क्या? गुरुघासीदास कृत सतनाम धर्म, जो लोक दमनकारी धर्म नही लोक चेतनकारी धर्म है (जिसमे मानव-मानव एक समान सिद्धांत प्रतिपादित है) इस सिद्धांत के विपरीत मनुवादी-ब्राम्हणवाद की तरह जन्मना श्रेष्ठ-अश्रेष्ठ-पैदाइशी गुरु-महाराज बन जाने के सिद्धांत के खिलाफ कर्मणा श्रेष्ठ-अश्रेष्ठ को मानने की स्वतंत्रता है ?

👉क्या? आज की दमनकारी फासिस्ट शासन में आम नागरिक अपने धर्मो-मतों को अपनी आस्था अंतरात्मा की चाहत अनुसार मानने, विचार अभिव्यक्ति, निर्भिक विचरण, आर्थिक सामाजिक उन्नति के समान अवसर-शिक्षा-रोजगार पाने की स्वतंत्रता है ? नही है

नहीं है

नही है

👉सतनाम धर्मियों को जबरन हिन्दु धर्म का गुलाम सेवक जाति नहीं कहाने, नहीं गिनाने एवं जातिविरोधी सतनाम धर्मी लिखाने,कहाने, गिनाने व गुरूघासीदास परिवर्तित सतनाम विचार आंदोलन धर्म की विधिक मान्यता की स्वतंत्रता के लिए

👉सतनाम धर्म स्थलो को कथित गुरु-महंतो मुखियाओं के

मालिकाना-व्यवस्थापना की पंडागिरी खत्म कर, आम सतनाम विरोधी सतनाम धर्मी

को लोकतांत्रिक चुनाव से गठित संचालित प्रतिनिधी संस्था

का कानून बनाकर धर्म स्थल के संसाधनों को सिर्फ शिक्षा-रोजगार

में खर्चने, जातिवाद खात्मा अभियान चलाने की-स्वतंत्रता के लिए

👉मनुवादी फासिस्टो द्वारा राजशाही की वापसी कर, देश की संपदा को अपनी तिजोरी में भरने, किसानो-मजदूरों को अंधभक्त आज्ञापालक प्रजा

बनाकर स्थाई शोषक राज्य बनाने और धोखा देकर कथित "हिन्दु राष्ट्र बनाने के लिए मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिख, वाम विचारों एक्टीविस्टों का बर्बर दमन के खिलाफ बोलने-न्याय पाने की स्वतंत्रता के लिए

इस स्वतंत्रता के लिए जन आंदोलन संगठित करने की दिशा में एक युगांतकारी कदम सतनाम धर्म दीक्षा कार्यक्रम को आगे बढ़ाना है। दीक्षा प्राप्ति इच्छुकजन निम्न दस्तावेजों को जाने-पढ़े-जुड़े

1. सतनाम धर्म दीक्षा वचन बिंदु।

2. सतनाम धर्म दीक्षा प्राप्तकर्ता द्वारा अपने जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर/DM) को प्रस्तुत हलफनामा पत्र।

3. दीक्षा प्रमाण पत्र।

4. सतनाम धर्म दीक्षा संस्कार की रीति-नीति।

5. दीक्षा प्रदान करने SDDPS की नियमावली।

6. दीक्षा प्राप्त करने इच्छुक द्वारा SDDPS को प्रदत्त आवेदन पत्र का प्रारूप।

7. SDDPS का उद्देश्य व कार्यक्रम।

8. दीक्षा प्रदाता द्वारा जिला मजिस्ट्रेट/कलेक्टर/DM को प्रस्तुत घोषणा पत्र का प्रारूप (यह छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 व नियम 1969 के तहत अनिवार्य है।)

सतनाम धर्म दीक्षा के वचन बिंदु

मैं-------- पिता/पति-------- गांव--------- थाना-------- जिला---------- अपने अंतःकरण से बिना किसी भय-दबाव व लालच के आज दिनांक ---------- को ऑनलाइन/आफलाइन गुरुघासीदास प्रवर्तित 'सतनाम धर्म' ग्रहण करते हुए निम्न वचन बिंदु को ग्रहण करने दीक्षा लेता हूं।

1. कि, अभी तक लोकदमनकारियों द्वारा गुरुघासीदास के मूल सतनाम धर्म के इतिहास को दबा-छिपाकर उसे सिर्फ एक जाति-पाति अंधविश्वास के अंधेरे में धकेल दिया गया है। गुरुघासीदास विचार शोध संस्था (GVSS) एवं गुरुघासीदास सेवादार संघ (GSS) द्वारा शोध कार्य एवं जन अभियान द्वारा इसके वास्तविक इतिहास का प्रकाशमय स्वरूप सामने आया है। मैं इस प्रकाशमय 'सतनाम धर्म' को स्वीकार व अंगीकार करता हूं।

2. कि, इतिहास के उस मोड़ पर जब क्रूर अपमानजनक राजकीय धार्मिक कानूनों दंडों, ऊंचनीच की जातिवादी जुल्मों, आमजनों की भूमि-संपत्ति को बेदखल करने, लूटखसोट, अंधविश्वास, जड़ता-अपराध का सिलसिला चल रहा था। तब गुरुघासीदास ने ततवादी सतनाम विचार दर्शन से पीड़ितों को संगठित कर सतनाम आंदोलन चलाया और परिणाम स्वरुप अंततः जाति-पाति, जुल्म-ज्यादती विरोधी सतनाम धर्म- संस्कृति की स्थापना की। इसी धर्म-संस्कृति को अंगीकार करके लाखों लोगों ने अपनी संपत्ति व सम्मान की रक्षा करने में समर्थ हुए। उसी सतनाम धर्म को मैं अंगीकार करता हूं।

3. कि, गुरुघासीदास प्रवर्तित इस महान धर्म को कालांतर में लोकदमनकारियों द्वारा दबाया-छिपाया गया। ई. 1860 में गुरु बालकदास की षडयंत्रपूर्वक हत्या की गयी। सतनाम धर्म को पिछलग्गू जाति मात्र बनाकर सभी तरह के अंधविश्वासी जपर्रा बनाने वाले कृत्य किए गये। अंततः लोकदमनकारियों ने लिखित दस्तावेजी रूप में एक प्रतीक चिन्ह "जनेऊ" देकर सतनामियों को किन्हीं कथित ऊंची जाति-वर्ण का नौकर-सेवक बना दिया। तात्कालिक अगुआ-मुखिया लोकदमनकारियों के प्रभाव में आकर एक महान मानवतावादी धर्म को जाती पहचान में बदलकर, मूल सतनाम धर्म को दबा-भुला दिया गया। तब से अब तक सिर्फ दमन-दबाव, जुल्म-ज्यादती, ढोंग- अंधविश्वासी एवं किन्हियों के गुलाम-चाकर बनाये हुए को स्मरण रखते हुए एवं इस जातिवाद को तिरस्कृत करते हुए पुनः सतनाम धर्म के मूल सिद्धांतों को समुन्नत बनाने एवं लाखों लोगों के मूल आस्था-विश्वास को जगाने के लिए संकल्प लेता हूं।

4. कि, गुरुघासीदास के सतनाम धर्म की मूल व्याख्या कि, "जगत श्रेष्ठ ब्रह्म मिथ्या" के अनुरूप किसी मिथ्या ब्रह्म पर आस्था निरर्थक है। जो संसार में क्रियाशील है, वही सत्य है। जिसका संचालन मात्रात्मक और गुणात्मक रूप से सतनाम (पदार्थ का सार रूप या तत्व) की क्रिया द्वारा संचालित होता है और (गति रूप) परिवर्तनकारी है। इसी सतनाम सूत्र से मानव कल्याण के निहितार्थ तैयार किये जा सकते हैं। जो स्वार्थी शोषण जगत को मिथ्या समझने का ढोंग करते हैं, वे लोग ही लोगों को मूर्ख (दमित) बनाकर, लोगों द्वारा निर्मित सत्ता संपत्ति पर कब्जा बनाए रखना चाहते हैं। इस लूट-ढोंग के खिलाफ, दुनिया में बिना किसी जाति, धर्म, लिंग, क्षेत्रवाद, भाषा, राष्ट्रीयता के भेदभाव किये बिना पीड़ित मानवता के पक्षधर सतनाम धर्म को अंगीकार करता हूं।

5. कि, मैं जन्मना श्रेष्ठ-अश्रेष्ठ सिद्धांत को नहीं मानकर कर्म प्रधान, उपयोगी ज्ञान चेतना-विचार को श्रेष्ठ मानूंगा। मैं जन्मना किसी को श्रेष्ठ, गुरु/पूजनीय न मानकर अपने सहसिद्धांत प्रतिनिधि चुनकर सामूहिक नेतृत्व में विश्वास करूंगा। मैं अपने जीवन-समय काल में अधिकतम समय अपने ज्ञान-कौशल को बढ़ाने हेतु समर्थ रखूंगा। ढोंग-ढकोसला में अपना समय बर्बाद नहीं करने की शिक्षा देने वाले सतनाम धर्म को स्वीकार करता हूं।

6. कि, गुरुघासीदास व सतनाम धर्म से संबंधित स्थलों का मालिकाना प्रबंधकीय व्यवस्था किन्ही निजी या सरकारी हाथों से मुक्त कर आम सतनाम धर्मियों के बालिग मताधिकार से निर्वाचित प्रतिनिधि संस्था बनाये जाने विषयक कानून भारतीय संसद/विधानसभा में पारित हो। मैं सतनाम धर्म को व्यवस्थित संगठित करने हेतु इस परम आवश्यक कार्य के लिए हर प्रकार से सक्रिय भूमिका निभाने वचन देता हूं।

7. कि, मैं विभिन्न मतावलंबियों/धर्मावलंबियों के साथ समानतापूर्वक शांतिपूर्ण सहअस्तित्व, परस्पर भाईचारा का रिश्ता विकसित करने में सहयोग प्रदान करने वचन देता हूं।

8. कि, जो तत्व अपने निहित स्वार्थवश अपनी सत्ता- प्रभुता के लिए विभिन्न मतमतांतरों, धर्मावलंबियों में झगड़ा-फसाद करायेगा और आमजनों में घृणा नफरत पैदा करने की कोशिश करेगा, ऐसे लोगों की करतूतों का पर्दाफाश करूंगा। आम लोगों के बीच (जाति,धर्म, संप्रदाय रहित) शांति, एकता- सद्भाव पैदा करने हेतु सक्रिय रहने का वचन देता हूं।

9. कि, मैं अपने संपूर्ण सामर्थ्यनुसार सतनाम धर्म को निरंतर उन्नत बनाने नित नए ज्ञान-विज्ञान को सीखने-आविष्कृत करने सतत प्रयत्नशील रहने का वचन देता हूं।

10. कि, में किसी को भी चाहे वह मेरे अंतरंग परिजन- मित्र ही क्यों न हो, उन्हें मैं पारिवारिक- मैत्री भाव उभार- बहकाकर दबाव बनाकर मेरे अपने सतनाम धर्म को मानने-अपनाने के लिए बाध्य नहीं करूंगा। मैं विधि-सम्मत अधिकार के सामान्य भाव से व्यक्तिश: व सांस्थानिक/सामुदायिक रूप से अपने धर्म का प्रचार करूंगा। इससे मेरे धर्म को कोई अपनाये या न अपनाये, वह स्वतंत्र नागरिक की हैसियत से उनका अधिकार और आजादी है। मैं उनका अधिकार व आजादी का पुरजोर समर्थन करूंगा। चाहे उनके और मेरे धार्मिक विश्वास में कितना भी समानता-असमानता क्यों न हो। सभी को अपनी आस्था विश्वास को मानने का नैसर्गिक व संवैधानिक आजादी है। ऐसी शिक्षा समझ-संस्कार देने वाले सतनाम धर्म को अंगीकार करता हूं।

11. कि, मैं लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष भारतीय संविधान को बदलकर किसी भी धर्म के राष्ट्र, वे चाहे हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिक्ख या मेरे अपने धर्म सतनाम धर्म का राष्ट्र की बात हो। ऐसे किसी भी धार्मिक राष्ट्र बनाने का प्रतिरोध करने जन-जागरण करूंगा। धर्म एकल व्यक्तिश: नागरिक के नितांत निजी आस्था विश्वास का मामला है। लेकिन राष्ट्र का कोई धर्म न हो अर्थात धर्मनिरपेक्ष/ सेक्यूलर चरित्र हो। ऐसी मान्यता वाले "सतनाम धर्म" को अपनाने की दीक्षा लेता हूं।

सतनाम धर्म दीक्षा प्राप्तकर्ता द्वारा अपने जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर/DM को प्रस्तुत पत्र का नमुना)

प्रति,

श्रीमान जिला मजिस्ट्रेट (DM) महोदय,

जिला---------------

विषय:- आवेदक, भारतीय संविधान प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की मौलिक अधिकार के तहत, अपनी विवेक, अंतरात्मा की प्रेरणा से अपने स्वविवेक, स्वेच्छा से, बिना किसी भय व लालच के, जातिवादी शोषण जुल्मों के जनक-पोषक मनुवादी धर्म (वर्तमान प्रचलित नाम- हिंदू धर्म) को त्यागकर गुरुघासीदास प्रवर्तित समता- मानवतावादी "सतनाम धर्म" को अपना लिया हूं। अतएव मुझे हिंदूधर्मी न कहा जाये, न लिखा जाये, न गिना जाये,के संबंध में:-

समक्ष नोटरी शपथ पत्र/हलफनामा पत्र का नमुना जिला---------

मैं---------- लिंग पु./म. आयु----वर्ष पिता/पति-------- पता--------- का निवासी हूं। मैं शपथ पूर्वक बयान देता हूं कि,

1.कि, मैं सतनाम धर्म को अपनाने के लिए "सतनाम धर्म दीक्षा प्रदाय व प्रचार संस्थान" (SDDPS) के दीक्षाप्रदाता/ पुरोहित/ धर्म संपरिवर्तन संस्कारप्रदाता माननीय साहेबश्री ----------- को दीक्षा लिया (केंद्रीय संयोजक GSS एवं संरक्षक SDDPS) बिलासपुर से दिनांक 29-06-25 को ऑनलाइन गूगल मीट माध्यम से दीक्षा लिया हूं।

2. कि, मेरे द्वारा अपनी स्वेच्छा से मनुवादी धर्म (जिनका वर्तमान में प्रचलित नाम हिंदू धर्म है) को त्याग कर सतनाम धर्म को ग्रहण करने के इस तथ्य को, विघ्नसंतोषी तत्वों द्वारा कहीं, यह झूठ-प्रोपेगेंडा न फैला दें कि, "मैंने किसी लालच व दबाव में, किसी के बहकावे-डराने से हिंदू धर्म छोड़कर सतनाम धर्म अपनाया हूं"। इसलिए मैं अपना कथन समक्ष नोटरी शपथ पत्र प्रस्तुत कर रहा हूं।

3. कि, छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्राय अधिनियम 1968 एवं छत्तीसगढ़ स्वातंत्राय नियम 1969 के तहत प्रारूप-क (नियम 3(2) देखिए) एक धर्म से किसी अन्य धर्म में धर्म-संपरिवर्तन के संबंध में प्रज्ञापना, को मुझे सतनाम धर्म में दीक्षा देने वाले/दीक्षाप्रदाता साहेबश्री लखन सुबोध द्वारा श्रीमान जिला मजिस्ट्रेट जिला बिलासपुर को प्रस्तुत करेंगे, तो उसके पक्ष समर्थन में यह शपथ पत्र हालफनामा दे रहा हूं।

4. कि, अब हिंदू धर्म को त्यागने एवं सतनाम धर्म को अपनाने के बाद मुझे "हिंदू धर्मी" न कहा, न लिखा, न गिना जाए। मुझे "सतनाम धर्मी" कहा, लिखा, गिना जाय।

5. कि, मेरे द्वारा मेरे परिजन, मित्र, रिश्तेदार, नागरिक समाज से मेरे धर्म परिवर्तन के बाद भी पूर्ववत परस्पर सौहार्दपूर्ण संबंध निभाता रहूंगा। मेरे अन्तरंग परिजन वे चाहे किसी धर्म को माने या न माने। यह उनकी धार्मिक आजादी होगी। मैं उनकी धार्मिक आजादी का सम्मान करुंगा।

6. कि, मैं मनुवादी/हिंदू धर्म के अंतर्गत जन्मना श्रेष्ठ-अश्रेष्ठ आधारित वर्ण व्यवस्था- जातिवादी ऊंच-नीच का विधान-व्यवहार है, इस अनुसार मैं कथित तौर पर नीच हूं। इस विधान- व्यवहार से मुझे बहुत दुख व क्षोभ होता है। इसलिए मैंने इस कष्ट से मुक्ति पाने इस जातिवादी धर्म को त्यागकर, गुरुघासीदास प्रवर्तित समतावादी "सतनाम धर्म" की दीक्षा लेकर "सतनाम धर्मी" बन गया हूं।

7. कि, हिंदू धर्म में प्रत्येक जाति, अपने से किसी को ऊंच और किसी को नीच मानता व ऐसा ही व्यवहार करता है और इस सार्वभौमिक अर्थ समझ को कि, "समाज" मनुष्यों का होता है। इसे मानने के उलट अपनी "जाति" को ही "समाज" कह-बनाकर घोषित-अघोषित नफरत- परस्पर दुश्मनी बढ़ाता- पनपाता है। इसके दुष्परिणाम में किसी भी मानव-मानव के बीच (किसी भी स्त्री-पुरुष के स्वैच्छिक विवाहित जोड़े को प्रकृति प्रदत्त मानवीय इच्छा व संवैधानिक/कानूनी अधिकार का प्रावधान होते हुए भी, इन कथित समाज (वास्तव में नफरती जातिवादी व्यवस्था की जाति) के ठेकेदारों द्वारा तानाशाही-प्रताड़नापूर्ण "सामाजिक बहिष्कार" व दंड किया जाता है। मैं इन करतूतों को अपराध मानता व नफरत करता हूं और ऐसे संकीर्ण धर्म को त्यागकर मानव-मानव में भेद नहीं करने वाले "सतनाम धर्म" को अपना लिया हूं।

8. कि, इस धर्म में मनुष्यों के दुखों में सहयोग-मदद करने भागीदारी करने के बदले, हठपूर्वक-कथित "सामाजिक इज्जत" का भूत खड़ा कर "मृत्यु भोज" कराना एवं मृतक की कथित "आत्मा की मुक्ति" के लिए लूट-झूठ से बनाए गए कल्पित स्वर्ग-नरक का डर दिखाकर, विविध पाखंड-आडंबर जनित गुरुवापन-चौका पोताई-पंडागिरी, ढोंग प्रदर्शन किया जाता है। इसे जाने-अनजाने कई परिवार आर्थिक कर्ज-बोझ में दबकर शोषण की चक्की में पीसा रहे हैं। इससे मुझे अत्यंत दुख-पीड़ा होती है। इसलिए मैं ऐसे जुल्मकारी हिंदू धर्म को छोड़कर सतनाम धर्म अपना लिया हूं।

9. कि, मैं हिंदू धर्म में रहकर देखता था कि, हिंदू धर्म के उन लोगों द्वारा, जो अपने को हिंदू धर्म की रक्षा के नाम से, गैर हिंदूधर्मियों को विशेषकर मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, सिक्ख धर्म आदि के मानने वाले लोगों के प्रति नफरत-हिंसा फैलाते हैं। इसे देख,जानकर, मैं अत्यंत दुखी होता हूं और ऐसे दुखदाई- कष्टकारी धर्म को छोड़ना उचित समझकर त्याग कर दिया और सभी धर्मों के प्रति प्रेम-सद्भाव को मानने वाला "सतनाम धर्म" को अपना लिया हूं।

10. कि, महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक मानकर (हिंदू धर्म में वर्णित संहिताओं-प्रावधानों/ परंपरागत कार्यों पर आधारित) गुलाम दासी की स्थिति में रखा जाता है। इसे मेरा अंत:करण स्वीकार नहीं करता। इसलिए मैं इस धर्म को छोड़कर महिलाओं के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने वाला "सतनाम धर्म" को अपना लिया हूं।

11. कि, हिंदू धर्म के जिस जाति श्रेणी सतनामी में मुझे जन्मना अश्रेष्ठ माना जाता है और इसी जाति के कथित गुरु-महंत-मुखिया के द्वारा इस जन्मना श्रेष्ठ-अश्रेष्ठ को मानने "जनेऊ" पहनाकर कथित श्रेष्ठ की सेवा चाकरी करने जगजाहिर "सर्टिफिकेट" जारी किया गया है और इस प्रपंच में मुझे कथित ऊंची जातियों को जो मुझसे नितान्त छोटे उम्र के व्यक्ति को भी, हिंदू धर्मादेश अनुसार प्रणाम करने-दबकर रहने की बाध्यता है। ऐसा न करने पर घोषित-अघोषित दंड का भय सताता है। इससे मैं अत्यंत हीनभाव का शिकार होकर जिंदगी भर तड़पने को मजबूर होता हूं। मैं अब इसे स्वीकार नहीं कर सकता और हिंदू धर्म को त्यागकर ही संतुष्टि मिली है। इसलिए मैंने इसे त्याग दिया है और "सतनाम धर्म" को अपना लिया है।

12. कि, मनुष्यों को निरीह- कमजोर बनाकर शोषण- प्रताड़ना को जारी रखने के लिए, अलौकिक मिथकीय - रूप-प्रतीक का सहारा, लेकर व्यक्ति के ज्ञान, अविष्कृत युक्ति के विकास को रोका-डराया जाता है, जिसे मैं स्वीकार नहीं कर सकता। इसलिए मैं सत को सत और झूठ को झूठ कहने वाला सतनाम धर्म को अपना लिया हूं।

13. मनुवादी/हिंदू धर्म में इसी तरह की बहुत से ऐसी बातें हैं, जो अत्यंत अमानवीय मान्यताएं/परंपराएं विधान व प्रचलन में है, जिसे मैं मानवीय गरिमानुरूप नहीं समझता और इससे मुझे नफरत है। यदि अब भी मैं इस धर्म में रहा तो अवसादग्रस्त-निराशा- हताश हो कर मृत्यु आशंकित बीमार हो जाऊंगा। इसलिए मैंने, इन बुराइयों से मुक्त "सतनाम धर्म" को अपना लिया हूं।

14. कि, मैं "सतनाम धर्म" अपनाने के लिए सतनाम धर्म दीक्षा प्रदाय व प्रचारक संस्थान (SDDPS) द्वारा प्रकाशित-प्रचारित "सतनाम धर्म दीक्षा-वचन पत्र" को बहुत अच्छी तरह से पढ़ा-सुना-जाना-समझा है, और इसे अंतःकरण से मानते व समर्थन करते हुए दीक्षा लेकर सतनाम धर्म को अपना लिया है। अतएव मुझे हिंदू धर्मी, न कहा जाये न, लिखा जाये, न गिना जाये, की प्रार्थना है।

दिनांक-------

हस्ताक्षर शपथकर्ता--------

सत्यापन

मैं, नाम--------- पिता/पति------- पता उपरोक्तानुसार है। यह सत्यापित करता हूं कि, मेरी जानकारी में शपथ पत्र के क्र. 1 से 14 तक का वर्णन सत्य है। मैं बिना किसी झूठ-लालच डर-भय के एवं बिना किसी नशा के पूर्ण होशो-हवास से यह सत्यापित करता हूं।

दिनांक--------

पहचानकर्ता--------

हस्ताक्षर नाम-------- पता---------

सत्यापनकर्ता---------- हस्ताक्षर

----------------------------------------

जारीकर्ता

रूपदास टंडन

(GSS जिला संयोजक एवं SDDPS सदस्य जिला मुंगेली (छ.ग.) मो.नं.:-9340353445

दिनांक:- 29-10-2025

संलग्न :- संदर्भित फोटोग्राफ

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#CG NEWS

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