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पुलिस सूत्रों के अनुसार, माओवादी नेता मलेश ग्रामीणों के एक समूह के साथ कैंप में पहुंचा और मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई। हालांकि, पुलिस द्वारा औपचारिक आत्मसमर्पण की प्रक्रिया अभी बाकी है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और दो पत्रकारों ने इस कैडर को आत्मसमर्पण के लिए मनाने में अहम भूमिका निभाई। सूत्रों ने इसे 'कम्युनिटी आउटरीच' का एक उदाहरण बताया, जो सुरक्षा अभियानों का पूरक है।
अधिकारियों ने बताया कि मल्लेश संगठन का सक्रिय सदस्य था और सुरक्षा बलों की नजरों में था। फिलहाल, उसके दस्तावेजों की जांच और सत्यापन का काम चल रहा है। एक BSF अधिकारी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडर को सरकार की पुर्नवास नीति के तहत लाभ दिए जाएंगे। इसमें सामान्य नियमों के अनुसार, समाज में फिर से शामिल होने और आजीविका के लिए सहायता शामिल है।
क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसे आत्मसमर्पण से डर कम होगा और उन अंदरूनी इलाकों में विकास कार्यों का रास्ता खुलेगा जो लंबे समय से माओवादी प्रभाव में रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने 2014-2026 को भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए 'एक स्वर्णिम युग' बताया है और माओवाद को खत्म करने का संकल्प लिया है।
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