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छत्तीसगढ़ :-मुंगेली न्यूज़ : तीन माह में ही कलेक्टर ने की जनपद CEO की छुट्टी, समन्वय की कमी, कार्यशैली पर सवाल और शिकायतों की लंबी फेहरिस्त चर्चा में

Abhyuday Bharat News / Sat, Apr 11, 2026 / Post views : 200

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तीन माह में ही कलेक्टर ने की जनपद CEO की छुट्टी, समन्वय की कमी, कार्यशैली पर सवाल और शिकायतों की लंबी फेहरिस्त चर्चा में… सरपंच ने भी लगाया था पद का दुरूपयोग करने का आरोप

मुंगेली l जिले में प्रशासनिक हलचल एक बार फिर बड़े फैसले के रूप में सामने आई है। जिला मुख्यालय स्थित जनपद पंचायत मुंगेली के सीईओ विक्रम सिंह ठाकुर को कलेक्टर कुंदन कुमार ने महज तीन माह के बेहद अल्प कार्यकाल में ही सीईओ के पद से हटाकर उनके मूल पद पर भेज दिया है। उनकी जगह अब प्रभारी सहायक परियोजना अधिकारी संतोष कुमार घोषले को जनपद सीईओ का सम्पूर्ण प्रभार सौंपा गया है। आदेश में इसे प्रशासनिक व्यवस्था के तहत कार्यों के सुचारू संचालन का हिस्सा बताया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत और अंदरूनी चर्चाएं इस बदलाव को कहीं अधिक जटिल तस्वीर में पेश कर रही है।

आदेश में साधारण पर चर्चा में असाधारण फैसला

सरकारी पत्राचार की भाषा हमेशा संयमित होती है, लेकिन इस आदेश के बाद जो चर्चा शुरू हुई है, वह सामान्य नहीं कही जा सकती। कई स्तरों पर सवाल उठ रहे हैं, जैसे- क्या यह सिर्फ रूटीन ट्रांसफर है? या फिर लंबे समय से चल रही प्रशासनिक कार्यों में असंतोष की परिणति? या फिर सिस्टम के भीतर दबे विवादों का दबाव? आधिकारिक तौर पर किसी भी “विशेष कारण” का उल्लेख नहीं है, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की व्याख्याएं चल रही हैं।

देवगांव विवाद चर्चा का केंद्र!

जिला मुख्यालय से लगे देवगांव ग्राम पंचायत के विवाद को भी इस पूरे घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी भी आधिकारिक आदेश में इस विवाद को कारण नहीं बताया गया है। हालांकि, चर्चा यह जरूर है कि सरपंच योगेश पटेल और जनपद सीईओ विक्रम सिंह ठाकुर के बीच तीखा टकराव हुआ थाl पूर्व सरपंच के भुगतान को लेकर वर्तमान सरपंच योगेश पटेल ने जनपद सीईओ विक्रम सिंह ठाकुर पर पक्षपात करने, लेनदेन कर अधूरे कामों का अधूरे दस्तावेज के आधार पर भुगतान कराने का दबाव बनाने तथा प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर से शिकायत की थी, जिस पर जांच उपरांत कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।

सरपंच ने शिकायत में यह भी जिक्र किया था कि पूर्व सरपंच के कार्यों का भुगतान नहीं कराने पर परेशान करने के लिए ग्राम पंचायत के मौजूदा कार्यों की जांच व कार्रवाई का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया था। इस बीच विकास कार्यों और वित्तीय प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े हुए थे, लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि इन चर्चाओं को आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता। फिलहाल यह मामला “चर्चा में मौजूद कारणों” के रूप में देखा जा रहा है, न कि घोषित कारण के रूप में।

शिकायतें, असंतोष और प्रशासनिक दबाव की कहानी?

सूत्रों के अनुसार, केवल एक मामला नहीं बल्कि कई स्तरों पर असंतोष की स्थिति कुछ समय से चर्चा में थी। इनमें प्रमुख रूप से कहा जा रहा है उच्च और जमीनी स्तर के बीच समन्वय की कमी, निर्णय प्रक्रिया को लेकर टकराव जैसी स्थिति, अधीनस्थ अमले के साथ कार्य संतुलन की समस्या, उच्च अफसरों के निर्देशों कि अवहेलना, प्रशासनिक कार्यों में ढीला रवैय्या जैसे इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, क्योंकि यह केवल चर्चाओ के बाजार में है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में इन्हें पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा रहा।

एक आदेश, कई संदेश…

कलेक्टर कुंदन कुमार द्वारा जारी आदेश भले ही साधारण प्रशासनिक फेरबदल जैसा दिखे, लेकिन इसके राजनीतिक और प्रशासनिक संकेत गहरे माने जा रहे हैं। मुंगेली जनपद के सीईओ को मूल पद पर वापस भेजना और नए अधिकारी को प्रभार देना यह संकेत देता है कि प्रशासन अब “डैमेज कंट्रोल” मोड में है और कार्यशैली को लेकर सख्ती का संदेश देना चाहता है।

सिस्टम के अंदर की खामोश हलचल

यह पूरा मामला केवल एक पद परिवर्तन नहीं बल्कि सिस्टम के भीतर चल रही खामोश हलचल को उजागर करता है। नीचे और ऊपर के बीच संवाद की कमी, शिकायतों का बढ़ता दबाव और प्रशासनिक कार्यों और निर्णयों पर उठते सवाल जैसी चर्चाएं इस समय लोगों के बीच तैर रही है।

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