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दिल्ली न्यूज : टैगोर की जयंती पर बंगाल की गद्दी संभालेगा BJP का मुख्यमंत्री, शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे

Abhyuday Bharat News / Wed, May 6, 2026 / Post views : 132

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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार 9 मई को शपथ ले सकती है। सीएम पद के लिए शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे बताए जा रहे हैं, हालांकि संघ पृष्ठभूमि वाले नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी इंडस्ट्री फ्रेंडली नेतृत्व के जरिए वादे पूरे करना चाहती है।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को होगा। इसी दिन रवींद्र नाथ टैगोर की जयंती है। बीजेपी के पहले सीएम के लिए शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। वजह यह कि उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम से हराया और इस बार फिर भवानीपुर से मात दी। वह राज्य में बीजेपी का आक्रामक चेहरा हैं। चुनाव प्रचार में हिंदू वोटर्स को एकजुट करने की बात की और नेता प्रतिपक्ष रहे।

टीएमसी से बीजेपी में शामिल हुए शुभेंदु ममता के काम करने के तरीके से लेकर पूरे सिस्टम को समझते हैं। हालांकि बीजेपी का पुराना कैडर ना होना उनकी उम्मीद को थोड़ा कम कर सकता है। ऐसा भी नहीं है कि बीजेपी ने दूसरे पार्टी से आए नेताओं पर भरोसा नहीं किया। असम इसका उदाहरण है, जहां बीजेपी ने कांग्रेस से आए हिमंता बिस्वा सरमा को सीएम बनाया। वैसे असम और बंगाल की स्थिति में फर्क है, क्योंकि बंगाल में बीजेपी के पास और भी चेहरे हैं।


संघ बैकग्राउंड वाले नेता बन सकते हैं बीजेपी का चेहरा

बीजेपी ने पिछले कुछ महीनों में जब राज्यों में संगठन की नई टीम का चयन किया तो राष्ट्रीय आरएसएस बैकग्राउंड वाले नेताओं को तरजीह दी। इस बार चुनाव में भी टीएमसी से लोगों को नहीं लिया गया, जैसा पिछले चुनाव में हुआ था। इसलिए यह भी संभावना है कि बीजेपी अपना पहला सीएम किसी ऐसे नेता को बनाए जो शुरू से पार्टी की विचारधारा से जुड़ा हो और संघ बैकग्राउंड का हो। बीजेपी के एक नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि संघ एंगल देखने पर मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष साभिक भट्टाचार्य और दिलीप घोष का नाम सामने आता है। दिलीप घोष ने राज्य में बीजेपी का जनाधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। साभिक को बूथ स्तर के प्रबंधन में माहिर माना जाता है। वे 1974 से ही संघ से जुड़े रहे। बंगाल बीजेपी में संघ बैकग्राउंड के और नेता भी हैं।

...ताकि वादे पूरे हों

बीजेपी ने बंगाल में टीएमसी को ये कहकर घेरा कि न यहां रोजगार है न इंडस्ट्री, इसलिए युवा पलायन कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी चाहेगी कि सरकार का चेहरा इंडस्ट्री फ्रेंडली हो, जिससे राज्य में बीजेपी अपने वादे पूरे कर सके।


राजस्थान, MP वाला प्रयोग तो नहीं होगा?

ये भी चर्चा है कि क्या बीजेपी बंगाल में मध्य प्रदेश या राजस्थान जैसा प्रयोग कर बड़े चेहरे की जगह किसी कम जाने पहचाने चेहरे को सामने कर सकती है? हालांकि बंगाल जैसे राज्य में इसकी संभावना कम लगती है। मध्य प्रदेश, राजस्थान में बीजेपी पहले से ही मजबूत रही है और सरकार में भी रही है। जब ओडिशा में बीजेपी की पहली बार सरकार बनी तो मोहन चरण माझी को सीएम बनाया। हालांकि माझी छात्र जीवन से ही संघ से जुड़े रहे।

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