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Axios की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की से कहा है कि वे फिर से बेवकूफ नहीं बनना चाहते हैं। उन्होंने इलाके में अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का हवाला देते हुए कहा कि इससे उनका संदेह और गहरा हो गया है कि कूटनीति असल में आगे की सैन्य कार्रवाई के लिए एक आड़ हो सकती है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह सैन्य जमावड़ा ईरान को धोखा देने के लिए नहीं, बल्कि उस पर दबाव बनाए रखने के लिए है। Axios ने बताया कि अमेरिका गुरुवार तक सीधी बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रहा है, जिसके लिए इस्लामाबाद को चुना जा सकता है। लेकिन ईरान पिछली कूटनीतिक वार्ताओं के अनुभव से संभलकर चल रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी अधिकारी पिछली वार्ताओं को उदाहरण के तौर पर देखते हैं कि बातचीत का इस्तेमाल किसी समझौते तक पहुंचने के बजाय समय जुटाने या युद्ध के मैदान में स्थिति को अपने पक्ष में करने के लिए किया जा सकता है।
वॉइट हाउस ने अपने संदेश में ईरान को बताया है कि ट्रंप बातचीत को लेकर गंभीर हैं। इससे पहले ट्रंप ने गुरुवार को बताया कि उनके साथ उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबिय, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर बातचीत के प्रयास में शामिल थे। इसी दौरान उन्होंने कहा कि ईरान ने उन्हें तेल, गैस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा एक बड़ा तोहफा दिया है और दावा किया कि अमेरिका सही लोगों के साथ बातचीत कर रहा है।
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